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मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सहेलियों को साथ रहने की दी इजाजत, कहा- लड़कियां बालिग अपने फैसले खुद ले सकती है

पिता की याचिका निरस्त

मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सहेलियों को साथ रहने की दी इजाजत, कहा- लड़कियां बालिग अपने फैसले खुद ले सकती है
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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला सामने आया है। गुरुवार को हाई कोर्ट ने दो बालिग सहेलियों की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें साथ रहने के लिए स्वतंत्र कर दिया। साथ ही कोर्ट ने इनमें से एक सहेली के पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निरस्त कर दी गई। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि सहेलियों के बालिग होने के कारण वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का पूरा अधिकार रखती हैं।

बताया गया कि हाई कोर्ट ने यह फैसला तीन दिन पहले दिया, लेकिन इसका खुलासा गुरुवार को हुआ है। शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने बताया कि याचिका पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने दोनों युवतियों को साथ रहने के लिए स्वतंत्र करते हुए पिता की याचिका को निरस्त कर दिया।

दरअसल, जबलपुर की दो लड़कियां बचपन में साथ खेलीं, पढ़ीं और बड़ी हुईं। यह दोस्ती प्यार में बदल गई। परिवार और समाज ने अंगुली उठाई, तो दोनों घर से भाग गईं। दोनों साथ रहना चाहती हैं। एक युवती की उम्र 18 और दूसरी की 22 साल है। 18 साल की युवती के पिता ने बेटी की कस्टडी के लिए हाई कोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि 22 वर्ष आयु वाली युवती उनकी 18 वर्ष की आयु की बेटी को भगाकर भोपाल ले गई और उसने उसे जबरन बंधक बना रखा है। लिहाजा, मुक्त कराकर हवाले किया जाए। इस पर हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि वह बंधक बनाकर रखी गई 18 वर्ष की युवती को मुक्त कराकर पेश करे। पुलिस ने युवती को भोपाल के एक छात्रावास से जबलपुर लाकर कोर्ट के समक्ष पेश किया। इस दौरान 22 वर्षीय सहेली भी कोर्ट रूम में मौजूद थी। कोर्ट ने दोनों सहेलियों को एक घंटे का समय देते हुए कहा कि आपस में चर्चा कर लें। एक घंटे बाद दोनों फिर से कोर्ट के समक्ष पेश हुईं।

कोर्ट के सामने 18 वर्षीय युवती ने अपने बयान में कहा कि उसे परिवार नहीं, एक-दूजे का साथ पसंद है। वह उसी के साथ रहना चाहती है। अनुचित आरोप लगाते हुए दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निरस्त कर दी जाए। अदालत ने दोनों सहेलियों की साथ रहने की इच्छा का सम्मान किया और युवती को बंधक बनाने के आरोप को खारिज करते हुए अदालत ने पिता की याचिका को निरस्त कर दिया।

यह है मामला -

दोनों युवतियां जबलपुर से करीब 20 किमी दूर खमरिया इलाके में ईस्टलैंड में रहती हैं और दूर की रिश्तेदार और पड़ोसी भी हैं। 22 साल की युवती के माता-पिता का देहांत हो गया, इसलिए वह अकेली रहने लगी। रिश्तेदार और पड़ोसी होने की वजह से 18 साल की युवती के परिजन इसकी देखभाल करने लगे। 18 साल की युवती के पिता ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से रिटायर हैं। आरोप है कि नशे में आएदिन झगड़ा करते थे। युवती पिता की मार से बचने के लिए दूसरी युवती के घर चली जाती थी। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहराती गई और उनका रिश्ता मजबूत होता गया। इसके बाद दोनों युवतियां इसी साल 14 अगस्त को जबलपुर से भाग निकलीं। 16 अगस्त को पिता ने दोनों लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में दोनों युवतियां जबलपुर से भोपाल आ गईं। और हॉस्टल में किराए से कमरा लेकर रहने लगीं।

Updated : 2022-11-12T13:02:45+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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