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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से "स्वदेश" की बातचीत

मैं प्रदेश का वही पुराना सेवक, सिर्फ ऊर्जा नई है

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से  "स्वदेश" की बातचीत

भोपाल (विशेष प्रतिनिधि)। मध्य प्रदेश में विश्वसनीयता का प्रतीक बन चुके शिवराज सिंह राज्य में नई उम्मीद लेकर आए हैं। अपनी चौथी पारी में शपथ लेने के क्षण से ही वे कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से प्रदेश को बचाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। 74 बंगले का बी-8, उनका आवास इन दिनों कोरोना से निपटने का नियंत्रण कक्ष बन गया है। यहीं से मंत्रालय व प्रशासकीय कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। स्वभाव से दयालु शिवराज सिंह ने दिखाया है कि वे कठिन परिस्थितियों में कुछ कठोर निर्णय भी ले सकते हैं। जनमानस में लोकप्रिय प्रदेश के यह वही शिवराज हैं, बस ऊर्जा नई है। 'मध्य स्वदेश' के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश का माहौल बिगाडऩे वाले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रस्तुत है बातचीत के अंश-

सवाल : मुख्यमंत्री बनते ही कोरोना संकट आ गया, प्रदेश की जनता, खासकर इंदौर को आप किस प्रकार आश्वस्त करना चाहेंगे?

जवाब: कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए मध्यप्रदेश स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल स्टाफ और प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति है, जन प्रतिनिधि होने के नाते मेरा यह दायित्व है कि मैं प्रदेश के भाई-बहनों, बेटा-बेटियों की रक्षा के लिए अपना पूर्ण योगदान दूं। नागरिकों की सुरक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी का लक्ष्य लेकर हम कार्य कर रहे हैं। जहां तक इंदौर की बात है, तो यह अधिक संवेदनशील जिले के रूप में सामने आया है, जहां संक्रमितों की संख्या तीव्रतर है। सख्ती के साथ लॉकडाउन का पालन किया जाना नितांत आवश्यक है। इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में विदेश यात्रा करने वाले नागरिकों की संख्या अधिक होने के कारण तथा जागरुकता के अभाव और छुपाने की प्रवत्ति के कारण प्रारंभिक स्तर पर संक्रमण का पता नहीं चल पाया। आवाजाही से लोगों में यह संक्रमण फैल गया।

सवाल: शपथ के समय आपकी प्राथमिकता कोरोना पर विजय प्राप्त करने की थी, लेकिन तबादले भी हो रहे हैं और विगत सरकार के कुछ फैसले भी। इतनी जल्दी क्यों?

जवाब: निश्चित रूप से कोरोना जैसे वैश्विक संकट से उबरना हमारी पहली प्राथमिकता है, लेकिन कुछ फैसले ऐसे थे जिन में बदलाव आवश्यक थे, अलग-अलग परिस्थितियों और समय को देखते हुए व्यवस्था में कुछ परिवर्तन और उनसे सम्बंधित निर्णय लेने पड़ते हैं। जिन्हें आप तबादले कह रहे हैं वह ऐसे ही समय में लिए गए निर्णय हैं। कोरोना से लडऩे के लिए हमने प्रशासनिक लिहाज से सिर्फ कुछ सामान्य औपचारिकता की है, जिसके तहत सभी वरिष्ठ अधिकारियों व प्रशासनिक तंत्र को इस आपदा से लडऩे में लगाया है। हर हाल में प्रदेशवासियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और अभी इस संकट से उबरना ही हमारी सोच का केंद्र है।

सवाल: शिवराज जी , पिछले तीन बार के मुख्यमंत्री से इस बार किस प्रकार अलग हैं?

जवाब: मैं जनता का सेवक हूं और उसकी भलाई मेरा एकमात्र लक्ष्य है। पिछले तीन कार्यकाल में भी मैंने इसी लक्ष्य के साथ काम किया है और आगे भी जारी रहेगा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि जनता ने हर समय पूरा साथ दिया, इसके लिए प्रदेश की जनता को धन्यवाद देना चाहूंगा। इस संकल्प के साथ कि हर दिन नया दिन होता है, नयी ऊ र्जा लाता है और मैं उसी नई ऊर्जा के साथ प्रदेश के विकास के लिए कार्य करता रहूंगा। मैं प्रदेश की जनता का वही पुराना सेवक हूं।, बस ऊर्जा नई है।

सवाल: मंत्रिमंडल का गठन कब होगा? क्या इससे प्रशासन में दिक्कत नहीं आ रही है?

