महिला क्रिकेट का नया अवतार प्रयोग नहीं, अब मुख्यधारा का कमर्शियल खेल

नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट ने वर्ष 2026 में यह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी उम्मीद पिछले एक दशक से की जा रही थी। जो प्रतियोगिता कुछ वर्ष पाइने तक एक प्रयोगात्मक खेल संपत्ति मानी जाती थी, वह अब मुख्यधारा की कमर्शियल और व्यूअरशिप पावर हाउस के रूप में स्थापित हो चुकी है। दर्शकों की संख्या, ब्रांड निवेश, विज्ञापन बजट और खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू हर मोर्चे पर महिला क्रिकेट ने ऐतिधसिक छलांग लगाई है।
रिकॉर्ड व्यूअरशिप का अनुमान महिला
क्रिकेट के 2026 संस्करण को लेकर ब्रॉडकास्टर ने जो अनुमान पेश किए हैं, वे इस बदलाव की साफ तस्वीर दिखाते हैं। कंपनी के अनुसार, इस सौजन को लीनियर टीवी पर पहुंच 200 से 250 मिलियन दर्शकों तक पहुंच सकती है जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह आंकड़ा 105 मिलियन के आसपास खाने का अनुमान है। यह वृद्धि 2025 की तुलना में 50 से 60 प्रतिशत अधिक मानी जा रही है। मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल दर्शाता है कि महिना क्रिकेट अब केवल 'वैकल्पिक खोल' नाई, बल्कि दर्शकों की नियमित पसंद बन चुका है। खासतौर पर युवा दर्शक वर्ग, शहरी परिवार और डिजिटल यूजर इस बदलाव की रोड़ बनकर उभरे हैं। स्पॉन्सरशिप और विज्ञापन में बड़ी छलांग दर्शकों के भरोसे के साथ ही ब्रांड्स का निवेश भी तेजी से बढ़ा है। 2026 में महिला क्रिकेट से जुड़ा स्पॉन्सरशिप खर्च 7120 से 2130 करोड़
ब्रांड पोर्टफोलियो का विस्तार
2026 में महिला क्रिकेट से जुड़े सेंट्रल स्पॉन्सर की संख्या 15 से अधिक हो गई है। सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि इस बार पारंपरिक एफ एम सी जी या बैंकिंग ब्रांड्स के अलावा नई कैटेगरी के ब्राड्स भी जुड़े। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल और ज्वेलरी सेक्टर ने महिला क्रिकेट में सक्रिय भागीदारी दिखाई। ओपन ऐ आई जैसी वैश्विक पहचान वाले नाम का जुड़ना इस बात का संकेत है कि महिला क्रिकेट को अब भविष्य के दर्शकों से जुडने का मजबूत माध्यम माना जा रहा है।
प्रयोग से प्रोडक्ट बनने की यात्रा
विशेषज्ञों के अनुसार, महिला क्रिकेट की यह सफलता अचानक नहीं आई है। बेहतर ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शन डेटा आधारित्त विश्लेषण डिजिटल इंगेजमेंट और प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट ने इसे मजबूत आधार दिया है। जहां पहले महिला क्रिकेट को सीमित दर्शकों वाला प्रयोग माना जाता था. वहीं अब यह एक स्थायी, लाभकारी और विस्तारशील स्पोर्टस प्रॉपर्टी बन चुकी है।
तक पहुंचाने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही विज्ञापन बजट में 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्केटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि महिला क्रिकेट का दर्शक वर्ग युवा डिजिटल रूप से सक्रिय और ब्रांड-फ्रेंडली होता जा रहा है, जिसके कारण कंपनियां इसे दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रही हैं। अब महिला क्रिकेट केवल सामाजिक जिम्मेदारी या प्रतीकाायक समर्थन का विषय नहीं रह गया है, बलिक यह ठोस रिटर्न देने काला पनेटफॉर्म बन चुका है।
खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू में तेज बढ़ोतरी
2026 में महिला क्रिकेट का सबसे अहम पहलू या खिलाड़ियों की बढ़ती आर्थिक और ब्रांड पहचान। शीर्ष भारतीय महिला क्रिकेटरों की एंडोर्समेंट फौस में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। स्टार खिलाड़ी स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसी नामचीन खिलाड़ियों की वार्षिक ब्रांड वैल्यू अप ?1 से 22 करोड़ तक पहुंच चुकी है। ब्रांड मैनेजमेंट एजेंसियों के अनुसार, महिला क्रिकेटरों को अब युवा प्रेोपा अनुशासन नेतृत्व और भरोसे का प्रतीक माना जाने लगा है। यही कारण है कि फिटनेस, फाइनस, एजुकेशन, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में मशिना खिलाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
आगे की तस्वीर
2026 का संस्करण यह साफ कर देता है कि आने वाले वर्षों में महिला क्रिकेट और अधिक फ्रेंचाइजी मॉडल अंतरराष्ट्रीय निवेश और वैश्विक ब्रांड साझेदारी की और बढ़ेगा। महिला क्रिकेट की यह सफलता केवल खेल की नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक स्वीकार्यता और नई सोच की जीत भी है। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय महिला क्रिकेट ने खुद को मैदान और बाजार दोनों में मजबूती से स्थापित कर लिया है।
