Top
Home > विशेष आलेख > स्वास्थ्य के शत्रु से मित्रता छोड़ें

स्वास्थ्य के शत्रु से मित्रता छोड़ें

डॉ. सुखदेव माखीजा

स्वास्थ्य के शत्रु से मित्रता छोड़ें
X

वेबडेस्क। विश्वव्यापी अभियान तम्बाकू निषेध दिवस हेतु वर्ष 2021 के लिए निर्धारित ध्येय वाक्य है :"व्यसन से मुक्ति – मुक्तिसे विजय " सामाजिक,पारिवारिक तथा व्यक्तिगत जीवन में शत्रु से मित्रता करने से न केवल अनेक समस्याएँ सुलझ जाती हैं अपितु पारस्परिक कटुता भी समाप्त हो जाती है परन्तु युवावस्था में मिथ्या स्व-आनंद के लिए धूम्रपान के शौक से जो युवा मित्रता करते हैं बाद में वही शौक उनके स्वास्थ्य का घोर शत्रु बन जाता है. ऐसी मित्रता स्वघाती होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संचालित आठ स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में से एक प्रमुख स्वास्थ्य अभियान है "विश्व तम्बाकू निषेध अभियान". इस विश्वव्यापी अभियान का प्रतीक दिवस है "विश्व तम्बाकू निषेध दिवस" जिसका प्रति वर्ष 31 मई को पूरे विश्व में आयोजन किया जाता है. वर्ष 1987 से निरंतर आयोजित किए जा रहे इस वार्षिक हेतु वर्ष 2021 काध्येय सन्देश है:

"व्यसन से मुक्ति – मुक्ति से विजय

मानव शरीर का ऐसा कोई भाग अथवा अंग नहीं है जिस पर तम्बाकू जन्य व्यसन का दुष्प्रभाव न होता हो|परन्तु प्राणवायु को संधारित करने वाले जीवनदायी अंगों"फेफड़ों" पर इस व्यसन का विषजन्य प्रभाव प्राणघातक होता है| विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से संपन्न किए गए विभिन्न अध्यनों के अनुसार तम्बाकू तथा उसके विषैले धुएँ में पाए जाने वाले विषैले रसायन मानव शरीर के श्वसन तंत्र पर जो घातक प्रहार करते हैं उनसे उत्पन्न जटिल रोग निम्नानुसार हैं

फेफड़ों का कैंसर :

इस प्राणघातक रोग के मुख्य कारक तम्बाकू से उत्सर्जित धुंएँ के कैंसरकारी "कोम्प्लेक्स केम्मिकल्स" होते हैं | विश्व में प्रति वर्ष "लंग कैंसर" के कारण मृत रोगियों की गणना में तम्बाकू जन्य "लंग कैंसर" के रोगियों की संख्या लगभग दो तिहाई होती है| धूम्रपान के आदी व्यक्ति इसे छोड़ दें तो दस वर्ष तम्बाकू मुक्त रहने के बाद फेफड़े के कैंसर रोग की आशंका आधी हो जाती है |

दीर्घ कालीन श्वसन रोग (क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिसीज़) :

साँस अवरोधित करने वाले इस रोग में श्वसन नलिकाओं में विकार उत्पन्न हो जातें हैं जिसके कारण सामन्य"ब्रोंकाइटिस" की खांसी कुछ समय बाद दमे के दौरे के रूप में आकर फेफड़ों की कार्य क्षमता को कम कर देते हैं | इस अवस्था में फेफड़ों की प्रतिरोध शक्ति कम हो जाने के कारण जीवाणु जन्य "निमोनिया" की जटिलता भी प्राणघातक हो सकती है |

अस्थमा :

"इम्यून सिस्टम" कमजोर होने के कारण यह श्वास अवरोधी रोग प्राय: किशोरावस्था में ही प्रारंभ हो जाता है परन्तु धूम्रपान के धुंएँ में उपस्थित विषैले रसायनों की "एलर्जी" के कारण इस रोग के दौरों की संख्या एवं प्रभाव इसकी जटिलता के प्रभाव के कारण कम आयु में ही "इन्हेलर्स ,नेबुलाईज़र्स" की आवश्यकता हने लगती है जोकुछ समय पश्चात निष्प्रभावी होने लगते हैं |

