कांग्रेस के क्षत्रप अपने ही गढ़ में सुरक्षित नहीं

कमलनाथ-सिंधिया को घर में घेरने भाजपा ने बनाया मास्टर प्लान
17वीं लोकसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश में कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सहित प्रदेश के क्षत्रपों की नींद उड़ा दी है। सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय क्षत्रपों को उनकी पुस्तैनी सीट पर चुनाव लडय़ा गया तो एक भी सीट कांग्रेस नही जीत पाएगी। सर्वे की इस रिपोर्ट के बाद अब कांग्रेस संगठन कों नई रणनीति बनकर चुनावी तैयारी में जुटना पड़ा है। इधरकांग्रेस के दो प्रमुख क्षत्रप मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके गढ़ में घेरने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति तैयार कर ली है। रणनीति के तहत कांग्रेस के इन दोनों नेताओं को इनके अपने इलाकों में घेरने के लिए इनके चुनाव क्षेत्रों में भाजपा की ओर से बड़े नेताओं की पूरी फौज उतारी जाएगी। साथ ही यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर अन्य दिग्गज नेताओं की सभाएं होंगी। भाजपा का फोकस दोनों सीटों पर कमलनाथ एवं सिंधिया की घेराबंदी करने पर होगा, ताकि यह दोनों नेता प्रदेश की अन्य सीटों पर अधिक समय न दे पाएं। हालांकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उत्तरप्रदेश राज्य का प्रभारी बनाया है, जिसके कारण उन्हें वहां की सीटों पर भी समय देना होगा।
कमलनाथ के सामने चुनौती
मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से अपने पुत्र नकुलनाथ (संभावित उम्मीदवार) को जिताकर इस सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व बनाए रखने के साथ-साथ खुद के लिए विधानसभा उपचुनाव जीतने की चुनौती होगी। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री कमलनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य नही बने हैं। ऐसे में 6 माह की अवधि के अन्दर उन्हें विधानसभा का सदस्य बनना जरुरी है। उन्हे विधानसभा का सदस्य बनाने के लिए छिंदवाड़ा से निर्वाचित कांग्रेस विधायक दीपक सक्सेना ने पिछले दिनों त्यागपत्र देकर सीट खाली की है। इस सीट पर उप चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही होना है। ऐसे में भाजपा के लोकसभा प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह अपनी टीम के साथ छिंदवाड़ा में डेरा डालने जा रहे हैं।
सर्वे ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता
मुख्यमंत्री कमलनाथ और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से कराए गए अलग-अलग सर्वे मे कई सीटों पर समीकरण बदले नजर आ रहे है। सर्वे की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कांग्रेस हाईकमान की चिंताएं बढ़ गई हैं। यही वजह रही है कि अब कांग्रेस संगठन कों नई रणनीति बनकर चुनावी तैयारी में जुटना पड़ा है। खबर है कि भाजपा की रणनीति के चलते कांग्रेस के बड़े नेताओं की सीटों में हेरफेर किया जा सकता है। गुना में बदले हालात और ग्वालियर सीट पर उपयुक्त उम्मीदवार न होने के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना के बदले ग्वालियर से चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं।
क्षत्रपों की सीटें खतरे में, कांग्रेस बदल सकती है सीटें
सर्वे की रिपोर्ट में गुना की परिस्थितियां अनुकूल नहीं बताई गईं। अभी तक सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने गुना संसदीय क्षेत्र में फोकस कर रखा था। सर्वे रिपोर्ट ने कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। संभावना जताई जा रही है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद सिंधिया ग्वालियर से उतरेंगे। वही दिग्विजय सिंह को राजगढ़ की जगह भोपाल से चुनाव लडऩे को कहा गया है। चूंकि अभी तक कांग्रेस को भोपाल से ऐसा उम्मीदवार नही मिल सका है, जो सौ टका कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करा सके। वहीं, अजय सिंह सतना को छोडक़र सीधी की राह पर बढ़ चले हैं। सर्वे में यह बात सामने आई है कि सतना में अजय सिंह का विरोध हो रहा है, जिससे एक बार फिर उन्हें परेशानी आ सकती है। सीधी में पिछले चुनाव मे हार का अंतर कम रहा है, इसी के चलते अजय सिंह ने सतना छोडक़र अब सीधी की राह पकड़ ली है।
