कर्मचारियों ने फेंकी पीपीई किट, स्ट्रेचर न होने से जमीन पर गिरा शव

ग्वालियर, न.सं.। जिले में कोरोना संक्रमितों के बढ़ते मामलों के बीच फिर से एक संक्रमित की मौत हुई है। जिसका विद्युत शव गृह में अंतिम संस्कार कराया गया। लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते संक्रमित के दाह संस्कार में फिर से परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल से शव लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने शव नहीं उठाया, जिस कारण करीब एक घंटे देरी से अंतिम संस्कार हो सका।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव के साथ दो कर्मचारियों को पीपीई किट पहना कर मुक्तिधाम पहुंचाया गया था। लेकिन कर्मचरियों ने शव को एम्बुलेंस से उतारने से इंकार कर दिया और अपनी पीपीई किट उतारकर फेंक दी। कर्मचरियों का कहना था कि शव को उतारने की जिम्मेदारी नगर निगम के कर्मचारियों की है, उन्हें तो यहां तक शव पहुंचाने के लिए कहा गया था। जिस पर उपायुक्त डॉ. अतिबल सिंह यादव ने जयारोग्य अस्पताल प्रबंधन को मामले से अवगत कराया। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों को फोन पर फटकार लगाई। जिसके बाद श्री यादव ने कर्मचारियों को दोबारा किट पहनाई और शव उतरवाया गया। लेकिन शव गृह व एम्बुलेंस में स्ट्रेचर न होने के कारण शव नीचे गिर पड़ा। इसके बाद लकड़ी की सहायता से शव को उठा कर विद्युत शव गृह में रखा गया, तब जाकर दाह संस्कार हो सका।
मंगलवार से रक्तचाप हो रहा था कम
सुपर स्पेशलिटी में राजकुमार का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि गत दिवस मंगलवार से ही उनका रक्तचाप बहुत कम आ रहा था और शुक्रवार की सुबह रक्तचाप कम होने के कारण उनकी मृत्यु हुई। राजकुमार के परिजनों ने बताया कि दिल्ली से उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया था कि कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उनका लीवर ट्रांसप्लांट किया जाएगा। लेकिन अगर उन्हें उपचार मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
यह भी हार चुके कोरोना से जंग
- जिले में सबसे पहले डबरा निवासी कोरोना संक्रमित मरीज गंगाराम रोहिरा को उपचार के लिए जयारोग्य के आईसोलेशन में भर्ती किया गया था। जहां उपचार के दौरान 10 मई को उनकी मौत हो गई थी। जिनका अंतिम संस्कार रिपोर्ट आने के बाद विद्युत शव गृह में किया गया था।
- इसी तरह डबरा निवासी 104 की वृद्धा देवा बाई को कोरोना की पुष्टि होने के बाद उपचार के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां 23 मई को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था।
