मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। फरवरी में हुई गणना के शुरुआती आंकड़ों में संख्या 14 हजार पार पहुंची। अप्रैल-मई में दूसरे चरण की गिनती के बाद अंतिम स्थिति साफ होगी।
मध्यप्रदेश में बढ़ी गिद्धों की संख्या, पहले चरण की गणना में आंकड़ा 14 हजार के पार
मध्यप्रदेश में गिद्धों की बढ़ती संख्या ने वन्यजीव विशेषज्ञों को उत्साहित किया है। फरवरी-मार्च में हुई गिद्ध गणना के शुरुआती रुझान संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश जल्द ही देश में “गिद्ध स्टेट” के रूप में पहचान बना सकता है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक प्रदेश में गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं।तीन दिन तक चले पहले चरण के सर्वे के बाद दूसरा चरण अप्रैल या मई में किया जाएगा। इस चरण में गिद्धों की प्रजनन गतिविधियों और उनकी दीर्घकालिक आबादी के रुझानों का फिर से मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रदेश में ऐसे बढ़ी गिद्धों की संख्या
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में गिद्धों की गणना वर्ष 2016 से शुरू की गई थी। प्रदेश में गिद्धों की कुल सात प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं।गिद्धों की गणना के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां आसानी से दिखाई देती हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई देती है.
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वर्ष 2019 में: 8,397
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वर्ष 2021 में: 9,446
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वर्ष 2024 में: 10,845
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वर्ष 2025 में: 12,981
इस बार हुई गणना में यह संख्या 14 हजार से अधिक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सर्वे में मिलीं कई दुर्लभ प्रजातियां
20 से 22 फरवरी के बीच हुए सर्वे में प्रदेश में गिद्धों की लगभग सात प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं।खास बात यह है कि गणना के दौरान केवल बैठे हुए गिद्धों को ही गिना जाता है, उड़ते हुए गिद्धों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
रायसेन में सबसे ज्यादा गिद्ध
प्रदेश में सबसे अधिक गिद्ध रायसेन जिले में दर्ज किए गए। प्रमुख स्थानों पर गिद्धों की संख्या इस प्रकार रही.
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रायसेन: 1,532
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पवई रेंज: 1,127
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गांधी सागर: 1,084
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शिवपुरी: 735
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रीवा: 622
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अनूपपुर: 413
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बांधवगढ़: 276
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कान्हा: 224
2014 से शुरू हुए संरक्षण के प्रयास
मध्यप्रदेश में गिद्ध संरक्षण के प्रयास वर्ष 2014 से शुरू हुए थे, जब भोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया। मार्च 2017 में यहां पहली बार सफेद पीठ वाले गिद्ध का सफल प्रजनन हुआ था।यहां सफेद पीठ वाले और लंबी चोंच वाले गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अलावा पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी गिद्ध संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।हाल ही में 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के पांच गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा था। इन पर हाई-टेक जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, ताकि वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख सके।