पद्म पुरस्कार 2026: आज़ादी के बाद पहली बार 10 नए जिलों को मिला सम्मान

पद्म पुरस्कार 2026: आज़ादी के बाद पहली बार 10 नए जिलों को मिला सम्मान
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पद्म पुरस्कार 2026 में पहली बार 10 नए जिलों के लोगों को सम्मान मिला, 39 हजार नामांकन में से 131 का चयन।

नई दिल्लीः देश के 77वें गणतंत्र दिवस के ठीक एक दिन पहले पद्म पुरस्कार घोषित हुए। यह घोषणा इस बार कई मायनों में खास रही। देश में पहली बार ऐसा हुआ है जब आज़ादी के बाद देश के 10 ऐसे जिलों के लोगों को पद्म सम्मान के लिए चुना गया, जिनका नाम पहले कभी इस सूची में नहीं आया था। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब सम्मान सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है।

सरकार को इस वर्ष 39 हजार से अधिक नामांकन मिले थे, जिनमें से 131 लोगों का चयन पद्म पुरस्कारों के लिए किया गया। चयन की प्रक्रिया कई स्तरों पर हुई, जिसमें गहन जांच, व्यापक परामर्श और वैज्ञानिक मूल्यांकन को शामिल किया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सख्त मानकों पर आधारित रही।

पद्म पुरस्कारों में दिखा 30 राज्यों का प्रतिनिधित्व

2026 के पद्म पुरस्कारों में देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इनमें 10 ऐसे जिले भी शामिल हैं, जिन्हें आज़ादी के बाद पहली बार पद्म पुरस्कार मिला है। जिलों में कर्नाटक का मांड्या, मध्य प्रदेश का बैतूल, महाराष्ट्र का परभणी, उत्तराखंड का बागेश्वर, तेलंगाना का रंगा रेड्डी, पश्चिम बंगाल का दक्षिण दिनाजपुर, ओडिशा का नुआपड़ा, छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, आंध्र प्रदेश का एलुरु और राजस्थान का डीग शामिल हैं, जहां से पहली बार पद्म पुरस्कार विजेता सामने आए हैं।

बदलते स्वरूप को दर्शाता है सम्मान

अधिकारियों ने बताया कि पद्म सम्मान अब अलप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गोलपाड़ा, इंफाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, पूर्व बर्धमान और श्रीगंगानगर जैसे जिलों तक पहुंच चुका है, जो इस सम्मान के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।

राजनीति से ऊपर उठकर नेतृत्व के सम्मान का संदेश भी इस सूची में साफ दिखता है। सीनियर वाम नेता वीएस अच्युतानंदन को पद्म विभूषण और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिया जाना इसी नीति का उदाहरण है। बीते 12 वर्षों में 18 से अधिक राजनीतिक दलों और 22 राज्यों के नेताओं को पद्म सम्मान मिल चुका है।

पूर्वोत्तर राज्यों को मिला प्रतिनिधित्व

पूर्वोत्तर के आठ राज्यों, जिन्हें ‘अष्टलक्ष्मी’ कहा जाता है, को भी इस दौरान अभूतपूर्व प्रतिनिधित्व मिला है। कुल पद्म पुरस्कारों में से 40 प्रतिशत से अधिक इन्हीं राज्यों के हिस्से आए हैं। इनमें दलित, वंचित और समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों से आने वाले लोग भी शामिल हैं, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को मजबूत करता है।

गुमनाम नायकों को मिला सम्मान

इस बार के पद्म पुरस्कारों में गुमनाम नायकों और प्रेरणादायी महिलाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। 19 महिलाओं को पद्म सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें तेजाब हमले की पीड़िता से संगीत विदुषी बनीं और बीएचयू में अध्यापन कर रहीं मंगला कपूर तथा नवजात शिशुओं के लिए एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित करने वाली डॉ. अर्मिडा फर्नांडिस शामिल हैं, जिन्होंने लगभग 50 वर्षों तक सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दीं।

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