कलियुगी कुमाता को काले सांपों ने डंसा तो उगल दी करतूत

कलियुगी कुमाता को काले सांपों ने डंसा तो उगल दी करतूत
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फरियादी बनकर पति ने दिलाई आजीवन कारावास की सजा

ग्वालियर:एक कलियुगी कुमाता ने प्रेम प्रसंग में पड़कर अपने ही साढ़े तीन वर्ष के कलेजे के टुकड़े को दो मंजिला छत से नीचे फेंककर उसकी हत्या कर दी। शुरुआत में महिला ने इसे सामान्य घटना बताया और बच्चे का अंतिम संस्कार भी कर दिया, लेकिन अपनी करतूत से विचलित महिला को दिन-रात चैन नहीं मिला। उसे बार-बार काले सांप दिखाई देने लगे। आत्मग्लानि से ग्रसित होकर उसने आठ दिन बाद रात करीब ढाई बजे पति को सच्चाई बता दी।

पत्नी द्वारा मासूम बेटे की हत्या की बात सुनकर पति के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे ऐसा लगा मानो उसका पूरा घर-संसार ही उजड़ गया हो, क्योंकि वह अब तक यही समझ रहा था कि बच्चा पैर फिसलने से गिर गया था। यह बहुचर्चित और एक मां को कलंकित करने वाली घटना ढाई साल पुरानी है, जिसमें पति ने फरियादी बनकर पत्नी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को महिला ज्योति राठौर को दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी शासकीय अभिभाषक विजय शर्मा ने की।

दरअसल, तारामाई कॉलोनी, थाटीपुर थाना क्षेत्र, मुरार मुक्तिधाम के पास रहने वाले पुलिस आरक्षक ध्यान सिंह पुत्र स्व. लल्लू सिंह का विवाह वर्ष 2017 में भिंड की ज्योति सिंह राठौर से हुआ था। उनके दो बेटे थे। जिस फ्लैट में वे रहते थे, उसके पास ही उदय इंदोरिया की ससुराल थी, जिसके कारण उसका वहां आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान ज्योति और उदय के बीच प्रेम प्रसंग गहरा गया। यहीं से राठौर परिवार की उल्टी गिनती शुरू हो गई।

28 अप्रैल 2023 को ज्योति अपने साढ़े तीन वर्ष के बेटे जतिन उर्फ शनी के साथ छत पर थी। रात करीब आठ बजे उस समय कोहराम मच गया, जब शनी दो मंजिला छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के दौरान 29 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। इसे सामान्य घटना मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

लेकिन ज्योति की रातों की नींद उड़ गई। सपनों में काले सांपों द्वारा डंसे जाने की कल्पनाओं से वह आत्मग्लानि में डूब गई। घटना के आठ दिन बाद जब उससे रहा नहीं गया, तो उसने पति को अपनी करतूत बता दी कि कलेजे के टुकड़े शनी को उसी ने छत से नीचे फेंककर मारा था। कारण पूछने पर उसने स्वीकार किया कि छत पर उसे उदय इंदोरिया के साथ देख लिया गया था और इस डर से कि कहीं बच्चा पति को न बता दे, उसने उसे नीचे पटक दिया।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से हुई सजा

चूंकि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और पति द्वारा जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य ही उपलब्ध थे, इसलिए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सथिर अली ने ज्योति को अपने पुत्र की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

आरक्षक पति ने पुत्र की हत्या करने वाली पत्नी को सजा दिलाने की ठानी और डेढ़ माह तक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य जुटाने के बाद थाटीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 28 जून 2023 को थाटीपुर थाने में ज्योति के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया, जिसमें उदय इंदोरिया को भी सह-आरोपी बनाया गया।

इनका कहना

मेरे दो बेटे थे-एक सात वर्ष का और दूसरा साढ़े तीन वर्ष का। पड़ोस में आने वाले उदय इंदोरिया से प्रेम प्रसंग में बाधा बन रहे छोटे बेटे जतिन उर्फ शनी को पत्नी ने दो मंजिला छत से फेंककर मार दिया। बुरे सपने और रातों की नींद उड़ जाने के बाद आठ दिन बाद उसने आत्मग्लानि के कारण मुझे सच्चाई बता दी। सबूत जुटाकर मैंने प्रकरण दर्ज कराया। शनिवार को न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद मुझे सुकून मिला है। एक बेटे को खोने पर पिता के दिल पर क्या गुजरती है, यह मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है।”

- ध्यान सिंह, मृतक शनी के पिता

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