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निर्भया दोषी अक्षय ने SC में दाखिल की क्यूरेटिव पिटिशन

निर्भया दोषी अक्षय ने SC में दाखिल की क्यूरेटिव पिटिशन

नई दिल्ली। फांसी की सजा से बचने के लिए अब निर्भया गैंगरेप के दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 2012 में दिल्ली में निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले के चार दोषियों में से एक दोषी अक्षय ने फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन दायर की है। दरअसल, दोषी अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन ऐसे वक्त में दायर की है, जब आज दोषी मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। बता दें कि निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दिल्ली में 2012 में हुए इस जघन्य अपराध के लिए चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी जिसके खिलाफ इस दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। बता दें कि कोर्ट ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है, जिसके मुताबिक, 1 फरवरी को सुबह 6 बजे इन सबको फांसी पर लटकाया जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में 23 वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था।

इस मामले के चार दोषियों विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार सिंह को मृत्युदंड सुनाया गया। एक अन्य दोषी राम सिंह ने 2015 में तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी और नाबालिग दोषी को सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया था।

क्यूरेटिव पिटिशन (क्यूरेटिव याचिका) तब दायर किया जाता है जब किसी मामले के दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटिशन ही उस दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है, जिसके जरिए वह अपने लिए पहले से तय की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता है। खास बात है कि क्यूरेटिव पिटिशन किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होता है। क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई होने के बाद दोषी के लिए कानून के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।

Updated : 29 Jan 2020 5:24 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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