ग्वालियर: टाइगर के बदले गांधी प्राणी उद्यान में आएंगे नए मेहमान

चिंपांजी, भेड़िया और बारहसिंघा लाने की तैयारी
ग्वालियर: अब गांधी प्राणी उद्यान में घूमने आने वाले सैलानियों को जल्द ही कुछ नए और आकर्षक वन्य प्राणी देखने को मिल सकते हैं। चिड़ियाघर के विस्तार के बाद खाली हो रहे हिस्सों को भरने के लिए नगर निगम ने नए वन्य प्राणियों को लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरीसृप और पक्षियों को नई विकसित जगह पर स्थानांतरित किए जाने के बाद पुराने परिसर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा, जहां अब नए प्राणियों को रखा जाएगा।
गांधी प्राणी उद्यान प्रबंधन ने इस बार ऐसे वन्य प्राणियों को लाने का निर्णय लिया है, जो देश के अन्य चिड़ियाघरों में दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहते हैं। प्रस्तावित सूची में चिंपांजी, भेड़िया और बारहसिंघा (स्वैम्प डियर) शामिल हैं। इन प्रजातियों के आने से न सिर्फ चिड़ियाघर की विविधता बढ़ेगी, बल्कि पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
फिलहाल गांधी प्राणी उद्यान में एक भेड़िया मौजूद है, लेकिन मादा भेड़िया नहीं होने के कारण प्रजाति का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए पुणे और जयपुर के चिड़ियाघरों से संपर्क किया गया है। वहीं बारहसिंघा के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू से बातचीत चल रही है, जहां यह प्रजाति उपलब्ध है।
दक्षिण भारत के चिड़ियाघरों में मौजूद है चिंपांजी
चिंपांजी को लेकर सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) से दिशा-निर्देश लिए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार दक्षिण भारत के कुछ चिड़ियाघरों में चिंपांजी मौजूद हैं। वहां से नियमानुसार विनिमय प्रक्रिया के जरिए इन्हें ग्वालियर लाने की कोशिश की जा रही है। वन्य प्राणियों के स्थानांतरण में विनिमय यानी अदला-बदली की परंपरा अपनाई जाती है।
बता दें कि पिछली बार नगर निगम ने बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जू से एक टाइगर के बदले लोमड़ी, भालू, जंगली सूअर और लंगूर प्राप्त किए थे। पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई थी। अब प्रबंधन का प्रयास है कि इस बार भी एक टाइगर के बदले कम से कम तीन नए वन्य प्राणी गांधी प्राणी उद्यान में लाए जा सकें।