बड़े नेताओं के बीच जारी रही खींचतान
समीकरण बदलने के कारण रीवा से दिवंगत नेता सुंदरलाल तिवारी के पुत्र सिद्धार्थराज को टिकट देने पर सहमति बन रही है। बैठक में करीब एक दर्जन सीटों पर कमलनाथ और दिग्विजय के बीच खींचतान की भी खबरे रही। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह स्वयं के लिए राजगढ़ की सुरक्षित सीट चाहते हैं, जबकि मुख्यमंत्री उन्हें भोपाल से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। दिग्विजय भोपाल के बजाए इंदौर को पसंदीदा सीट मानते हैं। होशंगाबाद सीट के लिए मुख्यमंत्री की पसंद शैलेंद्र दीवान हैं, जबकि सिंह की ओर से रामेश्वर नीखरा का नाम है। इस सीट से सुरेश पचौरी भी जोर आजमाइश में लगे हैं। विदिशा से दिग्विजय, राजकुमार पटेल को चाहते हैं, वहीं, कमलनाथ की इच्छा शैलेंद्र पटेल को लड़ाने की है। ऐसी ही कुछ स्थिति जबलपुर में है, जहां नाथ की ओर से विश्वमोहन दास का नाम है, जबकि दूसरे गुट की ओर से अन्नू जगत सिंह और प्रेम दुबे के नाम सामने आ रहे हैं। वही सर्वे के बाद माना जा रहा है कि अजय सिंह को पार्टी अब सीधी से चुनाव लड़वा सकती है। मुरैना सीट से बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक बलवीर सिंह दंडोतिया ने भी दावेदारी जताई है। मंदसौर सीट से मीनाक्षी नटराजन को पार्टी चुनाव लड़ाने के मूड में है, लेकिन वे इच्छुक नहीं है।
जातीय समीकरण भी हावी
बुंदेलखंड की खजुराहो सीट पर जातीय समीकरण को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। बुंदेलखंड में सागर और दमोह से पिछड़ा वर्ग प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति में खजुराहो से ब्राह्मण नेता को टिकट दिए जाने की चर्चा है। क्षेत्र में ठाकुर दो मंत्री गोविंद सिंह राजपूत व ब्रजेंद्र सिंह राठौर होने से पार्टी नेतृत्व के सामने दुविधा की स्थिति बनी हुई है। ब्राह्मण नेताओं में हारे प्रत्याशी मुकेश नायक नाराज दिखाई दे रहे हैं तो पीसीसी के पूर्व संगठन प्रभारी महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी हाईकमान को अपना पक्ष रख चुके हैं।बैतूल में लोकसभा चुनाव 2014 के हारे प्रत्याशी अजय शाह व रामू टेकाम के बीच कशमकश की स्थिति है। वहीं, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, विदिशा, मंदसौर में पार्टी को जीतने वाले प्रत्याशियों की तलाश है।
इनके नाम तय
कांग्रेस में जिन 17 नामों पर सहमति बनी है, उनमें छिदंवाड़ा से नकुलनाथ, रतलाम-झाबुआ से कांतिलाल भूरिया, मुरैना से रामनिवास रावत, भिंड से महेंद्र बौद्ध, सागर से प्रभूसिंह ठाकुर, टीकमगढ़ से संजय कसगर, दमोह से रामकृष्ण कुसमरिया, सतना से राजेंद्र सिंह, रीवा से सिद्धार्थ राज तिवारी, सीधी से अजय सिंह, मंडला से गुलाब सिंह, बालाघाट से विश्वेश्वर भगत, देवास से प्रहलाद टिपानिया, उज्जैन से नीतिश सिलावट, धार से गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, खरगोन से प्रवीणा बच्चन तथा खंडवा से अरुण यादव का नाम शामिल है।
स्वतंत्र को सौंपी थी यह जिम्मेदारी
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक साल पहले स्वतंत्र देव सिंह को मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कब्जे वाली छिंदवाड़ा, गुना और रतलाम लोकसभा सीट पर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। स्वतंत्र देव ने पिछले एक साल में इन तीनों लोकसभा क्षेत्रों का कई बार दौरा भी किया, लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को इन तीनों क्षेत्रों में कड़ी हार का सामना करना पड़ा है। चूंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार चली गई है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व ने स्वतंत्र देव सिंह को मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारी बना दिया है। पिछले दो महीने के भीतर उन्होंने प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों का दौरा किया है। स्वतंत्र देव सिंह ने छिंदवाड़ा के लिए जमावट शुरू कर दी है।
