छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें 18 अगस्त तक ED रिमांड में भेजा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार के दिन बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने 18 अगस्त तक सात दिन की ईडी रिमांड मंजूर की है।
दरअसल, रामगोपाल अग्रवाल पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में अंडरट्रायल के तौर पर बंद थे। अब शराब घोटाले की जांच में ईडी ने उन्हें भी आरोपी बनाकर अपनी पड़ताल आगे बढ़ाई है। एजेंसी का दावा है कि 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार में एक सिंडिकेट के जरिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।
घोटाले में करीब 3000 करोड़ की अवैध कमाई का दावा
ईडी की जांच के मुताबिक शराब कारोबार में एक संगठित सिंडिकेट के जरिए बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क में रिटायर्ड IAS अधिकारी अनिल टुटेजा अनवर ढेबर और ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी समेत कई लोग शामिल थे। जांच में शराब की बिक्री में गड़बड़ी के अलावा बिना हिसाब की शराब डिस्टिलरी से कमीशन और विदेशी शराब कंपनियों से कथित कमीशन के जरिए रकम जुटाने का आरोप सामने आया है। ईडी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से करीब 3,000 करोड़ रुपये की अपराध से हासिल रकम का पता चला है।
कैश के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप
ईडी की जांच में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कैश के रूप में उनके तक पहुंचाया गया था। उस समय वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष थे। ईडी के मुताबिक PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों में उन लोगों ने कैश पहुंचाने की जानकारी दी है जो कथित तौर पर रकम को संभालने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करते थे। एजेंसी अब इन बयानों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को अपनी जांच में जोड़ रही है।
कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय तक कैश पहुंचने का दावा
जांच का सबसे अहम पहलू ईडी का वह दावा है जिसमें रायपुर के राजीव भवन का जिक्र आता है। एजेंसी के मुताबिक रामगोपाल अग्रवाल के कहने पर सिंडिकेट से जुड़े लोगों के जरिए कैश उस समय के कांग्रेस प्रदेश कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाया गया। यह आरोप जांच में राजनीतिक कनेक्शन की दिशा को भी महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि ये ईडी के आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है। अदालत में इन आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना बाकी है।
चार समन के बाद गिरफ्तारी तक पहुंची जांच
ईडी के मुताबिक रामगोपाल अग्रवाल को पूछताछ के लिए चार बार समन भेजे गए थे। एजेंसी का दावा है कि वह इन समन के बावजूद पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। बाद में उनका बयान दर्ज किया गया। ईडी के अनुसार पूछताछ के दौरान कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले और उनका रवैया टालमटोल वाला रहा। इसके बाद एजेंसी ने PMLA के तहत गिरफ्तारी की कार्रवाई की और उन्हें विशेष अदालत के सामने पेश किया।
अब पैसों के नेटवर्क की आगे जांच
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद शराब घोटाले में पैसों के कथित नेटवर्क की जांच और आगे बढ़ेगी। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध कमाई कहां से आई और किन लोगों तक किस माध्यम से पहुंची। एजेंसी दूसरे संदिग्धों की भूमिका और कथित लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। फिलहाल अदालत ने रामगोपाल अग्रवाल को 18 अगस्त तक ईडी रिमांड पर भेजा है। मामले में आगे की जांच के साथ और नाम और लेन-देन की कड़ियां सामने आने की संभावना है।