'कमल' के बहाने 'कमल' के ही खिलाफ हुए ग्वालियर भाजपा नेता

कमल के बहाने कमल के ही खिलाफ हुए ग्वालियर भाजपा नेता
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- असंतुष्ट भाजपा नेताओं ने की गोपनीय बैठक, राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा पत्र

ग्वालियर/वेब डेस्क। भारतीय जनता पार्टी में नव नियुक्त महानगर अध्यक्ष कमल माखीजानी की नियुक्ति के विरोध में सोमवार को भाजपा के कतिपय नेताओ ने बैठक आयोजित कर अपनी नाराज़गी सार्वजनिक भी की। श्री माखीजानी की नियुक्ति के बहाने पार्टी नेताओं ने सीधे सीधे प्रदेश नेतृत्व पर ही सवाल खड़े करते हुए संगठन महामंत्री,सांसद पर आरोप लगाए। पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में पार्टी की कथित दुर्दशा को लेकर संगठन महामंत्री को जवाबदेह बताते हुए विधानसभा चुनाव में पराजय के लिए भी जवाबदेह ठहराया। बैठक में जारी पत्र के वायरल होते ही बैठक में शामिल नेता संपर्क के लिए उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। वहीं वरिष्ठ पार्टी नेताओ ने इसको अनुशासनहीनता बताते हुए अपनी नाराज़गी प्रगट कर कारवाई की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन ने 24 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, जिसमें दो बार के महामंत्री सहित अन्य दायित्व निभाते रहे कमल माखीजानी को महानगर ग्वालियर का अध्यक्ष बनाया है। किंतु इस घोषणा को अभी दो दिन ही बीते होंगे कि भाजपा के कुछ असंतुष्ट नेताओं ने सोमवार को मंगल वाटिका में एक बैठक आयोजित कर विरोधी स्वर उठाए। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर प्रदेश संगठन महामंत्री, सांसद पर आरोप लगाए हैं। इस बैठक की अगुवाई लगातार साढ़े चार वर्ष तक महानगर अध्यक्ष रहे देवेश शर्मा, पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह, पूर्व मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वेदप्रकाश शिवहरे, पूर्व उपाध्यक्ष रामेश्वर सिंह भदोरिया, पूर्व महामंत्री शरद गौतम एवं महेश उमरिया ने की। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस तरह बैठक कर संगठन के आदेश को नकारने को अनुशासनहीनता बताया है।

बैठक के बाद जो पत्र वायरल हुआ है, उसमें लगाए आरोपों में कहा गया है कि कमल माखीजानी का नाम जिले से गए पैनल में नहीं था, फिर भी उनको अध्यक्ष बना दिया गया,जबकि मंडल अध्यक्षों का चयन रायशुमारी के बाद हुआ था, फिर अध्यक्ष के लिए रायशुमारी क्यों नहीं की गई, इसलिए यह नियुक्ति हमें स्वीकार नहीं है। पत्र में कहा गया है कि जब से प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत को बनाया गया है, तीन चार वर्ष में संगठन कमजोर हुआ है और विधानसभा में भी पराजय का सामना करना पड़ा। वहीं जिला महामंत्री, जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया है विवादास्पद रहे हैं। मंगल वाटिका में बैठक के थोड़ी ही देर बाद यह पत्र वायरल हो गया। साथ ही पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 36 नेताओं के नाम भी सामने आ गए। यद्यपि जब स्वदेश ने बैठक में शामिल रहे नेताओं से चर्चा करनी चाही तो कुछ ने बैठक करना तो स्वीकार किया,किंतु किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जबकि निवर्तमान जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने मोबाइल ही रिसीव नहीं किया।

बैठक में यह रहे शामिल

निवृतमान अध्यक्ष देवेश शर्मा, पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह, पूर्व मेला उपाध्यक्ष वेदप्रकाश शिवहरे, रामेश्वर सिंह भदोरिया, अशोक सिंह जादौन, शरद गौतम, महेश उमरैया, भरत दांतरे, विवेक चौहान, राज कुमार परमार, रामनिवास तोमर, विवेक शर्मा, सोनू मंगल, रिंकू परमार, सत्येंद्र रईखेड़ा, अवधेश तोमर, पप्पू बढौरी, अरुण तोमर, अशोक जैन, रमाकांत मेहते, डॉ राकेश रायजादा आदि।

संगठन महामंत्री जैसे पवित्र पद पर टिप्पणी करना ठीक नहींः पवैया

पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जयभान सिंह पवैया ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भाजपा जैसी पार्टी है, उसकी ऐसी संस्कृति नहीं है। यह कृत्य संगठन के अंतिम निर्णय पर प्रश्न खड़े कर राजनीतिक रूप से अनुशासन की दृष्टि से अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें संगठन महामंत्री जैसे पवित्र पद को लेकर की गई टिप्पणिया ठीक नहीं है। यदि ऐसा ही कहना था तो उसके लिए उचित स्थान पर अपनी भावनाएं रखी जा सकती हैं।

असत्य की पराकाष्ठा हैः चड्डा

पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राज चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जो लोग इकट्ठा हुए वह बड़े पदों पर भी रहे हैं, यह बताएं कि वे किसे अपना नेता मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें असत्य की पराकाष्ठा है। संगठन महामंत्री पर आरोप लगाना पूरी तरह से विवो वेबुनियाद हैं। यह अनुशासनहीनता है।

प्रक्रिया के तहत ही हुई है अध्यक्ष की नियुक्तिः तिवारी

भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी का कहना है कि इसमें विरोध जैसा कुछ नहीं है। कुछ कार्यकर्ताओं की भावनाएं हैं, जिसमें उनकी समझ का स्तर ऐसा रहा होगा। जहां तक अध्यक्ष की नियुक्ति की बात है तो वह पूरी प्रक्रिया और वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देश पर ही हुई है।सोमवार के घटनाक्रम से वरिष्ठ नेतृत्व भी अवगत हो गया है। मैं 14 मई को ग्वालियर आकर सभी से संवाद करूंगा।मामला निर्विवाद रूप से निपट जाएगा।

हमने हकीकत बयां की हैः शिवहरे

पूर्व मेला उपाध्यक्ष वेद प्रकाश शिवहरे ने कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति सवालों के घेरे में है, इसीलिए सोमवार को मंगल वाटिका में लगभग 40 नेताओं ने बैठक कर हस्ताक्षर युक्त पत्र वरिष्ठ नेतृत्व को दिया है। इसमें सच्चाई बयां की गई है।

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