भारत भवनः बीएलएफ में बाबर पर चर्चा को लेकर विरोध, आयोजकों ने विषय पर चिपकाया सफेद कागज

भोपाल। शुक्रवार से शुरू हुआ तीन दिवसीय भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल बीएलएफ पहले ही दिन विवादों में आ गया है। भारत भवन में आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में 'बाबर क्वेस्ट फॉर हिंदुइज्म' विषय पर रखे गए सत्र ने साहित्यिक, सामाजिक क्षेत्र में खलबली मचा दी। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही कई साहित्य कारों ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध शुरू कर दिया।
आयोजकों पर पुलिस करे कार्रवाई: हिंदू संगठन
हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इसे बाबर के महिमामंडन का प्रयास बताया। संगठन का कहना है कि जिसने हिंदू मंदिरों को तोड़ा और लूटा, उस ऐतिहासिक आक्रांता को किसी भी रूप में मंच देना समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। तिवारी ने कहा कि बाबर का महिमामंडन किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में पुलिस को दिए ज्ञापन में मांग की कि पुलिस, आयोजकों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करे।
आयोजक बोले-भारत भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का विरोध के बाद आयोजकों ने कार्यक्रम स्थल पर सत्र से जुड़े पोस्टर को बदलकर विषय के ऊपर सफेद कागज चिपका दिया। बीएलएफ के आयोजकों ने इस विषय पर कहा कि यह विषय बाबर की प्रशंसा से जुड़ा नहीं है। इससे ज्यादा वह इस विषय पर कुछ नहीं कह सकते हैं।
कांग्रेस ने बताया शर्मनाक
कांग्रेस के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में बाबर के महिमामंडन बेहद शर्मनाक है। भाजपा सरकार जो कि बाबर की कब्र खोदती फिर रही है, अब सरकारी पैसे से सरकारी जगह पर अब बाबर की तारीफ में जुट गई है। यह सरकार के दो चेहरे हैं। दंगा कराओ और दंगाईओं के कधे पर हाथ रखो। यह भाजपा की नीति है। उन्होंने कहा कि बाबर को गालियां देने वाले लोग, बाबर की स्तुति में कार्यक्रम करा रहे हैं, जोकि शर्मनाक है।
युवा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक
भारत भवन में भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल बीएलएफ के आठवें संस्करण का उद्घाटन सत्र अंतरंग सभागार में शुरू हुआ। साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद मिश्र मुख्य अतिथि रहे। उनके साथ सेज समूह के चेयरमैन संजीव अग्रवाल और भारत भवन न्यास के चेयरमैन वामन केन्द्रे विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। फेस्टिवल के फाउंडर डायरेक्टर राघव चन्द्रा और को-फाउंडर अभिलाष खांडेकर ने फेस्टिवल की परिकल्पना और उद्देश्य को साझा किया। इस मौके पर अभिनेता-थियेटर कलाकार पीयूष मिश्रा की पुस्तक' तुम्हारी औकात क्या है चर्चा का केंद्र रही। कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्यांगना मीरल उपरित की भावपूर्ण गणेशवंदना से हुई। अपने संबोधन में राघव चन्द्रा ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में साहित्य मानव जीवन को दिशा देने का कार्य करता है उन्होंने कहा कि युवा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के भविष्यवाहक हैं।
स्वदेश ने इस विषय पर विरोध होने की संभावना को लेकर 9 जनवरी को खबर प्रकाशित की थी। खबर छपने के बाद शुक्रवार को विरोध करते हुए श्यामला हिल्स टीआई को ज्ञापन दिया।
