उज्जैन महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि की शुरूआत, 10 दिन तक चलेगा महोत्सव

उज्जैन महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि की शुरूआत, 10 दिन तक चलेगा महोत्सव
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आज से शिव नवरात्रि शुरू, 10 दिन तक बाबा का अलग-अलग रूप में श्रृंगार होगा।

महाशिवरात्रि के 9 दिन पहले से उज्जैन में शिव नवरात्रि मनाई जाती है। लेकिन इस साल यह 10 दिन तक मनाई जाएगी। इस बार खास बात ये कि बाबा 44 घंटे तक भक्तों को दर्शन देंगे। जानिए किन-किन रूपों में होगा बाबा का श्रृंगार।

उज्जान में महाकालेश्वर मंदिर में आज से शिव नवरात्रि का उत्सव शुरू हो गया है। इस बार अष्टमी तिथि की वृद्धि के कारण यह पावन पर्व 9 की जगह 10 दिनों तक मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि तक भगवान महाकाल का हर दिन अलग-अलग रूपों में श्रृंगार किया जाएगा।

चंद्रमौलेश्वर रूप में दर्शन

शुक्रवार, 6 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पंचमी के साथ ही इस पर्व की शुरूआत हो चुकी है। आज सुबह भक्तों ने बाबा के चंद्रमौलेश्वर के रूप में दर्शन हुए। इसके बाद श्री कोटेश्वर महादेव, रामेश्वर जी की पूजा-अर्चना की जाएगी। पहले दिन भगवान का भांग से श्रृंगार होगा। फिर उसके बाद रूद्राभिषेक और पाठ की शुरूआत होगी। इस दौरान 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ करेंगे। पुजारी भगवान महाकाल को केसर और चंदन, जबकि माता पार्वती को हल्दी अर्पित करेंगे।

दिनभर चलेगा विशेष पूजन क्रम

मंदिर में पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष क्रम रहेगा। दोपहर 1 बजे भोग आरती, शाम 3 बजे संध्या पूजा और शाम 4 बजे नारदीय संकीर्तन के साथ हरिकथा का आयोजन होगा। संध्या आरती के समय भगवान का सुंदर श्रृंगार किया जाएगा। जिसमें वे दूल्हा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे।

शिव नवरात्र के दौरान पूजा समय में बदलाव

शिव नवरात्रि के चलते महाकाल मंदिर की नियमित समय-सारिणी में भी बदलाव किया गया है। सुबह 10:30 बजे होने वाली भोग आरती अब दोपहर 1 बजे होगी, जबकि संध्या पूजा शाम 5 बजे के स्थान पर दोपहर 3 बजे संपन्न की जाएगी।

महाशिवरात्रि पर 44 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के पट

15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान महाकाल की विशेष महापूजा की जाएगी। 14 फरवरी की रात 2:30 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे और 16 फरवरी की रात 11 बजे बंद होंगे। इस दौरान लगातार 44 घंटे श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और पूजन कर सकेंगे।

दिव्य रूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल

6 फरवरी : चंदन श्रृंगार

7 फरवरी : दिव्य श्रृंगार

8 फरवरी : शेषनाग श्रृंगार

9 फरवरी : घटाटोप श्रृंगार

10 फरवरी : छबीना श्रृंगार

11 फरवरी : होलकर श्रृंगार

12 फरवरी : मनमहेश श्रृंगार

13 फरवरी : उमा-महेश श्रृंगार

14 फरवरी : शिव तांडव श्रृंगार

15 फरवरी : महाशिवरात्रि पर मध्यरात्रि पश्चात सप्तधान श्रृंगार

साथ ही आपको बता दें, शिव नवरात्रि के समय चार प्रहर में पूजा होती है। पहली पूजा शाम 6:19 बजे होगी। जिसे प्रदोष कहा जाता है। इस काल में बाबा का अभिषेक गन्ने के रस से किया जाता है। वहीं, दूसरा काल 9:40 बजे से है। जिसमें दही से अभिषेक किया जाता है। तीसरा प्रहर रात 12:41 बजे होता है। जिसमें भगवान का दूध से अभिषेक होता है और चौथा प्रहार ब्रह्म मुहूर्त होता है। जिसमें बाबा महाकाल की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।

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