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विद्यार्थियों ने जाना नृत्य में कैरियर का अतीत, वर्तमान और भविष्य

राजा मानसिंह कला एवं संगीत विश्विद्यालय में ऑनलाइन व्याख्यान का हुआ आयोजन

विद्यार्थियों ने जाना नृत्य में कैरियर का अतीत, वर्तमान और भविष्य
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ग्वालियर। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्विद्यालय के कथक विभाग द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया।यह व्याख्यान ऑनलाइन फेसबुक के माध्यम से किया गया। इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में कथक नृत्यांगना शीला मेहता ने न्यू जर्सी, यूनाइटेड स्टेटस ऑफ अमेरिका से भाग लिया।





उन्होंने कैरियर इन डांस : पास्ट , प्रेजेंट एंड फ्यूचर" विषय पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया की नृत्य के साथ साधना करने से स्थिरता आती है। नृत्य के अध्यात्मिक भाग से जुड़ने से नृत्य की गहराई पता चलती हैं। उन्होने कहा की कथक नृत्य योग से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया के जीतना हम रियाज करेंगे उतना ही नृत्य के अंदर पहुँच पाएंगे।ओर बताया कथक नृत्य मे चक्कर से सेंटर पॉइंट मजबूत होता है।

उन्होंने प्रयोगात्मक पक्ष में कवित बताई जो कि छन्द नोरास में प्रवीण सागर ग्रथ से ली गई है जिसके बोल हैं " फुलेल अंग रंजियम गुलाल नीर मंजियम , बनाय केश पटियम सिंदूर माँग हटीयम...." इसी के साथ ही उन्होंने कथक नृत्य में सोलह श्रृंगार के बारे में भी बताया और उससे जुड़ी एक कवित भी उन्होंने बताया जिसके बोल हैं " प्रथम नहाई अंग राग को लगाई अंग बाल को बनाई शीश को चूरामणि साज है...."। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए कथक नृत्य में प्रयोगात्मक पक्ष में झपताल में उन्होंने पहले लड़ी से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु द्वारा सिखाई गई बंदिश विद्यार्थियों को सिखाई।

इस कत्थक कार्यशाला और व्याखयान का आयोजन कत्थक नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना झा ने किया। व्याख्यान के अंत मेंडॉ. अंजना ने शीला मेहता एवं कुलपति शिव शेखर शुक्ला का आभार व्यक्त किया।


Updated : 7 July 2020 10:30 AM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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