ग्वालियर में RSS की जन गोष्ठाओं में पंच परिवर्तन पर जोर, समाज में सकारात्मक बदलाव और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश।
समाज परिवर्तन केवल कहने से नहीं, बल्कि करने से ही संभव है। पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। समाज की समस्याओं का समाधान केवल समाज के लोगों के सहयोग और जिम्मेदारी से ही संभव है।शहर में बढ़ती यातायात समस्या का प्रमुख कारण नियमों का पालन न करना है। इसलिए सभी नागरिकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर ने विनय नगर सेक्टर-4 स्थित जीपीएस स्कूल में आयोजित गरगज नगर की प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में कही। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, लश्कर जिला संघचालक सुनील पाठक ने की। इस अवसर पर गरगज नगर संघचालक मानसिंह जादौन भी मंचासीन रहे।
मुख्य वक्ता श्री इंदापुरकर ने कहा कि पंच परिवर्तन के सभी विषयों को हमें अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने संघ के 100 वर्षों के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और गुरुजी के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ को प्रारंभिक समय में उपेक्षा का सामना करना पड़ा और जब समाज में उसकी स्वीकार्यता बढ़ी तो उस पर तीन बार प्रतिबंध भी लगाया गया, लेकिन हर प्रतिबंध के बाद संगठन और अधिक मजबूती से आगे बढ़ा।
कार्यक्रम की शुरुआत में नवल गौड़ ने एकल गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह उदय यादव ने किया और आभार नगर संघचालक मानसिंह जादौन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन बंदे मातरम् गीत के साथ हुआ।
मोहना में प्रमुख जन गोष्ठी आज
संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बरई खंड की प्रमुख जन गोष्ठी 14 फरवरी को दोपहर 12 बजे मोहना में आयोजित की जाएगी। मुख्य वक्ता किशोर पाठक होंगे।
निःस्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी विफल नहीं होता : वर्मा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होना इस सत्य का प्रमाण है कि निःस्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी विफल नहीं होता। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में मात्र एक संगठन की नींव नहीं रखी थी, बल्कि खड़ित होते समाज को ‘स्व’ की पहचान कराकर राष्ट्र निर्माण की एक ऐसी प्रक्रिया शुरू की, जो आज वटवृक्ष बन चुकी है। संघ का लक्ष्य संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हर नागरिक के भीतर अपनी संस्कृति और जड़ों के प्रति गौरव जगाना है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ग्वालियर विभाग सह कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने माधवगंज स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम में आयोजित माधव नगर की प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघचालक गोविंद गुप्ता ने की।
डॉ. वर्मा ने कहा कि पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में समरसता बढ़ाई जा सकती है, परिवार के सदस्यों के बीच संवाद और संस्कारों को प्रोत्साहित किया जा सकता है, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है, भारतीय जीवन शैली अपनाई जा सकती है और अपने कर्तव्यों के पालन के साथ स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग कर देश को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।
गोष्ठी में ब्रह्माकुमारी केंद्र की संचालिका आदर्श दीदी और प्रहलाद भाई ने समाजसेवा और आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में भूपेंद्र भदौरिया ने “मन समर्पित, तन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूँ मातृभूमि तुझको कुछ और भी दूँ” गीत प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत कर दिया। कार्यक्रम का संचालन धर्मवीर सिंह परिहार ने किया और आभार गोपाल जाटव ने व्यक्त किया।