स्मार्ट सिटी का ‘स्मार्ट’ खेल मैदान बना नशे और जुए का अड्डा, खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर

स्मार्ट सिटी का ‘स्मार्ट’ खेल मैदान बना नशे और जुए का अड्डा, खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर
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ग्वालियर में स्मार्ट सिटी के सपनों की एक और परत उतर गई है। जिस छत्री मंडी खेल मैदान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए “स्मार्ट खेल मैदान” के रूप में विकसित किया गया था, वही मैदान आज नशा, जुआ और असामाजिक गतिविधियों का ठिकाना बनता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि खिलाड़ी और अभिभावक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

कभी हॉकी की नर्सरी, आज बदहाली की पहचान

छत्री मंडी खेल मैदान को ग्वालियर में हॉकी की नर्सरी माना जाता रहा है। एक समय ऐसा था जब रोज़ाना 100 से ज्यादा जूनियर और सीनियर खिलाड़ी यहां अभ्यास के लिए पहुंचते थे। मैदान का दायरा बड़ा होने के कारण हर उम्र के लोग यहां खेल और फिटनेस गतिविधियों से जुड़े रहते थे।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यहां हॉकी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, कबड्डी और बास्केटबॉल के अलग-अलग कोर्ट बनाए गए। जॉगिंग ट्रैक, शौचालय और पीने के पानी के लिए वाटर कूलर भी लगाए गए। लेकिन आज वही मैदान स्मार्ट सिटी की विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है।

शाम ढलते ही जमावड़ा, डर के साये में खेल

स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का कहना है कि शाम होते ही मैदान में असामाजिक तत्वों की भीड़ जमा होने लगती है। खुलेआम जुआ खेला जाता है, गांजा और शराब का सेवन होता है। कई बार बच्चों को डर के कारण बिना अभ्यास किए ही मैदान छोड़कर लौटना पड़ता है।मैदान में शराब पीते युवकों, ओपन जिम में फैली अव्यवस्था और पार्क में जुआ खेलते लोगों के दृश्य अब आम हो चले हैं। सवाल यह है कि क्या यही स्मार्ट सिटी की परिकल्पना थी?

स्मार्ट सिटी के दावों की खुलती पोल

मैदान में बने शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। गंदगी, बदबू और टूटी-फूटी सुविधाएं देखकर किसी का भी इस्तेमाल करने का मन नहीं करेगा। वहीं, मैदान में लगाया गया वाटर कूलर पिछले पांच महीनों से बंद पड़ा है। न स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को इसकी चिंता है, न नगर निगम को। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मैदान का गारंटी पीरियड खत्म होते ही रखरखाव पूरी तरह बंद कर दिया गया। पहले रात में सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात रहते थे, लेकिन अब अंधेरा होते ही मैदान भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।

परिषद की बैठक में भी उठा मुद्दा

इस गंभीर स्थिति को लेकर क्षेत्रीय पार्षद मोहित जाट ने नगर निगम परिषद की बैठक में सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस मैदान में बच्चों का भविष्य बनना चाहिए, वहां आज जुआ और नशा फल-फूल रहा है। इससे खिलाड़ियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि इस लापरवाही का सीधा फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

कुछ दिन पहले मंदिर में हो चुकी है चोरी

कुछ दिन पहले छत्री मैदान के पास स्थित रोकड़िया सरकार हनुमान मंदिर में चोरी की घटना भी सामने आई थी। बताया जा रहा है कि रात के समय नशा करने वाले असामाजिक तत्वों ने ही संभवतः इस चोरी को अंजाम दिया है। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई खुलासा नहीं हो पाया है।

इनका कहना है

इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा,

“आपके द्वारा यह जानकारी संज्ञान में लाई गई है। यदि वहां कोई असामाजिक तत्व या नशा करने वाले जमा होते हैं, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।”

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