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निर्भया मामले की सुनवाई : HC में बोली केन्द्र सरकार - सभी दोषी मिलकर फांसी की सजा को रोक रहे

निर्भया मामले की सुनवाई : HC में बोली केन्द्र सरकार - सभी दोषी मिलकर फांसी की सजा को रोक रहे

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में चारों दोषियों की फांसी पर लगी रोक को चुनौती देने वाली केन्द्र की याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई। केन्द्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जजों से कहा कि निर्भया के दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। आपकाे बता दें कि दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार (31 जनवरी) को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद उन्हें शनिवार सुबह दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टाल दी गई थी।

- सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कानून के मुताबिक दोषियों को फांसी दिए जाने से पहले 14 दिनों का नोटिस दिया जाना जरूरी है। इस मामले में, 13 वें दिन एक दोषी कुछ दलील दायर करेगा और फिर सभी के खिलाफ जारी डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग करेगा। ये सभी मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दया क्षेत्राधिकार हमेशा एक व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र है। राष्ट्रपति अपनी परिस्थितियों के कारण किसी दोषी के प्रति दया दिखा सकते हैं। यह अन्य दोषियों पर कैसे लागू होगा?

- तुषार मेहता ने हाईकोर्ट से कहा कि दिल्ली जेल नियम के मुताबिक, सभी दोषियों को एक साथ फांसी दी जानी चाहिए, अगर 'अपील या आवेदन' लंबित है। इस 'अपील या आवेदन' में दया याचिकाएं शामिल नहीं हैं। वे अलग हैं और इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है।

- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट से कहा कि पवन गुप्ता जानबूझकर सुधारात्मक या दया याचिका दायर नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट का आदेश आता है, तो पवन या तो क्यूरेटिव या दया याचिका दायर कर सकता है, दूसरों को फांसी नहीं होगी।

- सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दोषी की ओर से जानबूझकर देरी की जा रही है। न्याय के हित में कोई देरी नहीं हो सकती, मौत की सजा में देरी नहीं हो सकती। दोषी के हित में, मौत की सजा में किसी भी तरह की देरी का आरोपी पर अमानवीय प्रभाव पड़ेगा।

- सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक बार सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों के भाग्य को अंतिम रूप से तय कर दिया, उन्हें अलग से फांसी दिए जाने से कोई रोक नहीं है। जेल नियमों के मुताबिक, फांसी से बचने का अंतिम कानूनी उपाय सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन है।

दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार (31 जनवरी) को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद उन्हें शनिवार सुबह दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टाल दी गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धमेंद्र राणा ने चारों दोषियों की अर्जी पर यह आदेश जारी किया किया था। चारों दोषियों ने एक फरवरी को उन्हें फांसी देने पर रोक लगाने की मांग की थी। पवन कुमार गुप्ता (25), विनय कुमार मिश्रा (26), अक्षय कुमार (31) और मुकेश कुमार सिंह (32) को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी दी जानी थी।

दूसरी बार मृत्यु वारंट की तामील टाली गई है। पहली बार सात जनवरी को चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने का मृत्यु वारंट जारी किया गया था। इस पर 17 जनवरी को स्थगन दिया गया था। उसी दिन फिर उन्हें एक फरवरी को फांसी देने के लिए दूसरा वारंट किया गया जिस पर शुक्रवार (31 जनवरी) को रोक लगा दी गई।

पवन, विनय और अक्षय के वकील ए. पी. सिंह ने अदालत से फांसी पर अमल को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की अपील की और कहा कि उनके कानूनी उपचार के मार्ग अभी बंद नहीं हुए हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनके आवेदन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह विचारयोग्य नहीं है तथा उन्हें अलग-अलग फांसी दी जा सकती है, लेकिन तिहाड़ जेल की यह दलील अदालत में स्वीकार नहीं हुई।

शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने दोषियों की ओर से फांसी देने के लिए जारी 'डेथ वारंट' पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल अर्जी पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है। दोषी विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता की ओर से अधिवक्ता ए.पी. सिंह ने अदालत को बताया कि अभी उनके मुवक्किल के पास कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं, ऐसे में फांसी देने के लिए जारी डेथ वारंट पर अनिश्चितकाल तक के लिए रोक लगा दी जाए। हालांकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने दोषियों की इस मांग का विरोध किया। जेल प्रबंधन ने अदालत को बताया कि दोषियों को अलग-अगल फांसी दी जा सकती है। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फांसी देने के लिए जारी डेथ वारंट पर अनिश्चितकाल तक के लिए रोक लगा दी। साथ ही आदेश की प्रति दोषियों के वकील और जेल अधिकारियों को मुहैया करा दिया। अदालत ने जेल प्रशासन को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने और शनिवार को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

7 जनवरी, 2020: अदालत ने डेथ वारंट जारी कर निर्भया के गुनहगरों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया।

17 जनवरी, 2020: अदालत दोबारा से आदेश जारी कर फांसी देने के तारीख में बदलाव कर दिया। अदातल ने दोबारा से डेथ वारंट जारी करते हुए सभी दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश दिया।

बसंत विहार इलाके में 16 दिसंबर, 2012 की रात को 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में बहुत ही बर्बर तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस जघन्य घटना के बाद पीड़िता को इलाज के लिए सरकार सिंगापुर ले गई जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बस चालक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक नाबालिग भी शामिल था। इस मामले में नाबालिग को तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया। जबकि एक आरोप राम सिंह ने जेल में खुदकुशी कर ली। फास्ट ट्रैक कोर्ट अदालत ने इस मामले में चार आरोपियों पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बहाल रखा था।

Updated : 2020-02-02T16:54:21+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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