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मोेदी सरकार की एक और अनूठी पहल

-पर्यावरण संतुलन साधने की कवायद -स्वच्छता के साथ शुुद्ध हवा व साफ पानी मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता -सरकार जनता के साथ मिलकर करेगी काम

मोेदी सरकार की एक और अनूठी पहल

नई दिल्ली। स्वच्छता को जनांदोलन बनाने वाली मोदी सरकार अब स्वच्छ पानी के साथ ही शुद्ध हवा के लिए जमीन पर उतरने जा रही है। राजनीतिक व सामाजिक समानता के लिए एतिहासिक निर्णय करने वाली यह सरकार मानवीय मूल जरूरतों को मुहैया कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। कार्य को नतीजे तक पहुंचाने के लिए सरकार जल्द ही ठोस योजनाओं को उतारेगी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का दावा है कि इन योजनाओं से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेंगे बल्कि भारत का एक बड़ा भू-भाग हरियाली से ओतप्रोत नजर आएगा। सरकार ने इस दिशा में बांस उत्पादन को बड़ा लक्ष्य बनाया है। देश के तटीय इलाकों में यह कार्य जल्द गति प्राप्त करेगा।

भारतीय वन संपदा का प्रबंधन अगर उचित तरीके से कर लिया जाए तो पर्यावरण की दृष्टि से वह विश्व का सिरमौर बन सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां का 13000 वर्ग फुट भू-भाग में जंगलों का फैलाव है। ये ऐसे जंगल हैं जो घने, मध्यम और विरले स्वरूप में आच्छादित हैं। भारतीय वन सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में घटते वन संपदा के क्षेत्र के बावजूद यहां जंगलों ने अभी भी अपना अस्तित्व बनाए रखा है। और अगर वन संपदा का प्रबंधन कुशल व कारगर हो तो पर्यावरण के मापदंडों में भारत विश्व में अग्रणी देश बन जाएगा। हाल ही में स्पेन के मैड्रिड शहर में पर्यावरण संबंधी वैश्विक सम्मेलन में इस बात को स्वीकार किया गया कि भारत पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करने वाला अग्रणी देश है। भारत की तरफ से उसकी पैरवी करने वाले केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक में साफतौर पर कहा कि पर्यावरण में गहराते असंतुलन के लिए भारत किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं है। बल्कि, वह तो पर्यावरण संबंधी मापदंडों का पालन करने वाला जिम्मेदार देश है। जावड़ेकर ने विश्व बिरादरी को चेताते हुए अपनी दलील रखी कि औद्योगीकरण व पंूजीवाद के दौर में विकसित व अग्रणी देशों ने प्राकृतिक संपदाओं का बेतिहासा दोहन किया। जिसकी परिणति यह कि आज भारत जैसे देश भी इस विसंगति का दंश झेल रहे है।

जावड़ेकर ने बताया कि प्राकृतिक असंतुलन को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस क्षेत्र में विशेषज्ञों के साथ विमर्श किया है। मोदी सरकार इस दिशा में व्यापक स्तर पर प्रयास कर रही है। जिसके लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय हरकत में आया है। वैश्विक स्तर पर इस बात पर जोर दिया जा रहा है तापीय विक्षोभ व ओजोन परत में होने वाले क्षरण को रोेकने के लिए सभी देशों को सामूहिक रूप से आवश्यकजनक कदम उठाने होंगे। पर्यावरण और प्राकृतिक असंतुलन को दूर करने की दिशा में मोदी सरकार ने व्यापक स्तर पर कदम उठाए हैं। इसके लिए हर गांव में कटाई और जानवरों की चराई पर प्रतिबंध लगाना होगा। सागर किनारे तटवर्ती क्षेत्रों में वनों का विकास के लिए वन निवासियों को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन दिया जाएगा।

पर्यावरण संतुलन के लिए बम्बू यानि बांस की उपयोगिता एक अच्छा व किफायती संशाधन है। सरकार बांस उत्पादन के लिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण व वित्तीय सुविधा देने संबंधी योजनाएं उतारी हैं। इस दिशा में सरकार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। प्रदूषण फैलाने वाले तमाम कारकों द्वारा होने वाली 250 करोड़ टन कार्बन डाई आक्साइड के बिसर्जन का प्रबंध किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार जनता व राज्यों के सहयोग से वनों के विकास में यथेष्ठ कदम उठाने जा रही है। वनों की रक्षा करना है तो इसके लिए सरकारी प्रयासों के अलावा आम जनता को जागरूक होना होगा। 62 हजार वेट लाइन के जरिए देश में वनों की समग्रता को लेकर गहन चिंतन किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा वन नीति पर समग्रता पूर्वक विचार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसी संकल्प के साथ घर-घर जल पहंुचाने की योजना को मूर्त रूप प्रदान किया है। जिसे 2024 तक पूरा किया जाना है और बिना आम आदमी की सहभगितो के संभव नहीं है।

Updated : 2019-12-31T19:51:56+05:30
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