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ग्वालियर: शौचालय से पहले हो चुका है 6 करोड़ का वाहन घोटाला

निगमायुक्त ने बर्बाद किया नगर निगम, भोपाल तक पहुंची शिकायत

ग्वालियर: शौचालय से पहले हो चुका है 6 करोड़ का वाहन घोटाला

ग्वालियर, न.सं.। राजनेताओं को साधकर सात दिन के अंदर अपना तबादला स्थगित कराकर निगमायुक्त की कुर्सी पर दूसरी बार पदस्थ हुए संदीप माकिन के कारनामों की सूची एक के बाद एक खुलकर सामने आ रही है। ऐसे में उनके राजनेता आका भी उन्हें बचाने से हाथ खड़ा कर रहे हैं। क्योंकि यह समूचा मामला भोपाल तक जा पहुंचा है। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने तो भोपाल में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को इनकी करतूतों का चिट्ठा भी पहुंचा दिया है। वैसे भी निगम को कंगाल करने में इनकी अच्छी खासी भूमिका सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 15 सालों में भले ही कोई भी सरकार प्रदेश में काबिज रही हो, किंतु निगमायुक्त संदीप माकिन ऐसे अधिकारी हैं जो यह भाप लेते हंै कि किस समय किस राजनेता को खुश करना है। उसी हिसाब से उनकी पदस्थापना भी हो जाती है। लगभग 4 वर्ष पूर्व जब वे नगर निगम में अपर आयुक्त थे, उस समय तत्कालीन निगमायुक्त अनय द्विवेदी ने इन्हें कोई काम न देते हुए एक कोना पकड़ा दिया था। तब इन्होंने एक राजनेता की शरण लेकर दतिया जिला पंचायत सीईओ की कुर्सी पा ली।

इसके बाद कुछ दिन परिवहन विभाग में भी गए किंतु वहां दाना-पानी नहीं था, इसीलिए सत्ताधारी दल के नेताओं से संपर्क साधकर निगमायुक्त बन गए। यहां आते ही इन्हें अधिकारियों और कर्मचारियों के रूप में पुराने जानकार मिले तो उन्हीं के साथ हंसी ठट्ठा करते हुए मलाईदार कुर्सिया बोली लगाकर बांटना शुरू कर दी। इस बीच प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो माधवनगर में एक पूर्व आईएएस के यहां ढोक लगाना शुरू कर दी। जैसे ही सिंधिया समर्थकों मंत्रियों एवं विधायकों ने इस्तीफा दिया तब कमलनाथ सरकार में इनका तबादला भोपाल कर दिया। लेकिन यहां भी जोड़तोड़ बैठाकर सात दिन में तबादला रुकवा लिया। फिर कमलनाथ सरकार गिरने के बाद वे पुन: माधवनगर में ढोक देकर कुर्सी बचाने में सफल रहे। इस बीच इनके कार्यकाल के घोटालों की पोल एक एक कर खुल रही है। जिसमें सात करोड़ का शौचालय घोटाला सामने आया है, जिसकी कार्रवाई के डर से इनके हाथ-पैर फूले हुए हैं।

इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2019-20 में वाहन-मशीनरी किराए पर लेने हेतु टेंडर निकाले थे, लेकिन लोकसभा चुनाव आचार संहिता व मेयर के इस्तीफा देने के बाद वर्ष 2018-19 के लिए स्वीकृत दर से अनुबंधित फर्म ( मैसर्स तिवारी टूर एंड टे्रवल्स, मैसर्स सपना दा टूर एंड टै्रवल्स, मैसर्स एक्सीलेंट टूट एंड ट्रैवल्स) को निगम बजट में राशि 6.5 करोड़ से भुगतान के लिए 17 मार्च 2020 में प्रशासक एम.बी. ओझा को भेजने के लिए निगमायुक्त ने पत्र जारी किया। जिसमें बताया कि निगमायुक्त को केवल 2 करोड़ तक के व्यय स्वीकृति के अधिकारी है और फर्मों द्वारा प्रस्तुत देयक व्यय की सक्षम स्वीकृति न होने के कारण नहीं हो पा रहे हैं।

दो साल से फाइल गायब है-

सूत्रों का कहना है कि वाहन-मशीनरी को लेकर बीते दो साल से कार्यशाला में फाइलें गायब हैं और जिम्मेदार अधिकारी पुरानी दरों को आधार बनाकर भुगतान करवाते रहे हैं। जिसको लेकर मामले की शिकायत लोकायुक्त/ईओडब्ल्यू में भी की जा सकती है।

Updated : 2020-07-01T06:31:26+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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