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दर्द से तड़पती रही बच्ची, नहीं किया भर्ती, कहा : केआरएच ले जाओ

दर्द से तड़पती रही बच्ची, नहीं किया भर्ती, कहा : केआरएच ले जाओ
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रात में उकड़ने लगती हैं आपात सेवाएं

ग्वालियर/न.सं.। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो रही हैं। अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं की सांसें रात में उकड़ने लगती हैं। चिकित्सक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। फिर चाहे बात सिविल, जिला अस्पताल या फिर प्रसूती गृह की ही क्यों न हो।

जिस कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्थाओं को सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिसका एक मामला शुक्रवार की देर रात सामने आया, जब सिविल अस्पताल में अपनी भतीजी को उपचार के लिए लेकर पहुंचे शैलेन्द्र तोमर इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक अभिषेक दीक्षित से गुहार लगाते रहे और चिकित्सक ने अन्य अस्पताल में ले जाने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। हजीरा निवासी शिवानी तोमर के पेट में तेज दर्द होने के साथ ही उल्टी व दस्त हो रहे थे। इस पर शैलेन्द्र तोमर अपनी भतीजी शिवानी को शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे हजीरा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि चिकित्सक ड्यूटी रूम में सो रहे हैं। इस पर उन्होंने जब चिकित्सक से अपनी भतीजी को देखने के लिए कहा तो उन्होंने यह कहते हुए लौटा दिया कि उनके पास कोई महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, इसलिए बच्ची को कमलाराजा अस्पताल ले जाएं। जबकि बच्ची की स्थिति इतनी खराब हो रही थी कि वह दर्द से तड़प कर जमीन पर लेट गई। इतना ही नहीं शिवानी के चाचा ने जब चिकित्सक से शिवानी को केआरएच तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की बात कही तो चिकित्सक ने बताया कि उनके पास एक की ड्रायवर है और वह भी ड्यूटी पर नहीं है। इस दौरान शैलेन्द्र 11 बजे तक परेशान होते रहे और फिर थक हार कर मजबूरन अपनी ही गाड़ी से बच्ची को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे और भर्ती कराया।

मंत्री तक पहुंची शिकायत

बच्ची को तड़पता देख जब शैलेन्द्र ने मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को फोन लगाया और पूरे मामले की जानकारी दी तो उन्होंने भी यह कहते हुए टाल दिया कि रात को कहीं आप इलाज करा लें, सुबह जाकर अस्पताल की खबर लेता हूं।

इनका कहना है

''बच्ची को प्राथमिक उपचार दिया जाना चाहिए था, ऐसा क्यों नहीं किया गया। इस मामले की जानकारी लेता हूं। यह घोर लापरवाही है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।''

-डॉ. प्रशांत नायक, प्रभारी सिविल अस्पताल

Updated : 2019-03-24T00:21:45+05:30

Naveen

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