भाजपा की भरी झोली, तो जीत को तरसी कांग्रेस

भाजपा की भरी झोली, तो जीत को तरसी कांग्रेस
X

सतना/राजनीतिक संवाददाता। सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह सांसद हैं, यहां लंबे समय से भाजपा का राज है, इस सीट पर आखिरी बार 1991 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह संसद पहुंचे थे। सतना जिला ऐतिहासिक रूप से बघेलखंड क्षेत्र में आता है। इस पर रीवा राजघराने का शासन था। बौद्ध धर्म की किताब और महाभारत में भी इसका उल्लेख है। इस संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं। साल 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी, उसके बाद साल 1971 में भारतीय जन संघ और 1977 में ये सीट भारतीय लोकदल ने जीती थी, साल 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस का राज रहा, साल 1989 के चुनाव में पहली बार यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। 1991 के चुनाव में यहां अर्जुन सिंह विजयी हुए थे और उसके बाद यहां पर कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है।

2004 से गणेश का बोलबाला

साल 1996 के चुनाव में बसपा ने पहली बार यहां विजय हासिल की थी इसके बाद साल 1998 में यहां भाजपा की वापसी हुई और तब से लेकर अब तक केवल यहां भाजपा का ही राज है। भाजपा के रामानंद सिंह यहां पर दो बार सांसद रहे तो वहीं साल 2004 से यहां भाजपा के कद्दावर नेता गणेश सिंह सांसद हैं।

गणेश का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोस में उनकी उपस्थिति 87 प्रतिशत रही। और इस दौरान उन्होंने 145 डिबेट में हिस्सा लिया और 346 प्रश्न पूछे। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर सपा थी। 57 साल के गणेश सिंह 2014 का लोस चुनाव जीतकर तीसरी बार सांसद बने। उन्होंने निर्भया फंड, पीएम उज्जवला योजना, मेक इन इंडिया प्रोग्राम, नौकरी में आरक्षण जैसे मामलों पर सवाल किया है।

कब्जा जमाने की कवायद

कांग्रेस अब यहां दोबारा कब्जा जमाने के प्लान पर काम तेज कर दिया है, कभी देश के दिग्गज अर्जुन सिंह के कब्जे वाली इस सीट पर बीते डेढ़ दशक से भाजपा का भगवा लहरा रहा है। लोकसभा चुनावों की तैयारी तेज है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार भले ही कांग्रेस ने बनाई है, लेकिन विंध्य इलाके में भाजपा ने उसे करारी मात दी है। विंध्य इलाके की सबसे अहम सीट सतना, जो सीमेंट हब के लिए मशहूर है। लेकिन यहां की राजनीतिक हललच हमेशा से प्रदेश और देश के लिए चर्चित रही है, कभी यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया था, लेकिन अब यहां के राजनीतिक समीकरण कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के अनुकूल है और भाजपा यहां लगातार तीन पर बार से कब्जा जमाए हुए है।

भाजपा का खासा प्रभाव

भाजपा का इस सीट पर खासा प्रभाव है और यहीं कारण है कि बीएसपी ने भाजपा और कांग्रेस के पहले यहां से अपना प्रत्याशी अच्छे लाल कुशवाहा को घोषित कर दिया है। वहीं विधानसभा चुनाव की तरह सांसद के खिलाफ भी इस बार स्थानीय नाराजगी साफ दिख रही है।

इस बार भाजपा के दावेदार

सांसद: गणेश सिंह

♦ महापौर: ममता पाण्डेय

♦ मैहर विधायक: नारायण त्रिपाठी

♦ पूर्व विधायक: शंकर लाल तिवारी

♦ पूर्व जिला अध्यक्ष: रामदास मिश्रा

♦ पूर्व पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य: लक्ष्मी यादव

♦ वरिष्ठ नेता: मनसुख पटेल, अरूण द्विवेदी

इस बार कांग्रेस के दावेदार

♦ पूर्व नेता प्रतिपक्ष: अजय सिंह

♦ पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष : डॉ. राजेन्द्र सिंह

♦ पूर्व मंत्री: सईद अहमद

♦ पूर्व महापौर: राजाराम त्रिपाठी

♦ जिला पंचायत सदस्य, विधायक पत्नी: प्रीति सिद्वार्थ कुशवाहा

एक नजर राजनीतिक तस्वीर पर...

♦ सतना में पहला लोकसभा चुनाव वर्ष 1967 में हुआ

♦ पहले चुनाव में कांग्रेस के डीवी सिंह को जीत मिली

♦ अगले चुनाव में जनसंघ के नरेंद्र सिंह जीते

♦ 1977- भारतीय लोकदल ने बाजी मारी

♦ 1980- कांग्रेस ने वापसी की और गुलशेर अहमद जीते

♦ 1984- कांग्रेस के अजीज कुरैशी जीते

♦ 1989- भाजपा के सुखेंद्र सिंह सांसद बने

♦ 1991- अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया

♦ 1996- बसपा के सुखलाल कुशवाहा यहां से जीते

♦ 1998- भाजपा ने वापसी की और अब ये सीट उसके के कब्जे में है।

जातीय समीकरण पर नजर

♦ सतना की मतदाता संख्या संख्या 14,47,395 है।

♦ इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,06175 है।

♦ जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6,41220 है।

♦ ब्राहम्ण मतदाता 3 लाख 24 हजार हैं।

♦ क्षत्रिय मतदाता 1 लाख 11 हजार हैं।

♦ पटेल मतदाता 1 लाख 23 हजार हैं।

♦ कुशवाहा मतदाता 1 लाख 13 हजार हैं।

♦ वैश्य मतदाता 65 हजार हैं।

♦ अनुसूचित जाति के 1 लाख 47 हजार मतदाता हैं।

♦ अनुसूचित जन जाति के 1 लाख 37 हजार मतदाता हैं।

♦ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 37 हजार है।

बसपा की भी अहम भूमिका

इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का भी अच्छा खासा प्रभाव है। बसपा इस लोकसभा सीट पर एक बार जीत का स्वाद चख चुकी है, वहीं 2009 के चुनाव में बसपा इस सीट पर दूसरे स्थान पर थी। सतना लोकसभा सीट पर 6 बार भाजपा को, 4 बार कांग्रेस को, 1 बार बसपा को और 1 बार भारतीय जनसंघ को जीत मिल चुकी है। २०१४ के पहले चुनाव यानी 2009 में भी गणेश सिंह को जीत मिली थी। तब उन्होंने बसपा के सुखलाल कुशवाहा को हराया था। गणेश सिंह को इस चुनाव में 1 लाख 94 हजार 624 मत मिले थे तो वहीं सुखलाल कुशवाहा को 1 लाख 90 हजार 206 मत मिले थे।

ये है 2014 का लेखा-जोखा

सतना लोकसभा सीट पर 6 बार भाजपा, 4 बार कांग्रेस, 1 बार बसपा और 1 बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की है। सतना लोकसभा में आने वाली सात विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गणेश सिंह ने अर्जुन सिंह के बेटे व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अजय सिंह को हराया था। इस चुनाव में गणेश सिंह को 3 लाख 75 हजार 288 मत मिले थे, वहीं कांग्रेस के अजय सिंह को 3 लाख 66 हजार 600 मत मिले थे। अजय सिंह की 8 हजार 688 मतों के अंतर से हार हुई थी। इस बार भी अजय सिंह इस सीट से दावेदार हैं, हालांकि विधानसभा चुनाव में हार झेल चुके अजय सिंह का कहना है पार्टी जहां से टिकट देगी वो चुनाव लड़ेंगे।

Next Story