वित्तीय संतुलन और राजकोषीय दायित्व का संतुलन

वित्तीय संतुलन और राजकोषीय दायित्व का संतुलन
X
बजट में वित्तीय संतुलन और राजकोषीय दायित्व के साथ आर्थिक विकास, निवेश और भविष्य की जरूरतों को साधने पर जोर दिया गया है।

कठिन वैश्विक परिवेश में यह आम बजट भारत को केवल आर्थिक विकास करने के लिए नहीं, बल्कि विकास को संतुलन के साथ नियंत्रित करने के लिए तैयार करता दिखाई देता है। यह बजट एक आर्थिक दस्तावेज़ से कहीं अधिक है। यह बदलते भारत और दुनिया के बदलते माहौल के साथ कदमताल करता नजर आता है। आम बजट का किसी भी अर्थ में लोकलुभावन कहा जाना कठिन है। इसमें समय के साथ समाज के कल्याण का भाव समाहित है।

बजट प्रावधानों के अनुसार यह भी सोचना चाहिए कि इसे क्या-क्या कदम आने वाले समय में उठाए जा सकते हैं। जिनमें देश में घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो। वृद्धि भी कम से कम उतनी हो, जितनी इस आर्थिक व्यवस्था में लाई गई है। इसी उद्देश्य से पूरा केंद्रीय बजट में खास यह संकेत दिया गया है कि व्यापार और उद्योग के विकास के लिए सरकार किस प्रकार आगे बढ़ेगी। इसमें दूरदर्शिता दिखाते हुए सहयोगी देशों के साथ तालमेल बनाने के लिए सीमा शुल्क के साथ जारी टैरिफ से संबंधित तनाव को कम करने की बात कही गई है।

सुधार की बड़ी कोशिश की है। इससे भारत ने पिछले माह में कई मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। यूरोपियन संघ से भी भारत का व्यापार मजबूत हुआ है। भारत को रुपए की अस्थिरता के बावजूद भी एक मजबूत बाजार के रूप में देखा जा रहा है। यूरोपियन संघ के साथ भारत का व्यापार समझौता एक कदम है। भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाते हुए प्रतिस्पर्धा बनाए रखना होगा।

इस विकास को पाने के लिए वित्त मंत्री द्वारा बजट में कुछ अहम कदम उठाए गए हैं। बजट के अनेक पहलू हैं, जिनसे उम्मीद को बहुत बल मिलता है। अमेरिका के मुकाबले भारत एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस वर्ष वित्त मंत्री ने मूल मंत्र रखा है पूंजी, प्रौद्योगिकी और निर्यात पर विशेष ध्यान। बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ाकर 8 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।

इससे व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं। व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का प्रबंधन भी तैयार किया गया है। सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को निभाते हुए विकास की गति बनाए रखने का प्रयास कर रही है।

आज हम कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार की यह एक बड़ी कामयाबी है। वित्तीय संतुलन के माध्यम से भी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन का संतुलन बनाए रखा गया है। कार्बन न्यूट्रलिटी, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन, आई क्लाउड, सुरक्षित स्टोरेज जैसे नए क्षेत्रों में बजट बढ़ाने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

2030–31 में जीडीपी के अनुपात में 51 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस आम बजट की सबसे खास बात यह है कि वित्तीय अनुशासन के साथ विकास को प्राथमिकता दी गई है। कुल मिलाकर यह बजट मोदी सरकार के विकसित भारत के संकल्प के साथ वित्तीय संतुलन और राजकोषीय उत्तरदायित्व को भी साधने का प्रयास है।

Tags

Next Story