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एम्बुलेंस के इंतजार में थमी प्रसूता की सांसे

एम्बुलेंस के इंतजार में थमी प्रसूता की सांसे
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ग्वालियर, न.सं.। अपातकाल स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए सरकार द्वारा जीवन रक्षक कही जाने वाली108 एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। लेकिन अधिकारियों की अंदेखी और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कई लोगों की सांसे एम्बुलेंस के इंतजार में ही थम जाती है। शहर में कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब लोगों को मुसीबत में एम्बुलेंस की जरूरत रही, लेकिन समय पर सुविधा नहीं मिलने के कारण पीडि़त की जान चली गई। ऐसे ही एक मामला शनिवार-रविवार की रात का सामने आया। जब एक प्रसूता दर्द से तड़पती रही और एम्बुलेंस तीन घंटे बाद पहुंची। जिस कारण प्रसूता की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार उटीला स्थित भांगीपुरा गांव निवासी 24 वर्षीय आरती को शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को करीब 2.30 बजे प्रसव पीड़ा उठी। इस पर परिजनों ने रात में ही करीब तीन बजे 108 पर फोन किया। लेकिन एक घंटा बीत जाने के बाद भी एम्बुलेंस नहीं आई तो महिला के पति संजू ने दुबारा 4 बजे फोन कर एम्बुलेंस भेजने की बात कही। लेकिन एम्बुलेंस ठीक तीन ढाई घंटे बाद करीब 5.30 पर पहुंची। इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही। एम्बुलेंस पहुंचते ही परिजनों ने बिना देरी किए आरती को एम्बुलेंस में बैठाया। लेकिन एम्बुलेंस अस्पताल तक पहुंचती, उससे पहले ही आरती की सांसे थम गई। अस्पताल में चिकित्सकों ने एम्बुलेंस में परीक्षण कर बताया कि महिला मौत रास्ते में ही हो चुकी है। इसके बाद चिकित्सक ने शव का शव विच्छेदन कराने के लिए जयारोग्य के लिए रैफर कर दिया। जहां परिजन शव विच्छेदन करा शव को घर लेकर लौट गए।

समय पर आती एम्बुलेंस तो बच जाती जान

महिला के जेठ रामू का कहना है कि दो बार फोन करने के बाद भी एम्बुलेंस समय पर नहीं आई। जबकि आरती को परेशानी ज्यादा हो रही थी। अगर समय पर एम्बुलेंस आती तो उसकी जान बच जाती।

बंद हो जाता है जीपीएस

एम्बुलेंस सेवा के वाहनों पर कई बार सरकारी अस्पतालों की जगह निजी अस्पतालों में ले जाने के आरोप भी लगाए जाते हैं। पीडि़त को एम्बुलेंस में बैठाने के बाद परिजनों को निजी अस्पतालोंं में ले जाने के लिए बरगलाया जाता है। मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं की बात कहकर सरकारी अस्पतालों की जगह निजी अस्पताल ले जाया जाता है।

Updated : 2021-10-12T16:40:15+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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