चुंबकीय ऊर्जा का केंद्र है अल्मोड़ा में मां कसार देवी मंदिर: जहां विज्ञान भी हैरान, नासा तक कर चुका है रिसर्च

चुंबकीय ऊर्जा का केंद्र है अल्मोड़ा में मां कसार देवी मंदिर: जहां विज्ञान भी हैरान, नासा तक कर चुका है रिसर्च
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विज्ञान और अध्यात्म के बीच हमेशा टकराव देखने को मिलता है। जहां विज्ञान तथ्यों और तर्कों पर चलता है, वहीं अध्यात्म दृढ़ विश्वास और आत्म-अनुभूति से जुड़ा होता है। लेकिन भारत में कई ऐसी रहस्यमयी और चमत्कारिक जगहें हैं, जहां विज्ञान भी अध्यात्म के आगे नतमस्तक नजर आता है। इन्हीं में से एक है उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित मां भवानी का शक्तिशाली कसार देवी मंदिर, जहां विशेष चुंबकीय ऊर्जा का अनुभव किया जाता है।

पहाड़ की चोटी पर बसी शक्ति की साधना

अल्मोड़ा से करीब 8 से 9 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ की चोटी पर स्थित मां भगवती का कसार देवी मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर पहाड़ की ऊंचाई पर बना है, जहां से प्रकृति का बेहद मनोरम दृश्य दिखाई देता है। मां भगवती का यह मंदिर आकार में छोटा है। गर्भगृह में मां अस्त्र-शस्त्र धारण किए सिंह पर सवार विराजमान हैं। मंदिर के बाहर भी रक्षक के रूप में कई सिंहों की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

यह मंदिर केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक नजरिए से भी अन्य मंदिरों से अलग माना जाता है। नासा ने भी माना है कि जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है, वहां शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है। यही कारण बताया जाता है कि यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को असीम शांति की अनुभूति होती है।

हर बार खाली हाथ लौटा नासा

मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां देवी मां साक्षात अवतार के रूप में प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि यह भारत की एकमात्र ऐसी जगह है, जहां प्राकृतिक रूप से शक्तिशाली चुंबकीय शक्तियां मौजूद हैं। मंदिर के आसपास कई स्थानों पर धरती के भीतर बड़े-बड़े भू-चुंबकीय पिंड पाए जाते हैं, जो चुंबकीय ऊर्जा का भंडार माने जाते हैं।

चुंबकीय ऊर्जा के रहस्य को समझने के लिए नासा की टीम कई बार मंदिर में शोध करने पहुंची, लेकिन हर बार उसे कोई ठोस निष्कर्ष नहीं मिल सका। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी इस चुंबकीय ऊर्जा के प्रभाव को महसूस करते हैं, जिससे उन्हें एक विशेष प्रकार की मानसिक शांति मिलती है। यहां तक कि मान्यता है कि मंदिर परिसर में नेविगेशन उपकरण, जैसे कंपास, भी सही ढंग से काम नहीं करते।

साल में एक बार लगता है भव्य मेला

मंदिर की संरचना की तिथि शताब्दियों पुरानी बताई जाती है। वर्ष 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने भी कसार देवी मंदिर का दौरा किया था। इसके अलावा कई पश्चिमी साधक जैसे सुनिता बाबा, अल्फ्रेड सोरेनसेन और लामा अनागारिका गोविंदा भी यहां आ चुके हैं।

1960 और 1970 के दशक में हिप्पी आंदोलन के दौरान यह स्थान काफी लोकप्रिय हुआ। यह इलाका ‘क्रैंक रिज’ के नाम से भी जाना जाता है और आज भी देशी-विदेशी ट्रेकर्स और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंदिर के पास कसार देवी-बिनसर वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्थित है, जहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखने को मिलते हैं। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है।

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