‘संकटपूर्ण स्थितियों में उबरना जानता है इंदौर'

‘संकटपूर्ण स्थितियों में उबरना जानता है इंदौर
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इंदौर:भागीरथपुरा की पीड़ा के रूप में जो संकट इंदौर शहर के सामने पहाड़ बनकर टूटा है, उसकी जिम्मेदारी एवं जवाबदेही से हम कभी भी मुकरे नहीं हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की नगरी इंदौर का यह संस्कारभाव रहा है कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी एकजुटता, जनभागीदारी और आत्मविश्वास की ज्योत से अंधकार को परास्त कर उम्मीदों का उजास फैलाती है।

आज भागीरथपुरा में जो आंसू गिर रहे हैं, वे भी हमारे ही हैं और जिम्मेदारी भी हमारी ही है। भविष्य में पुनरावृत्ति न हो, इसी संकल्प के साथ हम स्थिति सुधार के लिए दिन-रात जुटे हैं। यह बातें इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले को लेकर ‘स्वदेश’ से रविवार को चर्चा में कही। साथ ही महापौर ने भागीरथपुरा एवं इंदौर शहर की वर्तमान स्थितियों पर भी अपना पक्ष रखा।

स्वदेश से विशेष बातचीत के मुख्य अंश

दूषित पेयजल से जुड़ी जिम्मेदारी पर क्या कहेंगे?

यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। प्रथम नागरिक होने के नाते यह मेरी पहली जिम्मेदारी है और इसे मैंने पहले दिन से स्वीकार भी किया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि एक साल पहले टेंडर लगा हुआ था। यदि उसका टेंडर खुलकर वर्कऑर्डर होकर समय पर कार्य प्रारंभ हो जाता, तो यह संकट सामने नहीं आता।

गरीब लोगों की सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि उनकी बात सुनने वाला क्षेत्र में कौन है? वे पार्षद को बताते हैं, पार्षद हमें अवगत कराते हैं। रुकावट कहां आई, यह सबके सामने है। इसलिए नीचे से ऊपर तक सभी की जिम्मेदारी में कहीं न कहीं कुछ रिक्त रह गया, उसी का यह नतीजा है।निगम के उदासीन अधिकारियों की रवानगी हो गई, लेकिन सार्वजनिक रूप से बोलना पड़ा?

इसमें ऐसा है कि ‘अधिकारी नहीं सुनते’मैंने यह बात कभी सार्वजनिक रूप से नहीं कही। कहीं भी ऐसा नहीं कहा। मीटिंग में मैंने इतना जरूर कहा कि यदि नीतिगत बातों और मुद्दों को निश्चित मंच पर भी नहीं उठा सकते, तो फिर मीटिंग करने का क्या अर्थ है। मैंने सार्वजनिक रूप से कभी ऐसा कहा हो, तो बताइए। निश्चित रूप से जिस स्तर पर बात होनी चाहिए, वहां होगी।

भागीरथपुरा की आज की स्थिति का आकलन क्या है?

मुझे पूर्ण विश्वास है कि सारी चीजें ठीक हो जाएंगी। अभी हमारी पहली जिम्मेदारी यही है कि लोगों को साफ पेयजल मिले और सभी लोग ठीक होकर अस्पताल से घर लौटें। इसी उद्देश्य से हम भागीरथपुरा से लेकर अस्पतालों तक निरंतर निगरानी कर सुविधाएं जुटा रहे हैं। हालात सुधर रहे हैं और भागीरथपुरा में निगम प्रशासन सतत रूप से जुटा हुआ है।

इंदौर शहर में अनेक जगह ‘भागीरथपुरा जैसी लीकेज’ की स्थिति बन रही है?

बिल्कुल भी नहीं। शहर में कुछ जगहों पर लीकेज सामने आते हैं, लेकिन जितनी शिकायतें सामान्य रूप से पहले आती थीं, अभी भी उतनी ही आ रही हैं। इनका त्वरित रूप से 48 घंटे में निराकरण किया जा रहा है। संपूर्ण शहर का सर्वे करवाकर लीकेज ढूंढकर 48 घंटे में ठीक करवाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों के टैंक, स्टेप्स और निगम द्वारा ड्रेनेज चैम्बरों की व्यापक सफाई भी करवाई जा रही है।

दूषित पेयजल मामले से इंदौर का ‘स्वच्छता मॉडल’ लांछित हुआ है?

मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। शहर का सबसे अच्छा घर, जिसे आप आदर्श मॉडल मानते हैं, वहां भी दो-चार साल में ड्रेनेज चोक होने, पानी की लाइन में गड़बड़ी आने या प्लंबिंग खराब होने की स्थिति बनती है। ऐसे में व्यक्ति टीम बुलवाकर उसे ठीक करवाता है। इन कारणों से कई बार दो-चार दिन का अंतर आ ही जाता है।इंदौर इतना बड़ा शहर है, समस्याएं आती हैं। जिम्मेदारी हमारी है और हम उसे ठीक करेंगे, लेकिन इससे इंदौर का स्वच्छता मॉडल डिस्टर्ब हो जाएगा ऐसा नहीं है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर था और आगे भी रहेगा।

अधिकारियों के बाद जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का विषय भी तूल पकड़ रहा है?

इससे हम कभी भी मुकरे नहीं हैं। पहले दिन से यह स्वीकार किया है कि भागीरथपुरा सहित पूरे शहर में स्थिति नियंत्रण में लाकर सुधार किया जाए। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने जनभागीदारी की ताकत से हर छोटे-बड़े संकट का सामना किया है। जब-जब इंदौर के सामने चुनौती आई, तब-तब शहर और शहरवासियों ने एकजुटता, त्याग, संघर्ष और आत्मविश्वास के साथ उसे पार किया। आगे भी ऐसा ही होगा।

सोशल मीडिया पर आपको लेकर जनता में आक्रोश है?

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मृत्यु होना दुर्भाग्यपूर्ण और हृदयविदारक है। इस घटना से कई परिवारों का संसार उजड़ गया और शहर की वर्षों में बनी छवि को भी गहरा आघात पहुंचा है। मैं जनता का सेवक हूं और शहर का प्रथम नागरिक भी। जनता ने चुनाव जिताकर यहां तक पहुंचाया है, इसलिए दुःख में उनका आक्रोश भी मैं शिरोधार्य करता हूं।शहर की छवि को सुधारना और यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिले इसी दिशा में सामूहिक प्रयास के साथ हम आगे बढ़ेंगे।

कैसे मान लें कि इस तरह की लापरवाहियों की पुनरावृत्ति नहीं होगी?

यह सत्य है कि केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि देश के हर बड़े शहर में कहीं न कहीं दूषित पानी से जुड़ी शिकायतें पोर्टलों पर दर्ज होती हैं। इन शिकायतों का समय पर निराकरण करना नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों की जिम्मेदारी है। यदि जिम्मेदारी में चूक न होती, तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।अब हम 311 ऐप, हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से दर्ज होने वाली शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सतत निगरानी करेंगे।

भागीरथपुरा मामले ने जनविश्वास में दरार पैदा की, कैसे भरेगी?

जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई है। निश्चित रूप से हम जनता का विश्वास पुनः बहाल करेंगे। फिलहाल जनता से विनम्र आग्रह है कि स्वयं और परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखें तथा पानी उबालकर पीएं।

इंदौर ने हर कठिन स्थिति में जनभागीदारी और टीमवर्क से जीत हासिल की है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है और आगे भी रहेगा, क्योंकि संकटपूर्ण परिस्थितियों से एकजुट होकर उबरना इंदौर जानता है।

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