'पराजितों'को 'जीत' का विश्वास...

पराजितोंको जीत का विश्वास...
X

भाजपा-कांग्रेस में विधानसभा चुनाव हारे नेताओं ने की टिकट की मांग

भोपाल/राजनीतिक संवाददाता। प्रदेश में वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। इन नेताओं की हार से पार्टियां भी अनजान थीं, लेकिन चुनाव परिणाम विपरीत आए। अब इन हारे हुए नेताओं ने लोकसभा चुनाव में भी अपनी दावेदारी ठोक दी है। हालांकि इस बार इनकी दावेदारी पर विचार तो किया जा रहा है, लेकिन टिकट ऐसे ही उम्मीदवार को मिलेगी, जो शत-प्रतिशत चुनाव जिताने में सक्षम हो। लेकिन कोशिश सभी की जारी है। भाजपा में इस बार कई वर्तमान सांसदों के टिकट कट सकते हैं, तो वहीं कांग्रेस को भी चुनाव जिताऊ उम्मीदवारों की दरकार है। हालांकि कांग्रेस इस बार अपने सभी दिग्गज नेताओं के भरोसे चुनाव मैदान में हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दिग्गज कांग्रेस की नैय्या पार लगाते हैं या फिर उन्हें सिर्फ दो सीटों से ही संतुष्ट करते हैं।

विधानसभा हारे, अब जीत का दावा

भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव में हारे कई नेता अब लोकसभा चुनाव में जीत का दावा कर रहे हैं और इस जीत के दावे के भरोसे वे टिकट मांग रहे हैं। भीतरवार से विधानसभा चुनाव हारे सांसद अनूप मिश्रा फिर से लोकसभा टिकट की मांग कर रहे हैं। इस बार मुरैना से उनका टिकट कटना तय है। उन्होंने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। इसी तरह भाजपा सरकार में मंत्री रहे जयभानसिंह पवैया, रुस्तम सिंह भी टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। दमोह सीट से पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया दावेदारी ठोक रहे हैं। हालांकि दमोह सीट से प्रहलाद पटेल का टिकट लगभग फाइनल है। यही स्थिति कांग्रेस में है। कांग्रेस में भी विधानसभा चुनाव में कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। इनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, विधानसभा उपाध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत, मुकेश नायक आदि प्रमुख हैं। कांग्रेस अब इन हारे हुए नेताओं को टिकट देकर लोकसभा चुनाव में उतार रही है। अजय सिंह को सीधी से चुनाव लड़ाया जा रहा है तो वहीं रामनिवास रावत मुरैना से उम्मीदवार होंगे। मुकेश नायक को कांग्रेस खजुराहो सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। उनका विधानसभा क्षेत्र भी इसी सीट के अंतर्गत आता है। हालांकि इस बार उन्हें भाजपा के प्रहलाद लोधी ने यहां से चुनाव में पराजित किया था। इसी तरह अरूण यादव को खंडवा से टिकट दिया जा रहा है। अरूण यादव विधानसभा चुनाव में बुधनी से चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें शिवराज सिंह चौहान से बड़े अंतर से हारे मिली थी। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें खंडवा सीट से नंदकुमार चौहान ने भी शिकस्त दी थी।

इन पर टिका पूरा दारोमदार

प्रदेश में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास लौटा जरूर है, लेकिन अब लोकसभा चुनाव में जीत की चुनौती भी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश में 25 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं। इन सीटों पर जीत पक्की करने के लिए वे अपने सभी दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतार भी रहे हैं। हालांकि इस बार वे खुद तो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनके बेटे नकुलनाथ को छिंदवाड़ा सीट से चुनाव लड़ा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल लोकसभा सीट से टिकट मिलना तय माना जा रहा है। गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया का टिकट पक्का है तो ग्वालियर सीट से उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। रतलाम सीट से कांतिलाल भूरिया चुनाव लड़ेंगे तो इंदौर से कांग्रेस को ऐसे उम्मीदवार की तलाश है, जो भाजपा के गढ़ में सेंधमारी करके सुमित्रा महाजन को पराजित कर सके। अब कांग्रेस के इन दिग्गजों को टक्कर देने के लिए भाजपा भी अपने कई सांसदों का टिकट काटकर नए चेहरों को सामने लाएगी। पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा भी अपने दिग्गज नेताओं को कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सामने चुनाव मैदान में उतार सकती है।

बागियों पर भी भरोसा

विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा-कांग्रेस से कई बागियों ने पार्टी छोड़ी थी। इन बागी नेताओं के कारण दोनों ही दलों को नुकसान भी उठाना पड़ा। सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हुआ था। बागी नेताओं के कारण भाजपा को तीन-चार सीटों पर बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। अब इन बागी नेताओं पर भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दांव लगाएगी। कांग्रेस होशंगाबाद से सरताज सिंह को मैदान में उतार सकती है तो दमोह या खजुराहो सीट से रामकृष्ण कुसमरिया का नाम सबसे आगे है। भाजपा भी कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए नेताओं को टिकट दे सकती है।

Next Story