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लोकसभा चुनाव: मालवा-निमाड़ पर टिकी भाजपा और कांग्रेस की नजर

लोकसभा चुनाव: मालवा-निमाड़ पर टिकी भाजपा और कांग्रेस की नजर
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लोकसभा चुनाव का समर शनै:-शनै: जोर पकड़ता जा रहा है। इस दौरान भाजपा ने अपनी पूरी ताकत मालवा-निमाड़ क्षेत्र में झौंक दी है। मालवा-निमाड़ प्रदेश का ऐसा अंचल है जहां विधानसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं और लोकसभा की भी। इस अंचल के दम पर ही भाजपा 15 साल से प्रदेश की सत्ता में थी। पर इस बार यहां का मतदाता भाजपा से विमुख हुआ और उसे सत्ता से बेदखल होना पड़ा। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में यहां जीत दर्ज कर प्रदेश में अपनी सरकार बना ली। लोकसभा चुनाव में भी इस अंचल पर सबकी नजर है। भाजपा और कांग्रेस अपने वर्चस्व के लिए यहां पूरी ताकत झोंक रही है। विस चुनाव के नतीजों को आधार मानें तो मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्र्रेस 6 सीटों में भाजपा पर भारी है पर भाजपा के जोर मारने पर भाजपा-कांग्रेस का चुनावी मुकाबला इस बार फिफ्टी-फिफ्टी पर छूट सकता है। भाजपा और कांग्रेस को इस अंचल की आठ में से चार-चार लोकसभा सीटें मिल सकती है।

भाजपा को सिर्फ मंदसौर में बढ़त

विस चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा को सिर्फ मंदसौर में ही बढ़त मिली है। जहां भाजपा ने 8 में से 7 विस सीटों में जीत दर्ज की है। दूसरे क्रम पर इंदौर है जहां भाजपा को कांग्रेस के बराबर 4 विस सीटें मिली हैं। इस लिहाज से तो भाजपा को सिर्फ दो सीटें मिलना चाहिए पर जानकारों का कहना है कि भाजपा इनके अलावा देवास एवं उज्जैन लोकसभा सीटे भी निकाल सकती है हालांकि इस बार यह आसान नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस ने 6 सीटों पर बनाई थी बढ़त

मालवा-निमाड़ की 8 में 6 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां विस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त बनाई है। देवास और उज्जैन के अलावा रतलाम-झाबुआ, खंडवा, खरगोन एवं धार में भाजपा पर कांग्रेस भारी पड़ी है। रतलाम-झाबुआ में कांगे्रस ने 8 में से 5, खंडवा में 4, खरगोन-धार में 6-6 विस सीटों में जीत दर्ज की है।

कांग्रेस के पास 2009 दोहराने का अवसर

विस चुनाव के नतीजों के आधार पर कांग्रेस के पास इस लोकसभा चुनाव में 2009 दोहराने का अवसर है। 2009 में भाजपा के अधिकांश दिग्गज धराशाही हो गए थे और कांग्रेस ने 8 में से 6 लोकसभा सीटें जीत ली थी। तब देवास से सज्जन सिंह वर्मा, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, खंडवा से अरुण यादव, धार से राजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, उज्जैन से प्रेमचंद गुड्डू और रतलाम झाबुआ से कांतिलाल भूरिया जीते थे।

Updated : 2019-03-18T22:53:24+05:30

Naveen

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