महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें शिवलिंग पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस विशेष दिन के शुभ अवसर पर भद्रा का योग बन रहा है। जिससे पूजा पाठ जलाभिषेक में अरचन आयेगा। जिसकी वहज से कई लोगों के मन में सवाल है कि पूजा पाठ, जलाभिषेक का सही समय क्या होगा। इस खबर में हम आपको भद्रा काल का समय बताएंगे और इसका प्रभाव क्या होगा, और शिवलिंग पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त कब रहेगा?
कितने टाइम तक रहेगा भद्रा काल?
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर साल महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन दिन 15 फरवरी को पड़ रहा है। भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, इस दिन शाम 5:04 बजे से भद्रा शुरू होगा और अगले दिन सुबह 5:23 बजे खत्म होगा, यानी कुल मिलाकर करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में है। शास्त्रों में कहा गया है कि जब भद्रा पाताल में रहती है, तो उसका असर पृथ्वी पर नहीं पड़ता। इसलिए भक्त बिना किसी चिंता के महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक और पूजा-पाठ कर सकते हैं। चलिए महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त जान लेते हैं।
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
इस बार दिनभर शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं:
- सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक
- सुबह 9:48 से 11:11 बजे तक
- सुबह 11:11 से 12:35 बजे तक (अमृत मुहूर्त – अत्यंत फलदायी)
- शाम 6:11 से 7:47 बजे तक
इन सभी समयों में भगवान शिव को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से जल अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा जीवन में बनी रहती है। चलिए अब पर सही से पूजा करने का तरिका जान लेते हैं।
- महाशिवरात्रि पूजा का सही तरीका
सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें। मन में भगवान शिव का स्मरण करें और ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए दीपक जलाएं। पूजा स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है। तांबे या मिट्टी के लोटे में स्वच्छ जल भरें। इच्छानुसार उसमें गंगाजल, थोड़ा दूध या शहद मिला सकते हैं। उसके बाद शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। यह विशेष रूप से ध्यान रखें कि जल सीधे शिवलिंग पर जाए, इधर-उधर न बिखरे।
जलाभिषेक के बाद बेलपत्र (तीन पत्तियाँ), धतूरा, सफेद या आक के फूल अर्पित करें। बेलपत्र की डंडी अपनी ओर न रखें। चंदन का तिलक लगाएं और धूप-दीप दिखाएं। कम से कम 108 बार “ऊँ नमः शिवाय” का जाप करें। इच्छानुसार शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में हाथ जोड़कर शांत मन से अपनी मनोकामना व्यक्त करें। इस तरह श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा महाशिवरात्रि पर अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