जवाब: निश्चित रूप से किसी भी प्रदेश के विकास में मंत्रिमंडल की बड़ी जिम्मेदारी होती है। सभी मंत्रीगण अपने-अपने विभागों को लेकर विकास की कार्य योजना तैयार कर उनका क्रियान्वयन करते हैं ताकि प्रदेश में विकास कार्यों को मूर्तरूप दिया जा सके । लेकिन अभी कोरोना जैसे वैश्विक संकट के चलते इसे कुछ दिनों के लिए स्थिगित रखा गया है, समय अनुकूल होते ही इसे मूर्त रूप प्रदान किया जाएगा।

सवाल - कोरोना की रोकथाम एवं आम आदमी की तकलीफों के लिए शासन और क्या प्रयास करने जा रहा है?

जवाब - इस समय राष्ट्र के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है, कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकना। इसे सामूहिक प्रयासों से ही पूरा किया जा सकता है। कोरोना संक्रमण की चेन को आगे बढऩे से रोकने के लिए ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना है, जो इस वायरस से संक्रमित हैं। फिर समाज में जागरूकता भी फैलानी है ताकि लोगों में इसे लेकर गलत धारणाएं ना बनें। विदेश यात्रा से लौटे नागरिकों और अन्य राज्यों में फंसे हुए नागरिकों पर विशेष ध्यान, मनोवैज्ञानिक समझाईश। तनाव और भय को दूर करने के प्रयास।

दूसरी बात, विदेश यात्रा कर लौटे नागरिकों को, चाहे वे किसी भी राज्य के हों, उन्हें मानसिक रूप से तैयार करना है ताकि उनके मन में भय और तनाव व्याप्त न हो। लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से समझाइश देकर उन्हें इस महामारी से लडऩे के लिए तैयार करना है। जरूरी संसाधनों की उपलब्धता, सजगता और सतर्कता के साथ हमें इस समस्या का सामना करना है। मध्यप्रदेश में हमने निरीक्षण के पूरे इंतजाम किये हैं। प्रदेश के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी हर क्षेत्र में व्यवस्था को देख रहे हैं। हमने अलग अलग व्यवस्था के लिए अलग प्रकोष्ठ, अलग -अलग अधिकारी नियुक्त किये हैं और नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किये हैं।

केंद्र के प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन

केंद्र सरकार द्वारा हमें कोरोना की रोकथाम के लिए जो प्रोटोकॉल मिला है उसके बेहतर क्रियान्वयन के लिए कार्य किया जा रहा है। बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ती में कमी नहीं की जायेगी। सभी प्रकार के मेडिकल उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। हमने सभी डिस्टलरी को पर्याप्त मात्रा में सेनेटाइजर बनाने के आदेश दिए हैं। मास्क, जांच-किट और अन्य उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। राशन और खाद्यान के संबंध में भी मध्यप्रदेश में पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

गरीब और मजदूर भाइयों के लिए राशन व रहने और खाने का विशेष इंतजाम

मध्यप्रदेश में सभी जरूरतमंदों को भोजन एवं राशन की व्यवस्था की गई है। औसतन दो लाख लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में एवं 2.5 लाख लोगों को शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन भोजन दिया जा रहा है। बाहरी राज्यों के 15 हजार से अधिक लोगों को भोजन, आश्रय और दवाइयां मुहैया करवाई जा रही हैं।

जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही और उपचार के लिए विशेष प्रबंध

प्रदेश में जमाखोरी की शिकायत मिलने पर सख्त कार्यवाही की जायेगी। आमजन को जरुरत का समान निर्बाध रूप से उपलब्ध हो ऐसी व्यवस्था पर हमने विशेष ध्यान दिया है। इसके साथ ही हमने शासकीय अस्पतालों, निजी अस्पतलों और मेडिकल कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। नर्सिंग होम एसोसिएशन के साथ बैठक कर हमने निजी चिकित्सालयों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी आयोजित किया। संकट की इस घड़ी में कई निजी चिकित्सालय भी मदद के लिए आगे आए हैं।

जीवन सबसे महत्वपूर्ण

लॉक डाउन बढ़ेगा या इसमें ढील दी जाएगी। इस पर चल रही माथपच्ची के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जीवन महत्वपूर्ण है। लॉक डाउन सहा जा सकता है पर जिंदगी अगर चली गई तो लौट के नहीं आती। अर्थव्यवस्था भी संभाली जा सकती है। अत: जरूरी हुआ तो लॉक डाउन बढ़ाया जा सकता है।

Updated : 2020-04-09T12:21:47+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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