कागजों पर मिशन, हकीकत में ‘जहर’ उगल रहे नल: शुद्ध पेयजल की कमी से हर साल 4 लाख मौतें

कागजों पर मिशन, हकीकत में ‘जहर’ उगल रहे नल: शुद्ध पेयजल की कमी से हर साल 4 लाख मौतें
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देश में शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण हर साल चार लाख लोग डायरिया से मर रहे हैं. जबकि करीब एक करोड़ लोग दिव्यांगता या अन्य संक्रामक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकारों की तंद्रा टूटी नहीं है। सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत रहे इंदौर में अशुद्ध पेयजल से हुई मौतों ने जरूर थोड़ा झकझोरा है. लेकिन हकीकत यह है कि पेयजल आपूर्ति अभी तक राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हो पाई है. केवल आंकड़े ही यह बताते हैं।

शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और सीवर लाइन के लिए स्वीकृत 1.93 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से केवल 44 हजार करोड़ रुपये के कार्य पूरे हो पाए हैं, जबकि अमृत मिशन (अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन) की अवधि इसी साल मार्च में समाप्त हो रही है।

सीवर और पेयजल लाइन की खराब योजना और डिज़ाइन, जल संचयन का अपर्याप्त प्रबंधन, शुद्धीकरण के इंतजाम और निगरानी के अभाव ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि कोई भी ऐसा शहर नहीं है जहाँ कुछ आबादी तक अशुद्ध जल न पहुंचता हो।

इंदौर शहर के पास के एक गांव रालामंडल में ग्रामीण जल जीवन मिशन के तहत सभी कार्य पूरे दिखाए जा रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस गांव में पेयजल की अंतिम जांच 17 दिसंबर 2025 को हुई थी और सब कुछ दुरुस्त पाया गया। लेकिन शहर में मौत से पहले जो अनदेखी हुई, वह कुछ और ही बयान करती है।

शुद्ध जल के लिए सरकार के प्रयास

शुद्ध जल की समस्या को दूर करने के लिए पहली बार केंद्र सरकार ने दो मिशन शुरू किए हैं। इनमें से एक है अमृत मिशन, जो शहरी क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल और सीवरेज प्रणाली को मजबूत बनाने पर केंद्रित है, जबकि दूसरा है जल जीवन मिशन, जो ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक शुद्ध नल जल मुहैया कराने का लक्ष्य रखता है।

वैश्विक मानकों के अनुसार, यदि प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता 1,700 घन मीटर से कम हो, तो उसे जल संकट माना जाता है। वर्तमान में देश में प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता 1,341 घन मीटर रह गई है, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 1,487 घन मीटर था। इसका मतलब है कि देश जल संकट के कगार पर पहुंच चुका है।

मूलभूत जरूरतों के लिए राज्य सरकारों में सक्रियता की कमी साफ नजर आती है। शुद्ध पेयजल मुहैया कराने से जुड़ी परियोजनाओं पर राज्यों के सुस्त रवैये और केंद्र की कमजोर निगरानी को लेकर हाल ही में संसदीय समिति ने भी सवाल उठाए हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है।

जल संकट के मुहाने पर देश

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 20 सबसे अधिक जल संकटग्रस्त शहरों में से पांच भारत के हैं. इनमें दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।

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