संगठनों व न्यास ने किए बड़े-बड़े दावे, अब नहीं कर रहे गोवंश का भरण-पोषण

संगठनों व न्यास ने किए बड़े-बड़े दावे, अब नहीं कर रहे गोवंश का भरण-पोषण
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प्रशासन ने सौंपी थी भरण-पोषण की जिम्मेदारी

ग्वालियर, न.सं.। गौशाला में गौमाताओं की दुर्दशा पर आंसू बहाने वाले सामाजिक संगठन, मंदिर और न्यासों को जब जिला प्रशासन ने गोवंश के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सौंपी तो शुरू में दिखावे के लिए गौशाला की देहरी तक गए और उसके बाद गौ माताओं को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया। अब कोई भी संस्था गोवंश को चारा खिलाने नहीं जा रही और न ही सामग्री पहुंचाई जा रही। जबकि अचलेश्वर न्यास, सनातन धर्म मंदिर और सांई बाबा मंदिर न्यास और मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स जैसी संस्थाओं के आग्रह पर ही जिला प्रशासन ने गोवंश के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस बारे में जब संस्थाओं से पूछा गया तो वे तरह-तरह के तर्क देकर इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं।

तत्कालीन जिलाधीश भरत यादव की अध्यक्षता में 8 फरवरी 2019 को जिला स्तरीय गौशाला परियोजना समन्वय समिति की पहली बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में जिलाधीश ने अचलेश्वर न्यास, सनातन धर्म मंदिर और श्री सांई मंदिर न्यास को गोला का मंदिर स्थित मार्क हॉस्पिटल परिसर में बनी नगर निगम की गौशाला में बंद गोवंश के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सौंपी। वही प्रदेश की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था चेंबर ऑफ कॉमर्स को सिरसा घाटीगांव स्थित देवनारायण गोशाला में गायों के पेट भरने का जिम्मा सौंपा था। शुरू में न्यास मंदिर और संगठन गौशाला में गोवंश की सेवा करने के लिए पहुंचे लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे इन संस्थाओं ने गोवंश के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से अपने हाथ पीछे खींच लिए। वहीं मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स तो देवनारायण गौशाला का दरवाजा तक देखने के लिए नहीं पहुंची। जिला स्तरीय गौशाला परियोजना समन्वय समिति की बैठक के बाद संस्थाओं को गोवंश के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सौंपकर प्रशासन ने अपनी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी और उसके बाद यह देखने तक की सुध नहीं ली कि जिन्हें जिम्मेदारी दी गई है वह इस आदेश का पालन कर रहे हैं या नहीं।

दान से मिलेगा सहारा

मॉर्क हॉस्पिटल में रहने वाली गायों को धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं दान में चारा, भूसा, दवाइयां आदि देने लगे तो वहां पर गायों का जीवन बेहतर स्थिति में पहुंच सकेगा।

इन्हें सौंपी थी जिम्मेदारी

चयनित गौशाला चयनित संगठन व न्यास

मार्क हॉस्पिटल गौशाला अचलेश्वर न्यास

सनातन धर्म मंडल

सांई मंदिर न्यास

महुआखेड़ा घाटीगांव खेड़ापति मंदिर न्यास

देवनारायण धाम गौशाला सिरसा मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स

इनका कहना है-

गौशाला के प्रबंधन के लिए तत्कालीन जिलाधीश भरत यादव ने धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को सहयोग के लिए पत्र लिखा था। लेकिन शुरू में कुछ दिन ही धार्मिक संस्थाओं ने सहयोग किया। लेकिन उसके बाद भी कोई भी धार्मिक संस्था गौशाला में सहयोग नहीं कर रही है। गौशाला का संचालन अकेले प्रशासन नहीं कर सकता है, इसमें शहरवासियों के सहयोग की भरपूर जरूरत चाहिए।

-केशव सिंह चौहान

नोडल अधिकारी, लाल टिपारा गौशाला नगर निगम

हम समय-समय पर मार्क हॉस्पिटल की गौशाला में चारा भेजते हैं। हम रोज तो व्यवस्था नहीं कर सकते। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से गौशाला में दान करने के लिए कहते हैं। लॉकडाउन के कारण वैसे भी हालात खराब है। हम खुद कर्मचारियों को बैंक से पैसे निकालकर वेतन दे रहे हैं।

-योगेश शुक्ला

अध्यक्ष, श्री सांई मंदिर न्यास

प्रशासन कुछ नहीं करता है उल्टा दूसरों पर थोप देता है। गांव से गायों को शहर में छोड़ा जा रहा है। व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। हमने गौशाला में चारा भेजा है, अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। लॉकडाउन में हमने गरीबों को खाना वितरित किया। सर्दियों में हमने गायों को कंबल भी उढ़ाए।

हरीदास अग्रवाल

अध्यक्ष, अचलेश्वर न्यास न्यास

मेरी जानकारी में कुछ भी नहीं है। हमें पता ही नहीं है कि गौशाला के भरण-पोषण के लिए न्यास को जिम्मेदारी दी गई है।

कैलाशचन्द्र मित्तल

अध्यक्ष, श्री सनातन धर्म मंडल

गोवंश के भरण-पोषण के लिए जिला प्रशासन व अन्य विभागों से हमारे पास कोई भी पत्र नहीं आया और न ही गौशाला की हमें कोई जिम्मेदारी दी गई है।

-डॉ. प्रवीण अग्रवाल

मानसेवी सचिव, मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स


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