विश्व स्वास्थ्य संगठन , देश विदेश के शासकीय स्वास्थ्य विभागों तथा विषाणु विज्ञान ,जैवरसायन, चिकित्सा विज्ञान सेसम्बद्ध अनुसंधान संस्थानों द्वारा कोरोना प्रजाति के घातक" कोविड:19" विषाणुजनित वैश्विक संक्रमण के सम्बन्ध में घोषित प्रतिवेदनों एवं सूचनाओं के अनुसार कोविड:19 संक्रमण की आशंका उन व्यक्तियों में अपेक्षाकृत अधिक होती है जो सह-रुग्णता :( Co-Morbid) रोगों से ग्रसित रोगों की श्रेणी के अंतर्गत आतें हैं ;उदाहरणत:श्वसन विकार ( ब्रोंकिअलअस्थमा,स्मोकर ब्रोंकाईतिस, तपेदिकआदि) ,तम्बाकू जन्य मुख एवं गले के रोग ,अनियंत्रितउच्च रक्तचाप, अनियंत्रितमधुमेह,अल्कोहल जन्य लिवररोग, रक्त विकार , कैंसर रोग, कीमोथेरपी उपचार,क्रोनिक किडनी रोग ,अंग प्रत्यारोपण औषधियां , एच आई वी जन्य रोग, रोग प्रतिरोध क्षीणता, इम्युनिटी हीनता,जन्मजात ह्रदय विकार जैसे दीर्घ अवधिप्रभावित व्यक्तियों में रोग प्रतिरोधी क्षमता पूर्णत: प्रभावशाली नहीं होती है अत: इन परिस्थितियों से प्रभावित व्यक्तियोंको"कोविड:19" विषाणु संक्रमण एवं उसकी जटिलताओं की आशंका अन्य सामान्य व्यक्तियों की तुलना में अधिक हो सकती है | परन्तु उपरोक्त उल्लेखित विभिन्न सह-रोगों में से "तम्बाकूजन्यरोगों" को छोड़कर अन्य रोग स्व-इच्छा जनित नहीं होते| वस्तुतः तम्बाकू जन्यरोगों के उत्पति एवं प्रसार किसी व्यक्ति विशेष द्वारा ही स्वजनित होते हैं | ये रोग पूर्णतया रोके जा सकते हैं तथा इनकी जटिलताओं की रोकथाम का उतरदायित्व भी सम्बंधित व्यक्तिविशेषएवं समाज पर होता है |विभिन्न इन्टरनेट वेबसाईट पर चिकित्सा अनुसंधान से सम्बद् सूचना पटलों पर उपलब्धजानकारी के अनुसार "कोविड:19" के मूल स्त्रोत चीन के वुहान प्रांत में इस घातक विषाणु से संक्रमित से संक्रमित रोगियों में तम्बाकूसेवी तथाधूम्रपान के आदि रोगियों की संख्या लगभगपचास प्रतिशत थी तथा इन तम्बाकूकेव्यसनग्रस्त रोगियों में भी अधिकांशत: वे थे जो युवा एवं मध्य आयु वर्ग की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं | वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार "कोविड:19" विषाणु से संक्रमण की प्रक्रिया में तम्बाकू उत्पादों में उपस्थित निकोटिन एवं रसायनों की हानिकारक भूमिका निम्न प्रकार से हो सकती है :

  • (क) चूंकि उत्पादों एवं सम्बंधित सामग्री अर्ताथसिगरेट, सिगार,बीड़ी, हुक्का आदि का हाथ की अँगुलियों सहित होठों तथा मुख पर अनेक बार स्पर्श होता रहता है अत: इसकारणविषाणुओं, जीवाणुओं एवं फंगसआदिसे संक्रमण के प्रभाव एवं विस्तार की आशंका भी अत्यधिक हो सकती है |
  • (ख) तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्षएवं निकोटिन के दुश्प्रभाव से मुख,गले तथा श्वसन नलिका एवं फेफड़े की कमजोर हो चुकी कोशिकाओं पर विषाणु संक्रमण केआक्रमणएवं उसकी जटिलताओं की आशंका अधिक हो सकती है |
  • (ग) तम्बाकू सेवी धूम्रपान के आदि व्यक्तियों केश्वसन तंत्र की कोशिकाओं में "एन्जिओतेन्सिन कनवर्टिंग एंजाइम -2" की सक्रियता अधिक होती है तथा इन एन्जईम्सकेरिसेप्टर्स के माध्यम से विषाणु जीव कोशिकाओं को तीव्रता से संक्रमित कर सकते हैं |
  • (घ) श्वसन तंत्र की पूर्व से क्षयतिग्रस्त विषाणु संक्रमित कोशिकाओंके प्रभावी उपचार में न केवल कठिनाई होती है अपितुजटिलताओं की आशंका भी अधिक होती है |

