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उद्यानों, परिसरों में जाना बंद हुआ तो आंगन, छतों व कक्षों को बनाया योग केन्द्र

उद्यानों, परिसरों में जाना बंद हुआ तो आंगन, छतों व कक्षों को बनाया योग केन्द्र
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ग्वालियर, न.सं.। कोरोना संक्रमण के चलते सार्वजनिक स्थल, पार्कों, खेल मैदान आदि जगहों पर लोगों का प्रवेश बंद है। सेहत की खातिर नियमित पार्क में जाने वाले लोग लॉकडाउन के दौरान घर या छत पर ही ऑनलाइन योगाचार्यों के निर्देशन में परिवार के साथ योगाभ्यास, ध्यान व प्राणायाम कर रहे हैं। कोरोना जैसी महामारी के बीच लोगों का योग के प्रति रुझान बढ़ा है। लॉकडाउन के दौरान लोगों ने अपने घरों में रहकर योग किया और कई रोगों पर काबू पाया है। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक इस बार योग को लेकर गंभीरता दिखाई है। योग प्रशिक्षक मोनिका जैन बताती हंै कि कोरोना महामारी में योग के द्वारा प्रतिरोध क्षमता बढ़ाई जा सकती है, जिसमें वज्रासन, मूंडूकासन, कुर्मासन, वक्रासन, सूर्य नमस्कर का अभ्यास करें।

हर रोज बेटे के साथ घर पर करता हूं योग

अपराध शाखा के डॉ नितिन पाठक बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान रोज घर पर योग कर रहे हंै और घर के सदस्यों को भी योग करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि योग करता देख उनका बेटा भी अब सुबह योग करने लगा है। योग के माध्यम से रोग से लडऩे की क्षमता पैदा की जा सकती है। योग को एक बार फिर लोगों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा।

ऑनलाइन देखते हैं वीडियो फिर सीखते हैं बारीकियां

लॉकडाउन के कारण अब निकलना नहीं हो पा रहा। योगाचार्यों के निर्देशन में मोबाइल या लैपटॉप से घरों की छत पर परिवार के साथ नियमित योगाभ्यास, ध्यान व प्राणायाम कर रहे हैं। विप्रा ब्राम्हण महिला मंच की प्रतिभा चौधरी बताती हैं कि वे रोज सुबह 6 से 7 बजे तक घर के आंगन में योग करती हैं। हमें योग को अपनी दिनचर्चा में शामिल करना होगा तो हमारा सकारात्मक दिशा में जाएगा और हम प्राकृति से जुड़ेंगे। योग करने से हम निरोगी रह सकते हैं। इसलिए हम सब को योग करना चाहिए।


Updated : 2020-06-24T14:31:54+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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