MP बोर्ड एग्जाम के फर्जी प्रश्न पत्र इंटरनेट पर वायरल, साइबर पुलिस ने छात्रों को किया सतर्क
भोपाल। मध्यप्रदेश के बोर्ड परीक्षाओं के लिए साइबर अपराधियों ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है। 10 - 12 वीं के छात्रों को अच्छे अंकों का लालच देकर ठग सोशल मीडिया पर लीक पेपर बेचने का दावा कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस कमिश्नरेट भोपाल ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है।
पुलिस ने साफ किया है कि इंटरनेट पर वायरल हो रहे प्रश्नपत्र पूरी तरह फर्जी हैं और छात्र इनके झांसे में आकर अपना भविष्य और पैसा बर्बाद न करें। बोर्ड परीक्षा से जुड़ी किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए सिर्फ माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट ही देखें।
ठग इस तरह कर रहे ठगी
मध्यप्रदेश साइबर पुलिस ने कहा है कि बोर्ड परीक्षा नजदीक आते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच घबराहट होने लगी है। इसी का फायदा उठाने साइबर अपराधियों का गिरोह सक्रिय हो गया है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर लीक पेपर के नाम पर हो रही ठगी से सावधान रहें। यह संज्ञान में आया है कि कई जालसाज टेलीग्राम, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉम्र्स पर ग्रुप बनाकर यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास बोर्ड परीक्षा के असली प्रश्नपत्र मौजूद हैं।
ये ठग छात्रों को विश्वास दिलाने के लिए प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से या हाथ से लिखे सॉल्यूशन साझा करते हैं। इसके बाद वे पूरे पेपर के बदले छात्रों से ऑनलाइन पेमेंट के जरिए मोटी रकम की मांग करते हैं। साइबर पुलिस ने कहा है कि यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है और इन फर्जी पेपर्स का वास्तविक परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं होता।
सोशल मीडिया ग्रुप पर पुलिस की पैनी नजर
साइबर सेल ने बताया कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर कई ऐसे संदिग्ध ग्रुप मिले हैं, जो पेपर लीक की अफवाह फैला रहे हैं। पुलिस इन ग्रुप के एडमिन और संदिग्ध नंबरों की जांच कर रही है। वही सोमवार से साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखना शुरू कर दिया है। पुलिस ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही ऐसे किसी ग्रुप का हिस्सा बनें।
फर्जी पेपर खरीदना अपराध
एडवाइजरी में पुलिस ने चेतावनी दी गई है कि पेपर लीक के नाम पर पैसे का लेन-देन करना या फर्जी प्रश्नपत्रों को फैलाना कानूनन अपराध है। सोशल मीडिया पर फर्जी पेपर या अफवाह फैलाना कानूनन अपराध है। यदि कोई छात्र या व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे छात्र का करियर भी दांव पर लग सकता है।