तम्बाकू सेवन से सम्बंधित वैश्विक स्थिति -

विश्व तम्बाकू निषेध अभियान, विश्वस्वास्थ्य संगठन द्वारा संचालित प्रमुख आठ स्वास्थ्य जन जागरूकता अभियानों में एक अति महत्त्वपूर्ण अभियान है जिसके सफल क्रियान्वन से तम्बक्को जन्य रोगों का उन्मूलन पूर्णत: सम्भव है|विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अधिसूचित "विश्व

तम्बाकू एपिडेमिक प्रतिवेदन 2019" के अनुसार वर्तमान में विश्व में तम्बाकू पदार्थसेवीव्यक्तियों की संख्या लगभग एक अरब तीस करोड़ है | इनमें से प्रतिवर्षलगभग80 लाख रोगियों की की मृत्युतम्बाकू जन्य रोगों की जटिलताओं के कारणहोती है| वैश्विक तम्बाकू व्यसन स्तर मेंभारत का द्वितीय स्थान है | देशमें तम्बाकू उत्पादों से व्यसन ग्रस्त व्यक्तियों की संख्या लगभग12 करोड़ हैतथा प्रतिवर्षलगभग10 लाखरोगियों की मृत्यु तम्बाकू जन्य रोगों की गम्भीर्ताओं के कारण होती है |विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समस्त देशों हेतु वर्ष 2025 तक तम्बाकू सेवीजनसंख्या में न्यूनतम तीस प्रतिशत की कमी का लक्ष्य निर्धारित किया है | इससन्दर्भ में भारत शासन द्वारा एक सौ चार करोड़रुपए की राशि का आवंटन किया है।

उपरोक्त तथ्यों से उपजित अत्याधिक चिंता का बिन्दु यह है कि वि-रु39 में प्रति सेंकण्ड एक मृत्यु तम्बाकू जन्य -रु39 शारीरिक जटिलताओं के कारण होती है। इनमें लगभग 10 लाख वे व्यक्ति होते है, जो धूम्रपान करने वालों के -रु39 याौक एवं व्यसन के कारण द्वितीयक धूम्रपान (सेकण्ड हैंड स्मोकिंग) के हो जाते हैं। इनमें लगभग 28 प्रति-रु है। इसमें वे मासूम बच्चे भी होते हैं। जिन्हे अपने ही अभिभावकों एंव परिजनों के व्यसन का दण्ड भुगतान पड़ता है। चूकिं द्वितीयक धूम्रपान में '' अनफिल्टरड'' घातक गैसेस फेफड़ों में सीधे प्रवेश करती हैं अतः वि-बच्चों में इस प्रकार का धूम्रपान प्रत्यक्ष धूम्रपान से बहुत अधिक हानिकारक होता है।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी रिव्यू मार्च 2017 में प्रका-िरु39यात आई.ए.आर.सी (1985) के अध्ययन के अनुसार तम्बाकू एंव उसके उत्पादनों में लगभग 3900 घातक वि-ुनवजयौले रासायन एंव तत्व पाये जाते हैं। इनमें निकोटिन, हाइड्रोजन सायनाइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड ,बैंजीन, अमोनिया, एरोमेटिक, हाइड्राकार्बनस, आरसेनिक, लेड आदि मुख्य हैं। ई-ंसिगरेट एवं तम्बाकू के अन्य विकल्पों में भी रासायनिक ऐरोसल्स एंव कृत्रिम फ्लेवर्स आदि हानिकारक यौगिक होते हैं।

