शांति की जीत पर पुलिस का जश्न, भोजशाला में शांतिपूर्ण तरीके से एक साथ हुई पूजा और नमाज

धारः मध्य प्रदेश धार जिले में स्थित भोजशाला में शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व इतिहास बन गया। पर्व पूरी तरह शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ। भोजशाला परिसर में जहां हिंदू समाज ने पूरे दिन पूजा-पाठ किया, वहीं कमाल मौला मस्जिद में मुस्लिम समुदाय ने जुमे की नमाज अदा की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दोनों धार्मिक गतिविधियां तय व्यवस्थाओं के तहत बिना किसी टकराव के पूरी हुईं। इस सफल आयोजन में सबसे अहम भूमिका पुलिस प्रशासन की रही।
इस संवेदनशील आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के बाद शनिवार को पुलिस कर्मचारियों ने राहत और खुशी का इजहार किया। ड्यूटी में लगे जवानों ने डीजे की धुन पर डांस कर अपनी सफलता का जश्न मनाया, जिसका वीडियो भी सामने आया है।
प्रशासन के सामने थी बड़ी चुनौती
बसंत पंचमी को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती थी, क्योंकि कोर्ट के आदेश के तहत भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों की अनुमति थी। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। शहर और परिसर में करीब 8 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। कड़ी निगरानी और सतर्कता के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण रहा।
हिंदू समाज को पूरे दिन पूजा की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई थीं। गर्भगृह में हिंदू समाज ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की अखंड पूजा की। सुबह 7 बजकर 24 मिनट पर यज्ञ की पहली आहुति के साथ पूजन शुरू हुआ, जो शाम तक चलता रहा। वहीं भोजशाला के संरक्षित परिसर के उत्तरी हिस्से में मुस्लिम समुदाय के 17 सदस्यों ने जुमे की नमाज अदा की।
हिंदू समाज का अखंड पूजा का था संकल्प
हिंदू समाज ने इस बार अखंड पूजा का संकल्प लिया था, जिसके समर्थन में शहर के व्यापारियों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखीं। श्रद्धालुओं को जिग-जैग बैरिकेडिंग से गुजरते हुए भोजशाला में प्रवेश कराया गया। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्र ने कहा कि बसंत पंचमी के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। उन्होंने इसके लिए धार की जनता और प्रशासनिक टीम का आभार जताया।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए तीन महीने पहले से रणनीति तैयार की थी। शांति समितियों की बैठकें, दोनों समुदायों से संवाद, पुराने अनुभवों से सीख, थ्री-डी मैपिंग, एआई-लिडार, ड्रोन तकनीक और फ्लैग मार्च जैसे कदम अहम साबित हुए।
24 साल में 4 बार शुक्रवार को बसंत पंचमी
उल्लेखनीय है कि बीते 24 वर्षों में यह चौथी बार था जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी। 2003, 2013 और 2016 के अनुभवों के उलट इस बार 6-सेक्टर रणनीति कारगर रही और बिना किसी अप्रिय घटना के पूजा और नमाज दोनों संपन्न हुईं। हालांकि, नमाज के स्थान को लेकर मुस्लिम समुदाय की ओर से नाराजगी भी सामने आई।
