कर्मचारियों को दिलवाया 300 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता

कर्मचारियों को दिलवाया 300 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता
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ग्वालियर/न.सं.। मिस-हिल शिक्षा समिति ग्वालियर के अध्यक्ष भिण्ड जिले के दबोह में जन्मे एस.पी. शर्मा एक बहुमुखी प्रतिभा एवं दृढ़ इच्छाशक्ति को सार्थक करने वाले श्रेष्ठ व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने भारत सरकार में रहते हुए महत्वपूर्ण दायित्वों पर अपनी जिम्मेदारियों को बहुत ही ईमानदारी से निभाया है। श्री शर्मा ने अपनी शिक्षा हाईस्कूल भिण्ड, बी.ए. एमएएलएलबी जीवाजी विश्वविद्यालय एवं डबल एमए कानपुर विश्वविद्यालय से पूरी की।

स्वदेश से चर्चा करते हुए श्री शर्मा ने बताया कि वह कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, श्रम कल्याण मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय सहित कई विभागों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 1985 से 1989 तक कानपुर में एवं 1989 से 1995 तक शहरी विकास मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ रहते हुए और यहीं से सेवानिवृत्त हुए। श्री शर्मा सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 1995 में सर्वोच्च न्यायालय से अपनी वकालात शुरू की। श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने रोडवेज का क्लोजर भारत सरकार से रूकवाया एवं सैकड़ों कर्मचारियों को 1998 से अभी तक का महंगाई भत्ता लगभग 300 करोड़ रुपए दिलवाया। वर्ष 2009 से मिस हिल स्कूल से जुड़ गए। मिसहिल स्कूल में आप प्रशासनिक सदस्य एवं सचिव भी रहे। श्री शर्मा ने बताया कि हमारी टीम संस्थान के लिए बहुत ही ईमानदार है। जिसके बल पर संस्थान की लड़ाई हम न्यायालय से जीतकर आए। मिस हिल स्कूल समिति के सचिव सरनाम सिंह तोमर, सहायक सचिव अर्जुन सिंह भदौरिया, उपाध्यक्ष डॉ. ओ.एन. कॉल एंव प्राचार्य एस.पी. सिंह यह सब पूर्ण रूप से संस्थान के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं जिससे संस्थान प्रगति पथ पर अग्रसर है। मिस हिल स्कूल वर्ष 1921 से शुरू हुआ था। मिसहिल ग्वालियर ही नहीं वर्तमान में मध्यप्रदेश का पहला विद्यालय है, जहां हमने रोबोटिंग कक्षाएं शुरू की हैं। स्कूल प्राइड ऑफ ग्वालियर के नाम से जाना जाता है। स्कूल के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर रोबोटिंग प्रतियोगिता में आईआईटी, बीएचयू में विद्यालय का परचम लहाराया है। श्री शर्मा ने संदेश देते हुए कहा कि ईमानदारी और अच्छे कार्य में की हुई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और निश्चित रूप सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने मेहनत और भाग्य पर विश्वास जताते हुए कहा कि हमें जो भी मिलता उसमें भाग्य का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। ईश्वर जो हमें देता है, उसमें ही संतोष करना चाहिए।

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