इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी मामला: हाई कोर्ट का सख्त एक्शन, प्रशासन को नोटिस

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी मामला: हाई कोर्ट का सख्त एक्शन, प्रशासन को नोटिस
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भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों और बीमारी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा। नई जनहित याचिका और मौत के आंकड़ों पर प्रशासन को नोटिस।

इंदौरः शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने का मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगातार जनहित याचिकाएं दायर हो रही हैं। शुक्रवार को नगर निगम की ओर से स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की गई, वहीं एक नई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया।

दरअसल, भागीरथपुरा इलाके में बीते दिनों बदबूदार और दूषित पानी की सप्लाई के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए थे। उल्टी-दस्त, डायरिया और अन्य गंभीर लक्षणों के चलते कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहीं, 15 लोगें की मौत की भी पुष्टि हुई है। इस घटना के बाद प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे और मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा।

हाई कोर्ट में लगी याचिकाएं

31 दिसंबर को इस प्रकरण में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी की ओर से, जबकि दूसरी पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी द्वारा दाखिल की गई। इन याचिकाओं की पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव ने की। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम को अंतरिम आदेश देते हुए प्रभावित नागरिकों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने और तुरंत स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

कलेक्टर और निगम आयुक्त को नोटिस

इन आदेशों के अनुपालन में शुक्रवार को नगर निगम ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। इसी दौरान इस मामले में एक तीसरी जनहित याचिका भी दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। तीसरी याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की गई है, जबकि पहले से लंबित दो याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई होगी।

नगर निगम की रिपोर्ट पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव ने नगर निगम की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में केवल चार मौतों का उल्लेख किया गया है, जबकि वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। उनके अनुसार कई मौतें और बड़ी संख्या में बीमार लोगों का विवरण रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की भी मांग की।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि स्वच्छता में अग्रणी माने जाने वाले इंदौर जैसे बड़े शहर में यदि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

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