अतिक्रमण की चपेट में वीरपुर, जड़ेरुआ-हनुमान बांध,बारिश में होगी मुसीबत

ग्वालियर,न.सं.। मुरार के जड़ेरुआ और लश्कर में हनुमान बांध समेत अन्य बांधों से प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की शुरुआत नहीं की गई है। जिस कारण बारिश का पानी न तो स्टोरेज हो सकेगा और न ही इन बांधों के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या खड़ी होगी। बीते वर्ष प्रशासन ने सिर्फ वीरपुर बांध से दो बार में 25 अतिक्रमण हटाए हैं और अभी भी वहां ज्यादा अतिक्रमण बचे हैं। अधिकारी हर बार सिर्फ यही दावा करते हंै कि बांधों को अतिक्रमण मुक्त कर लिया जाएगा। साथ ही बारिश का पानी सहेजने के लिए भी प्रयास किएं जाएंगे। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी जलभराव की स्थिति रहेगी।
यह है बांधों की स्थिति
हनुमान बांध
स्वर्ण रेखा हनुमान बांध से शुरू होती है। उक्त बांध के दोनों तरफ प्लॉटिंग कर दी गई है। लोगों ने बांध के डूब क्षेत्र में भी मकान बना दिए, जिससे बारिश के दौरान जलभराव से मकान डूबने लगते हैं, इसके चलते लोग बांध क्षेत्र में बने सीवर चेंबरों को फोड़ देते हैं। इससे पानी बह जाता है।
वीरपुर बांध
बांध की पार पर लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही इसके कैचमेंट क्षेत्र में ईंटों के भट्टे संचालित हो रहे हैं। वहीं बांध के अंदर खेती करने के लिए लोग इसके वॉल्ब को खोलकर पानी बहा देते हैं।
गिरवाई का बांध
यहां पर कई ईंटों के भट्टे संचालित हो रहे हैं। जल भराव से क्षेत्र को बचाने के लिए यहां पर भी वॉल्ब खोलकर पानी को निकाल दिया जाता है।
मामा का बांध
मामा का बांध यह क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है। यहां पर केवल खेती करने के लिए बांध को खाली कर दिया जाता है।
रमौआ बांध
यह बांध मुरार क्षेत्र में हैं जहां से मुरार नदी निकलती है। उक्त बांध पर अतिक्रमण कम है लेकिन खेती करने के लिए इस बांध को भी समय से पहले खाली कर दिया जाता है।
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