लॉकडाउन में अस्पतालों में घटी ओपीडी, कम संख्या में भर्ती किए मरीज

लॉकडाउन में अस्पतालों में घटी ओपीडी, कम संख्या में भर्ती किए मरीज
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-संक्रमण के खतरे से अस्पताल पहुंचाने में कतराने लगे हैं लोग

ग्वालियर, न.सं.। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए देशभर में जहां लॉकडाउन लागू किया गया हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद अस्पतालों में मरीजों की संख्या में काफी गिरावट देखी गई है। अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल की बात करें तो यहां ओपीडी में प्रतिदिन करीब 3000 मरीज जांच के लिए पहुंचते थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण अस्पतालों में 70 प्रतिशत मरीजों की संख्या घटी है। इसके अलावा अन्य शासकीय अस्पतालों में भी ओपीडी घटकर 50 से 70 फीसदी तक हो गई है। कहीं न कहीं लोगों में अभी भी कोरोना का भय है।

मरीजों की संख्या कम होने के पीछे प्रमुख कारण यह बताया जा रहा है कि जो लोग अन्य राज्यों व जिलों से जयारोग्य में उपचार के लिए पहुंचते थे, वह बहुत कम संख्या में अस्पताल पहुंचे। इसके अलावा अस्पतालों की ओपीडी में पूरी तरह बंद करते हुए सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी गईं। जिस कारण छोटी-मोटी बीमारी के लिए मरीजों ने टेलीफोनिक परामर्श लेकर दवाइयां ली। जबकि कई ने तो मेडिकल से दवा लेकर उपचार किया। इतना ही नहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में भी बहुत ज्यादा कमी आई है। इसका प्रमुख कारण यह भी बताया जा रहा है कि अस्पतालों में सिर्फ गम्भीर मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है।

यह है जयारोग्य की ओपीडी की स्थिति

- आंकाडों के अनुसार जयारोग्य चिकित्सालय की ओपीडी में जनवरी में 67,404 मरीज उपचार के लिए पहुंचे।

- फरवरी में यह आंकड़ा 73,393 हुआ।

- मार्च में मरीजों की संख्या घटकर 55,276 पहुंच गई।

- अप्रैल में 10,666 मरीज उपचार के लिए पहुंचे।

-10 मई तक सिर्फ 7,573 मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं।

भर्ती मरीजों की स्थिति-

- जनवरी में मेडिसिन विभाग में 1546, सर्जरी में 484, ईएनटी 50, आर्थोपेडिक 120, गायनिक 1370, न्यरोलॉजी/न्यरोसर्जरी में 561, ह्दय रोग विभाग में 560, पीडियाट्रिक में 408, कैंसर में 285, ट्रॉमा में 524, कैजुअल्टी में 10 सहित विभिन्न विभागों में सिर्फ 6,321 मरीजों को भर्ती किया गया।

- फरवरी में मेडिसिन विभाग में 1191, सर्जरी में 601, ईएनटी 110, आर्थोपेडिक 110, गायनिक 1278, न्यरोलॉजी/न्यरोसर्जरी में 582, ह्दय रोग विभाग में 559, पीडियाट्रिक में 488, कैंसर में 315, ट्रॉमा में 582, कैजुअल्टी में 13, सहित विभिन्न विभागों में सिर्फ 6304 मरीजों को भर्ती किया गया।

- मार्च माह में मेडिसिन विभाग में 722, सर्जरी में 289, ईएनटी 40, आर्थोपेडिक 47, गायनिक 721, न्यरोलॉजी/न्यरोसर्जरी में 316, ह्दय रोग विभाग में 304, पीडियाट्रिक में 264, कैंसर में 197, ट्रॉमा में 374, कैजुअल्टी में 1 सहित विभिन्न विभागों में सिर्फ 3471 मरीजों को भर्ती किया गया।

- अप्रैल में मेडिसिन विभाग में 21, सर्जरी में 85, ईएनटी 8, आर्थोपेडिक 1, गायनिक 705, न्यरोलॉजी/न्यरोसर्जरी में 255, ह्दय रोग विभाग में 237, पीडियाट्रिक में 131, कैंसर में 41, ट्रॉमा में 211, कैजुअल्टी में 2, सहित विभिन्न विभागों में सिर्फ 1781 मरीजों को भर्ती किया गया।

- 10 मई तक जयारोग्य के मेडिसिन विभाग में 13, सर्जरी में 50, ईएनटी 3, आर्थोपेडिक 23, गायनिक 263, न्यरोलॉजी/न्यरोसर्जरी में 88, ह्दय रोग विभाग में 98, पीडियाट्रिक में 64, कैंसर में 49, ट्रॉमा में 125, कैजुअल्टी में शून्य एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। विभिन्न विभागों में सिर्फ 799 मरीजों को भर्ती किया गया।

प्रसव भी हुए कम-

इसी तरह कमलाराजा अस्पताल के गायनिक विभाग में गर्भवती महिलाओं के प्रसव की बात करें तो यह आंकड़ा भी बहुत कम रहा। जनवरी माह में 956 बच्चों ने जन्म दिया। फरवरी में 809, मार्च में 806, अप्रैल में 667 और मई में अभी तक कुल 373 बच्चों ने जन्म दिया है। इसका भी यही कारण रहा कि अन्य शहरों से ग्वालियर में गर्भवती महिलाएं कमलाराजा अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पाईं। इसके अलावा यहां पर प्रसव कराने से परिजन व महिलाएं कतराती रहीं। विशेष परिस्थितियों में भी प्रसूताओं को लेकर परिजन यहां पहुंचे।

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