शॉकिंग! भोपाल में 10 दिनों तक लिफ्ट में कुचलता रहा बुजुर्ग का शव, पॉश कॉलोनी में लापरवाही की हदें पार

शॉकिंग! भोपाल में 10 दिनों तक लिफ्ट में कुचलता रहा बुजुर्ग का शव, पॉश कॉलोनी में लापरवाही की हदें पार
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भोपाल की चिनार ड्रीम सिटी में 77 साल के बुजुर्ग का शव 10 दिन तक लिफ्ट शाफ्ट में पड़ा रहा, लापरवाही उजागर।

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सिस्टम, सुरक्षा और जवाबदेही—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होशंगाबाद रोड स्थित पॉश कॉलोनी चिनार ड्रीम सिटी में 77 वर्षीय बुजुर्ग का शव करीब 10 दिनों तक लिफ्ट शाफ्ट में पड़ा रहा, और इस दौरान लिफ्ट उनके ऊपर से बार-बार चलती रही।

इस भयावह सच का खुलासा तब हुआ, जब पूरी इमारत में तेज़ और असहनीय बदबू फैलने लगी। चमकदार फ्लोर और आधुनिक सुविधाओं से सजी कॉलोनी के भीतर छिपी यह सच्चाई किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

मृतक की पहचान ने सबको चौंकाया

मृतक की पहचान प्रीतम गिरी गोस्वामी (77) के रूप में हुई है। वह अपने बेटे मनोज गिरी के साथ फ्लैट नंबर D-304 में रहते थे। परिजनों के मुताबिक, 6 जनवरी को दोपहर करीब तीन बजे वह घर से निकले थे और कहा था कि थोड़ी देर में लौट आएंगे, लेकिन इसके बाद वह कभी वापस नहीं आए। अगले दिन 7 जनवरी को परिजनों ने मिसरोद थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सीसीटीवी फुटेज में वह कॉलोनी परिसर में चलते हुए दिखे, लेकिन इसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला।

खुले लिफ्ट शाफ्ट में गिरे, किसी को भनक तक नहीं लगी

जांच में सामने आया कि बुजुर्ग तीसरी मंज़िल पर अपने फ्लैट के सामने खुले लिफ्ट शाफ्ट में गिर गए थे। रहवासियों का आरोप है कि लिफ्ट के दरवाज़े कई बार तब भी खुल जाते थे, जब लिफ्ट उस मंज़िल पर मौजूद ही नहीं होती थी। यही खुला शाफ्ट एक जानलेवा जाल बन गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बाद भी 8 से 10 दिनों तक लिफ्ट चालू रही और शाफ्ट में फंसे शव के ऊपर से ऊपर-नीचे होती रही।

16 जनवरी को सामने आया खौफनाक सच

16 जनवरी को लिफ्ट अचानक खराब हो गई। सोसायटी प्रबंधन ने टेक्नीशियन को बुलाया। जैसे ही ग्राउंड फ्लोर से लिफ्ट को ऊपर उठाया गया, पूरी बिल्डिंग में सड़ांध भरी बदबू फैल गई। एक निवासी ने बताया, 'जब बदबू असहनीय हो गई, तो शाफ्ट की जांच की गई। अंदर एक सड़ा-गला शव मिला।' कपड़ों और चप्पलों के आधार पर परिजनों ने शव की पहचान प्रीतम गिरी के रूप में की।

बिल्डर और सोसायटी प्रबंधन पर गंभीर आरोप

परिजनों और रहवासियों ने बिल्डर और सोसायटी प्रबंधन पर घोर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतक के बेटे मनोज गिरी ने बताया कि 6 जनवरी को ही लिफ्ट खराब थी और ग्राउंड फ्लोर से करीब दो फीट नीचे अटकी हुई थी। उन्होंने कहा, 'अगर गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रबंधन ने लिफ्ट की जांच की होती, तो मेरे पिता का शव इस हालत में नहीं मिलता।'

परिवार का यह भी आरोप है कि तीसरी मंज़िल के सीसीटीवी कैमरे सालों से खराब थे, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने क्या कहा?

मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। एसीपी रजनीश कश्यप ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह लिफ्ट शाफ्ट में गिरने से हुई दुर्घटना प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम में सीने में गंभीर चोटों से मौत की पुष्टि हुई है। लिफ्ट के संचालन और रखरखाव से जुड़े लोगों को नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि लापरवाही पाई गई, तो सख्त कार्रवाई होगी।

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

गौरतलब है कि पिछले साल मई में इसी इलाके की रॉयल फार्म विला कॉलोनी में भी लिफ्ट से जुड़ा दर्दनाक हादसा हुआ था। वहां बिजली गुल होने पर लिफ्ट में फंसे आठ साल के बच्चे को बचाने की कोशिश में उसके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई थी।

सवाल वही- जवाबदेही कौन लेगा?

दो कॉलोनियां, दो लिफ्ट हादसे और दो मौतें… ये घटनाएं सवाल खड़ा करती हैं कि जब सिस्टम फेल होता है और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तो आम सुविधाएं कैसे मौत का कारण बन जाती हैं।

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