मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के करीब 1.50 लाख शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है...
MP TET Controversy: मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के करीब 1.50 लाख शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद शिक्षक संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
तमिलनाडु की तर्ज पर प्रस्ताव की मांग
शिक्षक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष शालिकराम चौधरी ने मांग करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार भी तमिलनाडु विधानसभा की तरह एक प्रस्ताव पारित करे। इसमें केंद्र सरकार से मांग की जाए कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को TET से स्थायी छूट दी जाए। इसके लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम RTE, 2009 की धारा 23 में आवश्यक संशोधन और NCTE से स्पष्ट निर्देश जारी कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा तनाव
आपको बता दें कि 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य करने का प्रावधान था। 29 मई 2026 को समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राहत देते हुए TET पास करने की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया। हालांकि, शिक्षक समय-सीमा बढ़ाने के बजाय पूरी तरह से स्थायी छूट की मांग कर रहे हैं।
30 अगस्त को दिल्ली कूच
अपनी मांगों को लेकर शिक्षक संगठनों ने 30 अगस्त 2026 को दिल्ली में विशाल प्रदर्शन करने की घोषणा की है। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अनुसार देशभर के अलग-अलग राज्यों के TET विरोधी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाकर केंद्र सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव बनाया जाएगा।