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कमलनाथ ही हैं नेता प्रतिपक्ष: भनोत

ग्वालियर विधानसभा की बैठक

कमलनाथ ही हैं नेता प्रतिपक्ष: भनोत
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ग्वालियर, विशेष प्रतिनिधि। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री एवं तरुण भनोत ने आज स्पष्ट किया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ही हैं। इसे लेकर अब तक जो दूसरे नामों का भ्रम पैदा किया गया था, वह भाजपा का षड्यंत्र था।

भनोत ग्वालियर विधानसभा के प्रभारी की हैसियत से शनिवार को कांग्रेस कार्यालय पर बैठक लेने आए थे। इस दौरान पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं, इसलिए वे ही नेता प्रतिपक्ष भी हैं। नेता प्रतिपक्ष के लिए डॉ गोविंद सिंह, एनपी प्रजापति सहित अन्य नामों के सवाल पर उन्होंने कहा कि इन नामों को भाजपा ने षड्यंत्र के तहत चलवा दिया था। सिंधिया के राज्यसभा चुनाव जीतकर ग्वालियर चंबल में चुनौती के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनौती की कोई बात नहीं है, उनकी अपनी विचारधारा है और हमारी अपनी विचारधारा एवं संगठन है। राज्यसभा प्रत्याशी फूलसिंह बरैया को द्वितीय वरिष्ठता पर रखकर अपमान के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस समय राज्यसभा चुनाव की घोषणा हुई थी, उस समय हमारे पास 123 मत थे। फिर बहुमत को खरीदने का काम किसने किया। बरैया की राह में कांटा कौन बना। ग्वालियर विधानसभा से दावेदारों के नाम पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरे पास अभी किसी का नाम नहीं आया है। वैसे भी मैं यहां टिकट बांटने नहीं आया, कमलनाथ सर्वे करा रहे हैं, वही नाम तय करेंगे। अच्छी बात यह है कि हर कार्यकर्ता अपने आप को दावेदार मान रहा है।

सुनील और अशोक के नारे न लगाएं

इसके पहले ग्वालियर विधानसभा की बैठक के दौरान व्यक्तिगत नारे लगाए जाने पर श्री भनोत ने हंगामा कर रहे कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सुनील और अशोक के नाम के नारे न लगाएं। यहां व्यक्ति नहीं पार्टी चुनाव लड़ती है। फिर उन्होंने व्यक्ति और कांग्रेस के नाम पर कार्यकर्ताओं से हाथ भी उठवाए।उन्होंने कहा कि यह चुनाव विकास करने वाली कांग्रेस और दलबदल करने वाली भाजपा के बीच है। अब समय आ गया है कि जिन लोगों ने खरीद-फरोख्त के जरिए कांग्रेस की सरकार गिराई, ऐसे दगाबाजों को माफ नहीं किया जाए। यह वही दल बदलू हैं जो कांग्रेस की सरकार में बड़ी-बड़ी बातें करते थे और अब भाजपा के बीच पहुंचकर बोलती बंद है। ऐसे लोगों ने चंबल की माटी को कलंकित किया है, इन्हें हराना ही होगा।

कार्यकारी अध्यक्षों को नहीं मिली कुर्सी

पिछले दिनों चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए थे जिनका बढ़-चढ़कर स्वागत भी हुआ किंतु आज इस बैठक के दौरान उन्हें कुर्सी तक नहीं मिली,वे खड़े ही रहे।

शील खत्री ने कराया हंगामा

स्वागत के नाम पर शील खत्री ने अपने समर्थकों को बुलाकर नारेबाजी शुरू कर दी,जिससे वहां मौजूद मीडिया कर्मी भड़क गए। जिसपर तरुण भनोत पर भी जवाब देते नहीं बना।

यह रहे मौजूद

बैठक में विधायक विनय सक्सेना, नीलेश अवस्थी, प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह, शहर जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा, रामसेवक बाबूजी, सुनील शर्मा, अशोक शर्मा, चंद्रमोहन नागोरी, रश्मि पवार शर्मा, अशोक प्रेमी,हैवरन कंसाना आनंद शर्मा, इब्राहिम पठान, वीरेंद्र तोमर आदि मौजूद रहे।

Updated : 2020-06-24T14:31:16+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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