इंदौर में दूषित पानी से 14 मौतों पर हाई कोर्ट सख्त, मोहन सरकार से मांगी रिपोर्ट

इंदौरः मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से बीमार पड़े लोगों और मृतकों के मामले में मोहन सरकार से रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने सरकार से इस घटना में संक्रमित लोगों और मृतकों की संख्या से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने यह आदेश बार एसोसिएशन की तरफ से लगाई जनहित याचिका में दिया गया है। यह याचिका इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी की तरफ से लगाई गई थी। पीआईएल पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट सख्त नजर आई।
2 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को अगली सुनवाई में पूरा डेटा पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी के दिन होगी।
क्या लगाई गई थी याचिका
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि हाल के दिनों में भागीरथपुरा इलाके में एक गंभीर घटना हुई। यहां नगर निगम की तरफ से सप्लाई की जा रही नर्मदा जल में दूषित पानी मिल गया। इसके चलते कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। वहीं, कुछ लोगों की मौत भी हो गई। उन्होंने बताया की जनहित याचिका में इंदौरवासियों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने और प्रभावित लोगों को मुफ्त और उचित इलाज देने की मांग की गई।
इन सवालों के देने होंगे जवाब
याचिका के आधार पर ईनानी ने कहा कि अगली सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा कि अलग-अलग अस्पतालों में कितने मरीज भर्ती है। उन्हें किस तरह का इलाज दिया जा रहा है। साथ ही घटना से जुड़ी कुल कितनी मौतें हुई हैं।
सीएम मोहन ने बीमार लोगों से की मुलाकात
इस बीच बुधवार के दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दूषित पानी पीने साथ ही मरीजों का हाल जानने के साथ ही उन्होंने इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। डॉ मोहन यादव ने प्रभावित लोगों से बातचीत भी की और अधिकारियों को सभी मरीजों को समय पर और उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गहन जांच कराने की बात भी कही थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और सभी प्रभावित लोगों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की थी।
लापरवाही की अधिकारियों पर गिरी गाज
इससे पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। कार्रवाई के तहत दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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