कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है, जब वहां का समाज आगे बढ़ता है : दीपक विष्णुते

कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है, जब वहां का समाज आगे बढ़ता है : दीपक विष्णुते
X

अरेरा कॉलोनी स्थित समिधा बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित

कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है, जब उसका समाज आगे बढ़ता है। संगठन किसी संकट की उपज नहीं, बल्कि हमारा स्वभाव बनना चाहिए।” यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री दीपक विष्णुते ने भोपाल में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन में व्यक्त किए।

ओल्ड कैफियन खेल मैदान, अरेरा कॉलोनी स्थित समिधा बस्ती में आयोजित यह सम्मेलन उत्साह, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ।

सम्मेलन में हजारों की संख्या में उपस्थित नागरिकों ने नाट्य मंचन, देशभक्ति गीतों और कवि सम्मेलन के माध्यम से राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत अनुभव किया। पूरा परिसर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जागते रहो हिंदुओं, फिर कोई मुगल आप पर आक्रमण न कर दे” जैसे नारों से गूंजता रहा।

मंच पर विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री दीपक विष्णुते तथा प्रांत सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

समाज परिवर्तन का महा आंदोलन है संघ

अपने संबोधन में श्री विष्णुते ने कहा कि भारत भूमि त्याग, परोपकार और समर्पण की जननी रही है। इसी धरती पर गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया, जिनके 350वें बलिदान वर्ष को आज देश स्मरण कर रहा है।

उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के 150वें जयंती वर्ष और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि क्रांति का उद्घोष है, जिसने हजारों क्रांतिकारियों को बलिदान के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग सौ वर्षों से निरंतर चल रही यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ का मूल साधना केंद्र ‘शाखा’ है, जहाँ से समाज निर्माण का कार्य होता है। स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य संघ निरंतर कर रहा है।

दीपक विष्णुते ने स्पष्ट किया कि संघ कोई साधारण संगठन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का महा आंदोलन है।

उन्होंने समाज निर्माण के पाँच सूत्रों पर विशेष बल दिया

हिंदू-हिंदू के बीच भाईचारे की भावना,

परिवार में संस्कारों की स्थापना,

पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका,

संविधान का अक्षरशः पालन,

तथा स्वदेशी, स्वधर्म और स्वराज का भाव।

उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को अपनाकर ही स्वामी विवेकानंद के उस स्वप्न को साकार किया जा सकता है, जिसमें भारत माता को विश्वगुरु के रूप में देखा गया है।

हिंदू समाज का जागरण आवश्यक : पंडित प्रदीप मिश्रा

पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदू समाज को आत्मरक्षा और सामाजिक दायित्व का बोध कराया है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म में हिंदुओं को जागृत करने के लिए हिंदू सम्मेलन करने पड़ रहे हैं, यह चिंतन का विषय है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समाज केवल भौतिक सुविधाओं और मोबाइल तक सीमित रह गया, तो इतिहास स्वयं को दोहरा सकता है।

पंडित मिश्रा ने माता पार्वती और भगवान शिव की कथा के माध्यम से मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक नारी पूरे परिवार को राष्ट्र और धर्म से जोड़ सकती है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि वे ‘पंच परिवर्तन’ को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।

कार्यक्रम के अंत में भारत माता की संगीतमय आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने सहभागिता की। इसके पश्चात भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।

यह भव्य हिंदू सम्मेलन समाज में एकता, जागरण और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और अधिक सशक्त करता हुआ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Next Story