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घर-घर नहीं पहुंची पर्ची, पति को पत्नी से किया दूर, कर संग्रहकों की करतूत से गिरा मतदान प्रतिशत

घर-घर नहीं पहुंची पर्ची, पति को पत्नी से किया दूर, कर संग्रहकों की करतूत से गिरा मतदान प्रतिशत
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ग्वालियर,न.सं.। महापौर और पार्षद पदो के लिए सात वर्ष बाद हुए चुनाव में उस वक्त हजारों लोग न सिर्फ मायूस हुए बल्कि मतदान से वंचित हो गए। जब वे निर्धारित मतदान केन्द्र पर मतदान करने पहुंचे तो उनका नाम मतदाता सूची से नदारत मिला। इतना ही नहीं घर घर पर्ची पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम के कर संग्रहकों की थी, लेकिन उनकी लापरवाही और करतूत की वजह से आखिरी दिन तक घर-घर पर्ची नहीं पहुंच सकी। ऐसे में सुबह से ही मतदान केन्द्रों पर मतदाता अपना नाम तलाशते दिखे। इसके अलावा पहली बार यह भी सामने आया कि एक ही परिवार के मतों को एक केन्द्र के बजाए दूरस्थ केन्द्रों पर पहुंचा दिया गया। जिससे परिवार के पति-पत्नी और परिजन अलग अलग केन्द्रों पर मतदान के लिए भटकते रहे। उमस भरी गर्मी में कई लोग बिना मतदान के परेशान होकर घर लौट गए। यही कारण रहा है कि पिछले मतदान की अपेक्षा इस बार 8 फीसदी मतदान कम हुआ। मतदान का कम होना किस प्रत्याशी के लिए लाभकारी और नुकसानदेय होगा इसे लेकर दिनभर कयास लगते रहे।

महापौर प्रत्याशी की सास का केन्द्र बदला

महापौर पद की भाजपा प्रत्याशी सुमन शर्मा की 90 वर्षीय सास श्रीमती शांति देवी शर्मा पिछले कई वर्षो से मेला मैदान के मतदान केन्द्र पर अपना मत डालती रही है। उनकी बिटिया जब उन्हें व्हील चेयर पर लेकर मेला मैदान के मतदान केन्द्र पर पहुंची तो उनका वहां नाम नहीं था। इसे लेकर काफी देर तक विवाद चला कि उनका नाम आखिर क्यों कटा। बाद में पता लगा कि उनका नाम एमआईटीएस महाविद्यालय के मतदान केन्द्र पर है। तब उन्होंने वहां जाकर मतदान किया।

20 वर्ष बाद बदल दिया केन्द्र

डॉ गिरीश चतुर्वेदी ने बताया कि वे पिछले 20 वर्ष से वार्ड 30 कैलाश विहार सिटी सेंटर में सपरिवार निवास करते है। इसी वार्ड 30 से ही लोकसभा चुनाव विधान सभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनावों में मतदान भी करते आए है। परंतु आज बहुत विषम परिस्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि

मेरा वोट तो वार्ड 30 में रह गया लेकिन पिताजी माताजी और पत्नी का नाम वार्ड 30 की लिस्ट में नही था। फिर ऑनलाइन सर्च करने पर पता चला कि उनका नाम वार्ड 29 की लिस्ट में है। तब महल गांव के मतदान केंद्र जाकर मतदान कराया। हालांकि वार्ड 29 में मेरा घर नहीं है वहां के वार्ड के पार्षद प्रत्याशियों की भी कोई जानकारी नहीं थी। काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और बहुत वक्त खराब हुआ। इस प्रकार की त्रुटियों के लिए कौन जिम्मेदार है।

पति-पत्नी को किया अलग

वार्ड 56 के नाका चन्द्रवदनी की गली नम्बर पांच में रहने वाली अंजली रावत ने बताया कि अभी तक वह अपने ही वार्ड में मतदान करती आ रही है। लेकिन इस बार जब मेरे पति ने ऑनलाइन पर्ची निकाली तो उसमें मेरा वार्ड 59 कर दिया। जबकि मेरे पति का वार्ड 56 ही था, ऐसे में इस बार मैं मतदान नहीं कर पाई। जिन लोगों की वजह से गलतियां हुई है उन पर प्रशासन को कार्रवाई करना चहिए।

जिम्मेदारी नहीं निभा पाएं कर संग्रहक

नगर निगम का कुछ अमला व अधिकारी स्वच्छ सर्वेक्षण के चलते चुनाव की तैयारियां शुरू होने से पहले से ही डयूटी से पीछे हट गए थे। क्षेत्राधिकारी से लेकर निचला अमला डयूटी से लेकर इसमें शामिल था। ऐसे में कर संगग्रह को मतदाता पर्ची वितरण का जिम्मा सौंपा गया जो मतदाता पर्ची का वितरण ठीक से नहीं कर पाएं।

इनका कहना है

विधानसभा चुनाव के बाद वार्ड के चुनाव में मतदाता सूचियों को तोडऩे में कहीं कहीं कुछ कमी रह गई। इससे पांच प्रतिशत से भी कम लोग प्रभावित हुए। हमारे द्वारा नई मतदाता सूची का प्रकाशन कर दावे आपत्ति बुलाई गई थी। उस समय जो आपत्तियां उनका निराकरण कर दिया गया था। ऐन समय पर किसी का केन्द्र बदला है तो दूसरे मतदान केन्द्र पर मत डलवाए गए है।

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह

जिलाधीश

Updated : 2022-07-18T11:41:45+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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