26 दिन बाद उठना थी बेटी की डोली, बिखरे सपने

26 दिन बाद उठना थी बेटी की डोली, बिखरे सपने
X

बाजार से मां के साथ कर रही थी खरीदारी सिरफिरे पिता ने उतारा मौत के घाट

ग्वालियर/न.सं.जिस घर से 26 दिन बादशहनाईयों की गूंज के बीच बेटी की डोली उठना थी, उस घर से मां-बेटी और पिता की अर्थियां निकल रही थी। दरिंदे पिता ने पहले पत्नीी और बेटी की बेरहमी से हत्या की। उसके बाद स्वयं ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से डबरा में त्यौहार के दिन सनसनी फैल गई और हर कोई मृतक की करतूत पर उसे कोस रहा था।


निजी विद्यालय में पढ़ाकर परिवार के खर्चे में हाथ बटाने वाली प्रगति गोस्वामी का 26 अप्रैल को विवाह होने वाला था। प्रगति स्वयं मां मीनाक्षी के साथ इन दिनों बाजार में विवाह की खरीदारी कर रही थी। दिन रात मेहनत करके मां मीनाक्षी आंगनवाड़ी में काम करके बेटी के विवाह के लिए पैसा जोड़ रही थी तो वहीं स्वयं प्रगति भी अपने विवाह को लेकर उत्साहित थी कि अब वह पिता की प्रताडऩा से जल्दी ही मुक्त होकर पति के घर ससुराल चली जाएगी। प्रगति के विवाह की तैयारियों के चलते वह बाजार से सामान भी खरीद लाई थी। लेकिन पत्नी मीनाक्षी और बेटी प्रगति से नशा करने के लिए हर रोज पैसा मांगने वाले ब्रजमोहन ने मां-बेटी के सपने को पलभर में बिखेर दिया। गुरुवार की दरिम्यानी रात को एक बार फिर ब्रजमोहन शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा। मां-बेटी ने पैसे देने से इंकार कर दिया। ब्रजमोहन उस समय कुछ नहीं बोला और सोने का बहाना लेकर चला गया। मां-बेटी एक ही बिस्तर पर सो रही थी। देर रात को ब्रजमोहन चुपके से उठा और दस किलो करीब बजनी सरिया लाया और सोते हुए मीनाक्षी और प्रगति पर ताबड़तोड़ प्रहार करते हुए हत्या कर दी। बताया गया है कि हत्यारे ब्रजमोहन ने मां-बेटी को रजाई से सिर भी बाहर निकालने का मौका नहीं दिया और बिस्तर पर ही ढ़ेर कर दिया। इसके बाद स्वयं दूसरे कमरे गया और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रगति के ससुराल विदा होने से पहले जो उसने हाथों में मेंहदी लगाकर पिया के घर जाने के सपने संजोए थे वह अपने ही पिता के हाथों बिखर गए। इस जघन्य हत्याकांड के चर्चे पूरे डबरा शहर में हर गली मौहल्लों में हो रहे थे।

बेटी लेती थी मां का पक्ष

मीनाक्षी ने प्रगति और राज को बड़ी ही मेहनत से काम करके पाला था। प्रगति ने जब होश संभाला तो वह भी एक स्कूल में पढ़ाने जाने लगी और मां का बराबरी से हाथ बटाने लगी। जब भी पिता ब्रजमोहन शराब पीकर मां मीनाक्षी से लड़ता था तो प्रगति सामने खड़ी हो जाती थी और मां का पक्ष लेकर पिता की करतूत का विरोध करती थी।

बेटे को भेज दिया था नाना के यहां

मैकेनिक का काम करने वाले ब्रजमोहन की करतूत से तंग आकर मीनाक्षी ने कलेजे के टुकड़े बेटे राज 12 वर्ष को नाना के यहां पर भेज दिया था। राज मां और बहन से मिलने के लिए होली पर भी इसलिए नहीं आया था कि पिता के आंतक से वह परेशान था।

इनका कहना है

''मां-बेटी की हत्या और स्वयं ब्रजमोहन द्वारा आत्महत्या करने के मामले में मर्ग कायम कर लिया है। मां-बेटी की हत्या का आरोपी शराबी था और गृहक्लेश करता था। इस मामले की जांच की जा रही है। ''

-देवेन्द्रसिंह कुशवाह, एसडीओपी डबरा

Next Story