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कांग्रेस ने सरकार पर कसा तंज, कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

कांग्रेस ने सरकार पर कसा तंज, कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को खरी-खरी सुनाई। जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि लगातार इंटरनेट बैन रखना और धारा 144 लागू रखना सत्ता की शक्तियों का दुरुपयोग है। इसके बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है और सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को मोदी सरकार के लिए इस साल का बड़ा झटका बताया है।

कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी से जुड़ी उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी को मोदी सरकार के लिए वर्ष 2020 का पहला बड़ा झटका करार देते हुए शुक्रवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह स्मरण कराया गया है कि देश उनके सामने नहीं, संविधान के समक्ष झुकता है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने मोदी सरकार की गैरकानूनी गतिविधियों को यह कहते हुए पहला बड़ा झटका दिया कि इंटरनेट की आजादी एक मौलिक अधिकार है।' उन्होंने दावा किया, 'मोदी-शाह के लिए दोहरा झटका है कि विरोध को धारा 144 लगाकर नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मोदी जी को याद दिलाया गया है कि राष्ट्र उनके सामने नहीं, संविधान के सामने झुकता है।'

न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संस्थाओं में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने के लिए कहा।

संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत इंटरनेट के इस्तेमाल को मौलिक अधिकार का हिस्सा बताते हुए शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से इंटरनेट के निलंबन के सभी आदेशों की समीक्षा करने के लिए कहा। अदालत ने कहा कि कश्मीर में लगे प्रतिबंधों को लेकर न्यायालय ने कहा कि किसी विचार को दबाने के लिए धारा 144 सीआरपीसी (निषेधाज्ञा) का इस्तेमाल उपकरण के तौर पर नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट को निषेधाज्ञा जारी करते समय इसपर विचार करना चाहिए और आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए।

Updated : 10 Jan 2020 11:45 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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