देश को सशक्त बनाने की शुरुआत अपने घर से करेंः चक्रधर

ग्वालियर में संस्कार भारती का 'स्वर शतकम्' कार्यक्रम संपन्न
ग्वालियर:देश को सशक्त, सामर्थ्यशाली और विश्वगुरु बनाने की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से करनी चाहिए। जब परिवार संस्कारित और कर्तव्यपरायण होंगे, तभी समाज और राष्ट्र श्रेष्ठ बनेगा। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद ने जिस भारत की कल्पना की थी, उसे साकार करने के लिए पूरे समाज को प्राण-प्रण से जुटना होगा। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने बुधवार को जीवाजी विश्वविद्यालय स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में संस्कार भारती द्वारा आयोजित 'स्वर शतकम्' कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के संघचालक प्रहलाद सबनानी, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा आईआईटीटीएम के निदेशक प्रो. आलोक शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना है, जिसके माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति संभव है। तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास सहित अनेक साधक इसके प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साधना को भी 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना की थी। प्रारंभ में उपहास और विरोध के बावजूद आज समाज में संघ की स्वीकार्यता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को लेकर आज भी भ्रम फैलाया जाता है और स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के विचारों में भेद दिखाया जाता है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब समाज हिंदुत्व को एक समग्र दृष्टि से देखेगा।
स्वयंसेवकों ने सीमाओं पर महत्वपूर्ण योगदान दिया
सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कहा कि भारत-पाक और भारत-चीन युद्धों का उल्लेख करते हुए, संघ के स्वयंसेवकों ने सीमाओं पर और देश के भीतर यातायात, रसद एवं अन्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोवा मुक्ति आंदोलन में भी स्वयंसेवकों की भूमिका उल्लेखनीय रही। इन्हीं सेवाओं के सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया था।
विजेताओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत डॉ. संजय धवले, गोपी मंधान, चंद्रप्रताप सिकरवार, डॉ. रूबी गुप्ता एवं शिखर दीक्षित ने किया। एकल गीत की प्रस्तुति अनूप मोधे ने दी। संचालन एस.बी. ओझा एवं निरुपम नेवासकर ने किया तथा आभार प्रदर्शन चंद्रप्रताप सिकरवार ने किया। कार्यक्रम में वाद्यवृंद, भरतनाट्यम और गायन की मनोहारी प्रस्तुतियां हुईं। साथ ही, संस्कार भारती द्वारा आयोजित विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। आयोजन ने सभागार में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार किया।
संघ के सामाजिक योगदान का संकेत
जवाहरलाल नेहरू ने 3,000 स्वयंसेवकों को गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने का अवसर दिया था। उन्होंने बताया कि संघ अब पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध, नागरिक शिष्टाचार और कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्य कर रहा है।