तम्बाकू एक धीमा वि-ुनवजया हैं। इसके सभी उत्पादों में भी इनके वि-ुनवजयौले तत्वों की अधिकता होती हैं। रासायनिक रूप से इसमें दो मुख्य हानिकारक तत्व होते हैंः-ंउचय मादकता उत्प्रेरक एंव स्नायु उत्तेजक: निकोटिन कैंसर कारक: घातक जटिल टोक्सिनस किसी भी प्रकार से निरंतर दीर्घावधि तम्बाकू सेवन के कारण उत्पन्न रोग, प्राथमिक (प्राइमरी) एंव द्वितीयक (सेकंडरी) रूप से -शरीर के विभिन्न अंगो को क्षति पहुचाते हैं।

तम्बाकू मुक्ति के जीवनदायी वरदान: स्वास्थ्य संगठन द्वारा संधारित तथ्यों के अनुसार तम्बाकू सेवन एंव धूम्रपान छोड़ने पर शरीर में अनेक हितकारी परिवर्तन होते हैं जो मुख्यतः निम्नानुसार हैः-ंउचय 20 मिनट में बड़ी हुई हृदय गति सामान्य हो जाती है, 12 घंटे में: वि-ुनवजयौली गैस कार्बन मोनो ऑक्साइड का रक्त स्तर लगभग सामान्य हो जाता है। 30 मिनट में उच्च रक्त चाप का स्तर कम होने लगता है।

2 से 8 सप्ताह में रक्त संचरण में व्यापक सुधार होते हैं। 1 से 6 माह में खांसी के प्रकोप बहुत कम हो जाते है। 6 से 12 माह में -रु39यवास फूलने की प्रवृति क्षीण हो जाती है। तम्बाकू जन्य हदय रोग की अयोग्यता का निरंतर धुम्रपान करने वालों की तुलना में लगभग व्यसन मुक्ति के उपाय -ंउचय तम्बाकू एक धीमी गति का वि-ुनवजया है। तम्बाकू सेवन पर निर्भरता विभिन्न रोगों का एक जटिल संकुल है।इसमें शरीर की क्रियात्मक, वैचारिक एंव व्यावहारिक घटकों के विकार संयुक्त रूप से संलिप्त होते हैं । अतः इस अडिक्शन का उपचार प्रबन्धन भी अत्यधिक कठिन होता है। परन्तु एक सकरात्मक पहलू यह भी है कि तम्बाकू निर्भरता साधक योग्य है। भय, प्यार, उपहार एंव उपचार के चार सिद्धातों पर आधारित बहुआयामी उपायों से इस व्यसन से मुक्ति सम्भव है। व्यक्तिगत, सामाजिक एंव रा-ुनवजयट्रीय एंव वि-रु39यव स्तर पर तम्बाकू मुक्ति के अभियानों द्वारा इस अर्थ एवं जीवन घातीय समस्या का समाधान सम्भावित है।

पराम का प्रभाव उचय सामुदायिक चिकित्सा विज्ञान के एक सर्वे के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दिए गए 5 मिनट के परमर्द से 10 से 20 प्रति-रु व्यक्ति तम्बाकू सेवन छोड़ देते हैं। वही चिकित्सक द्वारा दिए गए 30 सेकंड पराम-रु39र्या से 70 प्रति व्यक्ति तम्बाकू सेवन से मुक्ति पा सकते हैं।तम्बाकू मुक्ति के व्यक्तिगत, व्यवहारिक उपाय तम्बाकू छोडने की इच्छाशक्ति तत्काल एकल प्रयास में छोडना, चरण बद्ध मुक्ति से ज्यादा प्रभावी है। तम्बाकू युक्त खाद्य उत्पाद, तम्बाकू, गुटका, पान, सिगरेट बीडी माचिस / लाइटर आदि अपने पास एंव घर में न रखे। अन्य व्यक्तियों को तम्बाकू मुक्ति हेतु प्रेरित करें। उपरोक्त उपायों के अतिरिक्त जटिल प्रकार के व्यसन के उपचार हेतु विकल्प तथा प्रकृतिक उपाय भी उपलब्ध हैं।

Updated : 2021-06-01T20:21:19+05:30
Tags:    

स्वदेश वेब डेस्क

Swadesh Digital contributor help bring you the latest article around you


Next Story
Share it
Top