सागर जहरीली शराब त्रासदी में मौतों का आंकड़ा 22 पहुंच गया है। 160 से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंचे हैं। मेथनॉल विषाक्तता के संदेह के बीच जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं।
सागर। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब त्रासदी में मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 22 हो गई। मध्य प्रदेश के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में कथित तौर पर सस्ते दामों पर बेची गई शराब पीने के बाद 160 से ज्यादा लोगों को अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जांच में मेथनॉल विषाक्तता का संदेह सामने आया है। 22 मौतों का आंकड़ा ग्रामीणों, अस्पतालों और शवदाह गृहों से मिली जानकारी पर आधारित है। रिपोर्ट लिखे जाने तक प्रशासन ने मृतकों की पूरी संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, सागर और भोपाल के अस्पतालों में 112 मरीज भर्ती हैं।
घटना के बाद प्रभावित गांवों में चिकित्सा टीमें घर-घर जाकर उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। बरज, नौराज, गुघरा खुर्द, दलपतपुर, पाटन, चौका, छपरी और बाम्हुरा समेत कई गांव प्रभावित बताए गए हैं।
मेथनॉल विषाक्तता की आशंका, नमूने जांच के लिए भेजे
सप्ताहांत में कथित तौर पर सस्ती शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी। मरीजों में उल्टी, धुंधला दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी और शरीर में कंपन जैसे लक्षण सामने आए। शुरुआती मेडिकल जांच मेथनॉल विषाक्तता की तरफ इशारा कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 12 मौतों में मिथाइल-अल्कोहल विषाक्तता की बात सामने आई है। जब्त शराब के नमूने फोरेंसिक और रासायनिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
मेथनॉल औद्योगिक इस्तेमाल वाला अल्कोहल है और इंसानी सेवन के लिए सुरक्षित नहीं है। इसकी थोड़ी मात्रा भी गंभीर विषाक्तता, दृष्टि हानि, अंग विफलता और मौत का कारण बन सकती है। इसके विपरीत, एथेनॉल का इस्तेमाल नियंत्रित मात्रा में कानूनी रूप से निर्मित मादक पेय पदार्थों में किया जाता है।
70 रुपये की कथित शराब ने बढ़ाई जांच की चिंता
पुलिस की शिकायत के मुताबिक, एक नए शराब ब्रांड को कथित तौर पर अनधिकृत ग्रामीण दुकानों के जरिए करीब 70 रुपये प्रति चौथाई की दर से बेचा जा रहा था। यह लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर मिलने वाली शराब से करीब 20 रुपये सस्ती थी। खरीदारों को कथित तौर पर इसे असली उत्पाद बताया जा रहा था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध शराब कहां बनी, बोतलों में कैसे भरी गई, उस पर लेबल कैसे लगाए गए और फिर इसे गांवों तक किसने पहुंचाया। शराब ठेकेदारों, कथित विक्रेताओं और वितरकों समेत 30 लोगों के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। खबरों के अनुसार, मंगलवार तक कम से कम 14 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी।
सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इसमें मौतों के कारणों के साथ शराब के निर्माण और वितरण तथा पुलिस, आबकारी और दूसरे नियामक अधिकारियों की संभावित लापरवाही की भी जांच होगी।
अधिकारियों पर कार्रवाई, कांग्रेस ने उठाए सवाल
राज्य सरकार ने आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित किया है। एक अन्य अधिकारी को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय भेजा गया है। बांदा पुलिस स्टेशन के प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुघरा चौकी प्रभारी पूरन लाडिया को भी निलंबित किया गया है। इसके बाद बांदा की एसडीएम आरती यादव को पद से हटा दिया गया। संजय जैन को बांदा-शाहगढ़ उपमंडल की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को मामले की गहन जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार अवैध शराब के कारोबार को बर्दाश्त नहीं करेगी। घटना के दौरान मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के वैश्विक निवेश विस्तार कार्यक्रम के तहत संयुक्त अरब अमीरात में थे। उपमुख्यमंत्री और सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
इधर, कांग्रेस ने सरकार पर अवैध शराब नेटवर्क को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रभावित गांवों में जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर स्वतंत्र न्यायिक जांच, मृतकों की सत्यापित सार्वजनिक सूची और प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त सहायता की मांग की।
पटवारी ने कहा कि केवल तबादले या निलंबन पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने शराब की भट्टी और गोदाम से लेकर लाइसेंस प्राप्त दुकानों और ग्रामीण विक्रेताओं तक पूरी सप्लाई चेन की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और स्थानीय राजनीतिक हस्तियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की जांच की मांग भी उठाई है। जांच में एक और पेच उस दावे से जुड़ा है जिसमें संदिग्ध शराब के उत्तर प्रदेश के ललितपुर से आने की बात कही गई थी। ललितपुर पुलिस और आबकारी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि शराब उनके जिले में बनी थी।
मजिस्ट्रेट जांच से स्त्रोत खुलासे की उम्मीद
सागर एसपी अनुराग सुजानिया के अनुसार, पुलिस पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच कर रही है और संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जहरीली शराब दूसरे इलाकों तक न पहुंचे और इससे कोई और जान न जाए। अब मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मेथनॉल का स्रोत क्या था, शराब गांवों तक किस रास्ते से पहुंची और इसके निर्माण व वितरण में कौन-कौन शामिल था। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि संदिग्ध शराब स्थानीय स्तर पर तैयार हुई या मध्य प्रदेश के बाहर से लाई गई।