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जीवाजी विवि को दो साल बाद मिला कुलाधिसचिव

कार्यपरिषद में प्रो. डी.डी. अग्रवाल के नाम पर बनी सहमति

जीवाजी विवि को दो साल बाद मिला कुलाधिसचिव

ग्वालियर, न.सं.। कोरोना संकट के बीच जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में मंगलवार को कार्यपरिषद की बैठक हुई। बैठक में डीसीडीसी प्रो. डी.डी. अग्रवाल को कुलाधिसचिव बनाए जाने पर सर्वसम्मति बनी। दो साल बाद विवि को नया कुलाधिसचिव मिलने जा रहा है। प्रो. आर.जे. राव के बरकतउल्ला विवि का कुलपति बनने के बाद से यह पद खाली था, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

बैठक में कई अन्य निर्णय भी हुए।

बैठक में प्राचार्यों की नियुक्ति व सुविधाएं न जुटाने वाले निजी महाविद्यालयों का मुद्दा उठा। जिसमें तय हुआ कि इस संबंध में महाविद्यालयों से शपथ पत्र लिया जाए कि वह स्टाफ की नियुक्ति व सुविधाओं की पूर्ति करने के बाद विवि को सूचित करेंगे। यदि निर्देश के बाद भी विवि ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी बीस प्रतिशत सीट संख्या कम कर दी जाएंगी। बैठक में तय हुआ कि कोरोना सहित अन्य आवश्यकताओं को देखते हुए अब विश्वविद्यालय की एम्बुलेंस को स्वास्थ्य केन्द्र और कन्या छात्रावास के बीच रखा जाएगा। बैठक में परीक्षाओं का विषय भी सामने आया, जिसमें तय हुआ कि शासन के जो दिशा-निर्देश होंगे उस पर अमल किया जाएगा। वहीं कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराए जाने पर चर्चा हुई। बैठक में कार्यपरिषद सदस्य प्रो. नीरज जैन, प्रो. आरपी पांडेय, प्रो. अविनाश तिवारी, प्रो. एके हलवे, डॉ. रश्मि कुजूर, डॉ. मुनेंद्र सोलंकी, अनूप अग्रवाल, वीरेंद्र गुर्जर और उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. एम.आर. कौशल मौजूद रहे।

ठेका देने के लिए होती है बैठक, कार्यपरिषद को करें भंग

कार्यपरिषद की बैठक के समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विवि का घेराव कर हंगामा-प्रदर्शन किया। उन्होंने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि कार्यपरिषद की बैठक में किसे ठेका देना, किसे पैसा देना है इस पर चर्चा होती है। छात्रहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं होती। ऐसी कार्यपरिषद को तत्काल भंग किया जाए। वहीं उन्होंने कहा कि चाहे सामान्य परीक्षा हो या पीएचडी की उस पर गंभीर सवाल उठते हैं। अधिकारियों पर छात्रों को पास कराने के आरोप लगते हैं। यहां आने वाले छात्रों को परेशानियों झेलनी पड़ती हैं। इन सबके लिए कुलपति जिम्मेदार हैं। उन्हें संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

बैठक में यह हुए निर्णय

  • विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा के संबंध में कुलपति द्वारा एक समिति गठित की जाएगी।
  • विभागाध्यक्षों को मिलने वाली इंप्रेस्ट मनी एक हजार की जगह पांच हजार करने पर विचार हुआ।
  • रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर की तरह उपयंत्री, लैब टेक्नीशियन कर्मचारियों को भी वेतनमान प्रदान करने के संबंध में कुलसचिव, वित्त नियंत्रक और उप कुलसचिव प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
  • अब विश्वविद्यालय के विभागों और रिकॉड्र्स का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
  • नैक के निरीक्षण को देखते हुए प्रो. आरपी पांडेय, प्रो. आर.ए. शर्मा और प्रो. ए.के. हलवे को सेवानिवृति के बाद पुनर्नियुक्ति प्रदान की गई। ये शिक्षक शिक्षण के साथ शोध संबंधी कार्यों को करने पर ध्यान देंगे।

Updated : 2020-07-02T06:38:28+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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